[inkeshaf alam (aawara sajde)] भवंर से डरा हुआ , और किनारों से सहमा हुआ

1 view
Skip to first unread message

inkeshaf alam

unread,
Jun 8, 2011, 1:32:44 AM6/8/11
to inkesha...@googlegroups.com
मै एक अधुरा सच , या सच के समुन्दर की एक बूँद.
गुनाह के पत्थरो पे सूखती सी ,..हर पल निरंतर 
मै एक अनदेखा ख्वाब 
या नींद के साये में ख्वाब के टुकड़े ..पलकों में जम सा गया है
हर पल गिरता हुआ
मै इक छोटी सी तमन्ना .....
या आस का इक  टुकड़ा छोटा सा ,ज़िन्दगी जीने के लिए ज़रूरी सा इक एक एहसास
मै इक छोटी सी कश्ती
वक़्त के दरिया में ....बेवजह बहता हुआ
भवंर से डरा हुआ , और किनारों से   सहमा हुआ




--
Posted By inkeshaf alam to inkeshaf alam (aawara sajde) at 6/08/2011 11:02:00 AM
Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages