विद्या सर्वस्य भूषणम

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GWALIOR TIMES

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Jan 22, 2007, 6:14:49 PM1/22/07
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विद्या सर्वस्य भूषणम

·         नित्यानंद दुबे

''सुन्दरोऽपि सुशीलोऽपि कुलीनोऽपि महाधन:।
शोभते न विना विद्यां, विद्या सर्वस्य भूषणम ।''

(कोई व्यक्ति कितना भी सुन्दर, सुशील, कुलीन, धनवान क्यों न हो ये चीजें विद्या के बिना शोभा नहीं देतीं क्योंकि विद्या सभी का आभूषण है।)

सदियों से चली आ रही हमारी यह विचारधारा आज प्रदेश-देश की सीमाओं को लांघती हुई विश्व व्यापक हो चुकी है। सम्पूर्ण विश्व भारतीय शिक्षा एवं भारतीय मस्तिष्क का लोहा मान रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने तो अपने देशवासियों को चेतावनी तक दे दी है कि यदि वे सतर्क न रहे तो एक दिन अमेरिका के सभी अच्छे पदों पर भारतीय पदासीन होंगे। ये कमाल है हमारी युग-युगान्तर से चली आ रही गरिमापूर्ण शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक शिक्षा के अनुपम संगम का। अंग्रेज चले गए। अंग्रेजी छोड़ गए। आज उसी अंग्रेजी को हमने दासता के चिन्ह नहीं बल्कि वैश्विक धरातल पर कामयाबी के शिख्रर तक पहुंचने का माध्यम बनाया है। इसी शैक्षणिक उन्नति का एक अंग है हमारा मध्यप्रदेश जहां शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए गत तीन वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए जाकर उन्हें कार्यरूप में परिणित किया गया है। तमाम उपलब्धियों के बावजूद प्रदेश के बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर चिन्तन, मनन, मंथन और तद्नुरूप सुधार कार्य जारी हैं। गत तीन वर्षों में 50 हजार से अधिक संविदा शिक्षकों की नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं। उच्च शिक्षा के प्रति आकर्षित करने के लिए हजारों बालिकाओं को नि:शुल्क साइकिलें वितरित की गई हैं, 'स्कूल चलें हम' अभियान के तहत अकेले जुलाई माह में ही शाला न जाने वाले डेढ़ लाख से अधिक बच्चों को शालाओं में प्रवेश दिलाया गया है। अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं जो आगे आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में नई बुलंदियों पर ले जाएंगे।

गुरुर्ब्रह्मा, गुरूर्विष्णु, गुरूर्देवो, महेश्वर:।
गुरू साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरूवे नम:॥

प्राचीनकाल से भारत में स्थापित गुरूमहत्ता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। गुरू के बिना शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को धनी बनाना असंभव है। प्रदेश के सभी विद्यालयों में पर्याप्त मात्रा में शिक्षक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में पहली बार इस वर्ष 51 हजार 992 संविदा शाला शिक्षकों की भर्ती की गई है। प्रदेश में इस वर्ष अभी तक संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-1 में 1707, श्रेणी-2 में 20 हजार 824 और श्रेणी-3 में 29 हजार 461 संविदा शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश जारी किए जा चुके हैं। शिक्षाकर्मियों एवं संविदा शिक्षकों के वेतन भत्ते में विसंगतियों को दूर करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य शासन ने विसंगतियों को दूर करने के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन कर मंहगाई भत्ते में बढ़ोत्तरी करके उनका मंहगाई भत्ता वर्तमान में 225 प्रतिशत कर दिया है।

