गुलशन में झिझका गुल
पूरी तरह बंधा भरा मन
न बर्फ न रौशनी की दस्तक.........
सुबह की आहट :
वक़्त के कैलेण्डर से पिघल कर ....
मुहब्बत के वक़्त में जाती हुई रात की इबारत में
शयेद एक नया नुक्ता गिरने गिरने को है
ऐसे वक़्त में मेरी जान !
मै अपने अश्क को इश्क करना चाहता हूँ
मै आँख बंद करता हूँ चली आओ
मेरी ज़िन्दगी की रहो को रोशन करने वाली "निशा"