( " सोए हुए रावण को आज जगायेगे फिर जलाएंगे " ------ आज समाचार पत्र
में छपी रावण की इस तस्वीर ( संलग्न ) और उसके टाइटल को पढ़ मेरे मन में
कुछ विचार आये आप सबके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ )
रावण कब सोया ? शायद कभी भी नहीं, वो तो हमारे अन्दर हमेशा जगा रहा, जगा
हुआ है और शायद हमेशा जगा रहेगा, तो फिर उसे जगाने की बात कहाँ ? हां उस
जगे हुए रावण को जलाने की कोशिश जरुर हम सालो साल से कर रहें हैं,पर शायद
आज तक नहीं मार पाए, बल्कि वो हमारे अन्दर और मजबूत और ताकतवर हुआ है |
इसीलिये आज पुनः हम राक्षस युग की तरफ जा रहें हैं पर साथ में कहीं न
कहीं यह भी आशा जलाए बैठे हैं की कोई राम फिर प्रकट हों और हमें राक्षस
युग में लौटने से बचाए, हाँ हम जरुर राम नहीं बनना चाहते क्योंकि हमें
राज छोड़ने की इच्छा नहीं है,और राज छोड़ें किसके भरोसे भरत अब कहाँ है ?
हममे वनवास जाने का हौसला भी तो नहीं है और अब लक्ष्मण भी कहाँ है , जो
हमारे वनवास में अपनी पत्नी को छोड़ हमारे साथ चले और शायद अब सीता भी तो
नहीं है , जो राम के साथ महल छोड़ वनवास को जाए | और हमारी सीता को कोई
रावण ले जाए ये हम नहीं चाहते हैं,हां किसी की सीता को हम चुरा सकें ये
जरुर अब हमारी लालसा रहती है | तो फिर किसे माने रावण ? जिसे हम जलाएं ?
कहाँ अब हैं हनुमान ?,कहाँ है अब सुग्रीव और अंगद ? जिनके भरोसे हम रावण
से लड़ सकें और उसको मार सके ? और पहिले ये तो पता करें की हमारे बीच कौन
है राम ? जो रावण को मारने की नैतिकता और योग्यता रखता हो | आज इस शुभ
दिन पर इस पर विचार होना अत्यंत आवश्यक है ताकि हमारे राम राज्य का सपना
आकार ले सके |
पुनः शुभकामनाएं |
संजय श्रीवास्तव
दशहरे की हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं
Bahut hi accha