शिक्षित बालिका एक शिक्षित समाज का निर्माण करती है जो प्रदेश की उन्नति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य शासन ने इस अवधारणा को दृष्टिगत रखते हुए बालिका शिक्षा के उत्थान के लिए साम-दाम, दण्ड-भेद सभी संभव प्रयास किए हैं। अधिकांश बालिकाएं अनेक कारणों से आठवीं कक्षा के उपरान्त पढ़ाई छोड़ देती थीं इसके मद्देनजर साइकिल प्रदाय योजना आरंभ की गई। कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने वाली एवं अपने गांव से अन्य गांव के स्कूल में प्रवेश लेने वाली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाली बालिकाओं के लिए वर्ष 2004 से आरंभ होने वाली इस ऐतिहासिक योजना का अब विस्तार किया गया है। वर्ष 2006 से गरीबी रेखा के ऊपर जीवन यापन करने वाली सामान्य बालिकाओं को भी नि:शुल्क साइकिलें प्रदान की जा रही हैं। योजना के प्रथम वर्ष में प्रदेश की 38 हजार 852 बालिकाओं, वर्ष 2005-06 में 38 हजार 249 बालिकाओं को नि:शुल्क साइकिलें प्रदाय की जा चुकी है। वर्ष 2006-07 में निर्धारित लक्ष्य 78 हजार 073 के तहत साइकिल वितरण जारी है। अब तक 70 हजार से अधिक बालिकाओं को साइकिलें बांटी जा चुकी हैं। योजना के तहत वर्ष 2005-06 के लिए तीन करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया हैं।

प्रतिभाशाली बच्चों को श्रेष्ठ विद्यालय की सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2005 में 265 विकासखण्ड मुख्यालयों पर उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना की गई है। प्रदेश के सभी 48 जिला मुख्यालयों सहित कुल 313 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में संचालित किया जा रहा है। इन स्कूलों में सुसज्जित प्रयोगशाला, समृध्द पुस्तकालय, आवश्यक खेल सामग्री, क्रीडांगन, कम्प्यूटर, अनुभवी एवं सुयोग्य शिक्षक आदि सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रत्येक विकासखण्ड मुख्यालय के उत्कृष्ट विद्यालय के लिए दस लाख रुपये प्रति विद्यालय के मान से राशि प्रदान की गई है। यह राशि विद्यालय की मूलभूत संरचना सुधारने पर खर्च की जा रही है। उत्कृष्ट विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं में अपने नाम के अनुरूप परिणाम भी दिए। इन विद्यालयों का वर्ष 2004-05 में 10वीं व 12वीं की परीक्षाओं में क्रमश: 84.11 प्रतिशत एवं 77.83 प्रतिशत और वर्ष 2005-06 की परीक्षाओं में दसवीं कक्षा का परिणाम 89.80 प्रतिशत और 12वीं का 88.55 प्रतिशत रहा। इन स्कूलों के लिए वर्ष 2005-06 के बजट में 18 करोड़ 30 लाख रुपये का प्रावधान किया गया।

मध्यप्रदेश में 4246 हाईस्कूल एवं 4055 हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2006-07 में 174 शासकीय माध्यमिक विद्यालयों को हाईस्कूलों में उन्नयन किया गया। इसी वित्तीय वर्ष से स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययनरत सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को भी बुक बैंक योजना के तहत शामिल किया गया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बच्चों के लिए नि:शुल्क पाठयपुस्तकों की व्यवस्था की गई है। वर्ष 2004-05 में इस योजना के तहत 1.47 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान कर 60 हजार अजा, अजजा, बच्चों को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2005-06 में 5 करोड़ रुपये का प्रावधान कर सभी छात्रों को नि:शुल्क पाठयपुस्तके उपलब्ध कराई गई हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक गुणवत्ता और स्कूलों के परीक्षाफल में सुधार के लिए वीडियो कान्फ्रेन्ंसिग के माध्यम से अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं जिनके उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। वीडियो कान्फ्रेन्ंसिग के माध्यम से प्रदेश के प्राचार्यों शिक्षकों से जीवंत संपर्क कर जहां स्थानीय स्तर पर विद्यमान समस्याओं और विसंगतियों को दूर किया गया है, वहीं सतत सम्पर्क से अध्यापन कार्य में भी सुधार हुआ है। वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का पाठ दूरस्थ स्थल के विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया गया। प्रदेश की शासकीय शालाओं में इस वर्ष 13 लाख 20 हजार 948 बच्चे माध्यमिक शालाओं में और 7 लाख, 06 बच्चे उच्चतर माध्यमिक शालाओं में पढ़ रहे हैं।

शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सभी स्कूलों को पाठयक्रम तथा पाठय सहगामी गतिविधियों के लिए वार्षिक शैक्षणिक कैलेण्डर उपलब्ध कराया गया है। हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में त्रैमासिक मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। शाला प्रबंधन में जनभागीदारी के लिए पालक शिक्षक संघ का गठन किया गया है। निदानात्मक शिक्षण की दृष्टि से विशेष कक्षाओं का आयोजन, किया जा रहा है। शिक्षकों को भी समय की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है। शिक्षकों को सेटेलाइट के माध्यम से कठिन विषयों जैसे कि गणित, विज्ञान एवं अंग्रेजी का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

