[inkeshaf alam] सरकार कि अदालत,अदालत कि सरकार

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inkeshaf alam

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Dec 27, 2010, 5:29:16 AM12/27/10
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सरकार कि अदालत,अदालत कि सरकार
ये कोई पहली दफा तो नहीं हुआ ! एक बिनायक  बाबु के ही साथ नहीं हुआ .ये निरंतर होता चल अरह है .
मुझे एक अदालत का वो फैसला भी याद अरह है जहाँ बलात्कारी पुरुष से पीडिता का विवाह करवाने का फैसला माननीय अदालत ने दिया था.पता नहीं क्यूँ मुझे तो हमेश फैसले सरकार के लगते है जैसे बाबरी मस्जिद का राजनीतगय फैसला ये फैसला तो मुझे अदालत का कम कांग्रेस का ज़यादा लगता है .सत्ता वाले गोलियां मारतें हैं और अदालत उम्र कैद दे रही . बिनायक  बाबु के सिलसिले में भी यही है कोई भी सरकार ये नहीं चाहती कि उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद (सलवा जुडूम ) को कोई संगठन या व्यक्ति टक्कर दे, ये पूजींवादी लोकतंत्र का किसी समाज वादी सोच से शंघर्ष है ही नहीं ये सिर्फ पुजिंवादी सभ्यता का हश्र है कि उसके सारे स्तभ आपस में गठजोड़ करके सत्ता कि निरंकुशता बरक़रार रखते है.

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Posted By inkeshaf alam to inkeshaf alam at 12/27/2010 03:59:00 PM
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