जब कांग्रेस ने झूठे ताबूत मामले पर २२ दिन तक संसद नही चलने दी थी और २ साल तक जार्ज फर्नांडीस को संसद मे बोलने नही दिया था तब क्या संसद और लोकतंत्र का अपमान नही था ?
जब कांग्रेसी बलात्कार करे तब "सत्य के साथ मेरा प्रयोग" और दूसरे करे तो बलात्कार ?
मित्रों, एक तरफ कारगिल मे हमारे जवान शहीद हो रहे थे तब उनके पार्थिव शवो को अविलम्ब उनके घरों को भेजना जरूरी था, क्योकि २४ घंटे के बाद शवो मे सडान शुरू हो जाती है | बहुत सीधी बात है कि अगर सामने शव पड़ा हो तो आप ग्लोबल टेंडर निकालकर फिर उन सभी टेंडरो मे जो कम दाम का टेंडर हो उसे सलेक्ट करके फिर आप उसको ताबूत बनाने का आर्डर नही दे सकते | बल्कि जिस कम्पनी के पास बने बनाये ताबूत पड़े हो आप उसे ही मंगा लेंगे |
और उस समय ताबूत जिस कम्पनी से मंगाए गए थे वो सोमालिया मे संयुक्त राष्ट्र शांति सेना को ताबूत सप्लाई करती थी | और भारत ने उसी दाम पर ताबूत खरीदे जिस दाम पर संयुक्त राष्ट्र खरीदता था |
मित्रों, उस वक्त भी यही सीएजी था जिसे आज प्रधानमंत्री बकवास बता रहे है, यही सीएजी था जिसे मनीष तिवारी कहते है कि जीरो लगाने की आदत पड़ गयी है | सीएजी ने उस वक्त सिर्फ यही टिप्पड़ी की थी कि अगर रक्षा मंत्रालय ग्लोबल टेंडर मंगाती तो ताबूत सस्ते मिल सकते थे, लेकिन किसी को भी ये अंदाजा नही होगा कि हमारे कितने जवान शहीद होंगे इसलिए अचानक से ताबूत खरीदे गए जो महगे पड़े |
मित्रों, सीएजी ने कही भी नही कहा कि कोई घोटाला हुआ | और ये नीच कांग्रेस जो आज सीएजी को बकवास बता रही है वो सीएजी के सिर्फ दो लाइन को आधार बनाकर मीडिया और तहलका जैसी लोगो को खरीदकर इसे ताबूत घोटाला का नाम दे दिया |
सोचिये, वाजपेई सरकार के तुंरत बाद कांग्रेस की सरकार बनी तो अगर सच मे ताबूत घोटाला हुआ था तो फिर कांग्रेस ने इसके जाँच के आदेश क्यों नही दिये ? क्यों नही एक एफआई आर दर्ज करवाई ?