प्रदेश में नि:शक्त छात्रों के लिए समेकित शिक्षा योजना का संचालन किया जा रहा है। भारत सरकार की इस योजना के तहत वर्ष 2004-05 में एक लाख 10 हजार नि:शक्त बच्चे अध्ययनरत रहे और 74,119 बच्चों का चिकित्सीय मूल्यांकन हुआ और 49,147 बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें स्टेशनरी व यूनीफार्म व पाँच हजार बच्चों को उपकरण वितरित किए गए। वर्ष 2005-06 का 16.99 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भारत सरकार के अधीन लंबित है। 1100 विद्यालयों में रैम्प का निर्माण किया जाएगा।

बच्चों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए वर्ष 2006-07 से 9वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन शिक्षा लागू की जा रही है। संस्कृत एवं उर्दू शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश में कुल 548 संस्कृत पाठशालाएं को संस्कृत बोर्ड से संबध्द किया जा चुका है। इनमें 70 शालाएं शासकीय हैं। अभी तक 4000 संस्कृत शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्ष 2005-06 में 4800 संस्कृत शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। संस्कृत भाषा के विकास एवं उन्नयन के लिए प्रदेश में संस्कृत बोर्ड का गठन किया गया है। इसी तरह उर्दू शिक्षा के लिए म.प्र. मदरसा बोर्ड कार्यरत है। प्रदेश में कुल 4472 मदरसे हैं। शैक्षणिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यक क्षेत्र के लिए भारत सरकार की योजना 'क्षेत्र - गहन कार्यक्रम' के अंतर्गत प्रदेश की तीन तहसीलों - कुरवई (विदिशा) बुरहानपुर, हुजूर (भोपाल) के लिए 63.28 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। भारत सरकार द्वारा 15 उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 1.80 लाख रुपये भी प्रदान किए गए हैं। मदरसों में कक्षा एक से आठवीं तक दर्ज दो लाख 40 हजार बच्चों को नि:शुल्क पाठयपुस्तकें उपलब्ध कराई गई है। प्रति मदरसा दो शिक्षकों के मानसे कुल 8034 शिक्षकों को 20 दिवसीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है।

प्रदेश के 260 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक पाठयक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में 375 व्याख्याता कार्यरत हैं। व्यावसायिक शिक्षा पाठयक्रम म.प्र. माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा मान्यता प्राप्त है। वर्ष 2004-05 में 7854 बच्चों का इन पाठयक्रमों में नामांकन किया गया। शिक्षकों और बच्चों को योग प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।

शैक्षणिक गतिविधियों के साथ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शालाओं में खेलकूदों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। शिवपुरी स्थित तात्या टोपे शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण माहविद्यालय में एक वर्षीय डिग्री तथा दो वर्षीय डिप्लोमा पाठयक्रम का संचालन किया जा रहा है। महाविद्यालय में स्वीकृत 130 स्थानों में से 50 प्रतिशत स्थान सेवारत शिक्षकों के लिए आरक्षित है। प्रतिभावान 200 छात्रों के लिए सीहोर में शासकीय आवासीय संस्थान के संचालन के साथ ही कक्षा 9वीं से 12वीं तक के अध्यापन की सुविधा के साथ कबड्डी, बैडमिंटन, बास्केटबाल, वालीबाल, खो-खो एवं एथलेटिक्स की व्यवस्था है। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया द्वारा मान्य विभिन्न 30 खेलों की स्कूल स्तर से राष्ट्रीय तक की प्रतियोंगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का ध्येय मध्यप्रदेश को देश के शीर्ष राज्यों की श्रेणी में अग्रणी बनाना है। इसके लिए शिक्षा महती आवश्यकता है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री नरोत्तम मिश्र, स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री पारस जैन एवं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए उठाए गए कदमों और किए जा रहे प्रयासों से आशा बंधती है कि 'शिक्षित मध्यप्रदेश' विकसित मध्यप्रदेश' के निर्माण में महत्वपूर्ण सोपान सिध्द होगा।

असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योर्तिगमय।
मृत्योर्मा अमृत गमय।

 

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