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१-इन कंपनियों के पास बहुत पैसा होता है और देश का कानून और सरकारीतंत्र इनके हाथ में होता है.
२-उदहारण के तोर पर- ये उत्पादको से सीधे प्याज, आलू, गेंहू, लहसुन आदि जैस उत्पाद खरीद कर जमा कर लेते है और वो भी बहुत
सस्ते रेट में जैसे की १० रु या १५ रु किलो .
३- ये कम्पनियां सामान की जमाखोरी कर के गोदाम भर लेती हैं.
४-और जब बाजार में सामान की कमी हो जाती है तो उसके भाव बढ़ जाते है जैसे प्याज
४० रुपये किलो बिकेगा.
५- ये कंपनिया अपने जमा स्टाक से प्याज निकालकर ३८/-रु किलो बेचेगी और रोज अखबार
में प्रचार आयेगा की वालमार्ट प्याज ३८/- रु में बेच रही है. जबकि खुले बाजार में प्याज ४०/-रु किलो है.
६- बड़ी कंपनियों का यही रवैया पूरे विश्व में है, भारत में यह करना बहुत आसान
है क्योकि यहाँ पर नेता चोर है और कानून कमज़ोर .
७-हमारे समाज के गरीब दुकान बंद करके राहजनी और चोरी और जेबकतरी या डाका डालना शुरू कर देंगे क्योकि
वालमार्ट के आने से ठेले वालों की दुकानदारी तो बंद होनी ही है.
यह ठगी बंद होनी चाहिए -इस लिए इस सरकार को सत्ता विहीन करना ही होगा..
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With Regards & Thanks,
Rajiv Gulati
Development Officer
L.I.C. of India
Branch No. 11-W
M.No. 09212111777
09810163150
We turn ordinary people into Millionaires !
and
We prevent Millionaires from becoming Ordinary People !