बैंको से ऋण की मासिक किस्त की गणना
राज्यसभा
NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009
केंद्रीय वित्ता राज्यमंत्री श्री नमो नारायण मीना ने आज राज्यसभा में पूछे गये एक प्रश्न के लिखित उत्तार में बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने ''ऋणदाताओं के लिए उचित व्यवहार संहिता'' पर दिशानिर्देश जारी किये हैं जो बैंकों# वित्ताीय संस्थाओं#गैर-बैंकिंग वित्ताीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा अपने-अपने बोर्डों द्वारा विधिवत अपनाए जाने अपक्षित हैं। ये दिशानिर्देश, जिन्हें आवधिक तौर पर संशोधित किया जाता है, अन्य बातों के साथ-साथ, निर्धारित करते हैं कि ऋणकर्ता द्वारा मांगे गए ऋण की राशि पर ध्यान दिये बिना, ऋणों के सभी वर्गों के संबंध मं ऋण आवेदन प्रपत्र व्यापक होने चाहिए। इनमें, संसाधन के लिए देय शुल्क# प्रभार, यदि कोई हों, आवेदन स्वीकार नहीं किये जाने के मामले में प्रतिदेय ऐसे शुल्क की राशि, पूर्व-भुगतान विकल्प और अन्य कोई मामला जो ऋणकर्ता के हित को प्रभावित करता हो, के बारे में जानकारी होनी चाहिए जिससे अन्य बैंकों के साथ एक अर्थपूर्ण तुलना की जा सके और ऋणकर्ता द्वारा संज्ञानपूर्वक निर्णय लिया जा सके। इसके अलावा, बैंको को परामर्श दिया जाता है कि वे ग्राहक को ''मूल्य में सब कुछ'' के बारे में जानकारी दें जिससे ग्राहक वित्ता के अन्य स्रोतों के साथ, प्रभारित दरों की तुलना कर सके।
'' ऋण और अग्रिम-सांविधिक और अन्य नियंत्रण'' के संबंध में आरबीआई के 01 जुलाई, 2009 को दिशानिर्देशों के अनुसार, ऋणकर्ता को, ऋणकर्ता को, लिखित में और प्राधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत् रूप से प्रमाणित, अन्य बातों के साथ-साथ, निबंधन एवं शर्तें और ऋण सुविधाओं को शासित करने वाली अन्य चेतावनियां बतानी चाहिए। ऋण करार की प्रति और साथ में ऋण करार में उल्लिखित सभी संलग्नकों की एक प्रति, निरपवाद रूप से, ऋणों की संस्वीकृति# संवितरण के समय ऋणकर्ताओं को दी जानी चाहिएं।
इसके अतिरिक्त, बैंक# वित्ताीय संस्थाएं# एनबीएफसी संगत कारकों जैसे कि निधियों की लागत, मार्जिन एवं जोखिम प्रीमियम, आदि को ध्यान में रखते हुए एक ब्याज़ दर मॉडल अपनाती है और ऋणों तथा अग्रिमों के लिए प्रभारित किये जाने वाले ब्याज़ की दर निर्धारित करती हैं।