सूचना प्रौद्यो‡गकी से सम्पन्न होती पंचायतें
Avanish Somkuwanr
सास्कृतिक, धार्मिक और भाषाई बहुलता भारत की पहचान है। शासन-प्रशासन की विधियों में भी भारतीय अवधारणाएं मुखर रही हैं। न्नऋग्वेद Þ और न्नमनु स्मृति Þ में जनतांत्रिक समितियों के स्वरूप का उल्लेख मिलता है जो बाद में पंचायतों के रूप में सामने आया। परम्परा और आधुनिकता के संगम स्थल भारत में अब पंचायतों की लोक हितैषी शक्ति का उपयोग मुखर हो रहा है।
भारत में पंचायत राज व्यवस्था के इतिहास में चार प्रमुख पड़ाव रहे हैं--बलवंत राय मेहता समिति की अनुसंशाएं, 73वां संविधान संशोधन, प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण की अवधारण का विकास और सूचना प्रौद्योगिकी का आगमन। ग्रामीण और शहरी समाज में सामाजिक आर्थिक अधोसंरचना के समरूप विकास के लिए पंचायतों की कार्यप्रणाली को सक्षम और नवाचारी बनाना अनिवार्य है। ब्रिटिश गवर्नर सर चार्ल्स मेटकाफ ने पंचायतों को न्ननन्हे गणतंत्रÞ कहा था। पंचायतों की शक्ति से प्रेरित होकर ही गांधी जी ने ग्राम स्वराज की अवधारणा रखी थी। अंग्रेज नहीं चाहते थे कि भारत के लोगों को पंचायतों की शक्ति का बोध हो। दूसरी ओर सामंती समाज नहीं चाहता था कि निचले स्तर से एक समकक्ष प्रजातांत्रिक नेतृत्व का उदय हो। आज परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। पंचायतों ने आधुनिक प्रौद्योगिकी और परम्परागत विवेक के तालमेल से प्रजातांत्रिक और आधुनिक विकास की कई नवाचारी विधियों का प्रदर्शन सामने रखा है। सूचना प्रौद्योगिकी का रचनात्मक उपयोग विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
आज देश में 23 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतें, छह हजार से ज्यादा मध्यम स्तर और 500 से ज्यादा जिला स्तर की पंचायतें कार्य कर रही हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा पंचायत राज सस्थाएं हैं। स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन, संवर्धन और लोक हित में दोहन, रोजगार मूलक विकास कार्यों की स्वीकृति देने से लेकर केन्द्र और राज्य सरकारों को कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सहयोगी संस्था के रूप में कार्य करने तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पंचायतो पर हैं। विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया और राज्य के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के हस्तांतरण से पंचायतें शक्तिसम्पन्न हो गई हैं।
अब पंचायतों के सामने दो मुख्य चुनौतियां हैं--पहली यह कि प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के उपयोग में पूर्णतः पारदर्शिता और सभी नागरिक आवश्यक सेवाओं का त्वरित प्रदाय बनाये रखना। इन दोनों चुनौतियों से निपटने के लिए पंचायतों ने सूचना प्रौद्योगिकी का लोकोन्मुखी उपयोग करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण साक्षरता में कमी के बावजूद कई राज्यों की पंचायत राज संस्थाओं ने सूचना प्रौद्योगिकी का भरपूर उपयोग करते हुए निचले स्तर पर प्रजातंत्र को मजबूती तो दी हैं साथ ही प्रौद्योगिकी को स्वाभाविक रूप से स्वीकर और अंगीकार करने के लिए ग्रामीण समाज को भी तैयार किया है।
विभिन्न राज्यों की पंचायतों में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग का विश्लेषण यह दर्शाता है कि जहां से प्रजातांत्रिक नेतृत्व का उदय हो रहा है वहां भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति पर भी रोक लगना जरूरी है। सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से एक ओर जहां कार्य प्रणाली में जो पारदर्शिता आ रही है उससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी, वही दूसरी ओर महत्वपूर्ण सूचना बैंक तक लोगों की पहुंच आसान होगी। पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की प्रतिनिधि संस्थाओं के रूप में सुदृढ बनाने के लिए स्वतंत्र पंचायत राज मंत्रालय कार्य कर रहा है, जो पंचायतों को नीतिगत मार्गदर्शन देता है। इसी क्रम में पंचायत राज संस्थाओं द्वारा किये जा रहे जनकल्याण के कार्य और आवश्यक सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी रही हैं। पंचायतों के पास कृषि विस्तार, लघु वनोपज, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, गरीबी उन्मूलन , मत्स्य पालन, शिक्षा, आजीविका निर्माण जैसे 29 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गतिविधियों के संचालन और प्रबंधन के अधिकार हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से पंचायतों का कार्य आसान हो रहा है।
देश की पहली ई-पंचायत आंध्र प्रदेश में स्थापित हुई। हैदराबाद के पास मेडक जिले की रामाचन्द्रपुरम ग्राम पंचायत में पहली बार पंचायत के सभी कार्यों को कम्प्यूटरीकृत किया गया। इससे सेवाओं के प्रदाय और महत्वपूर्ण दस्तावेज के पंजीयन एवं वितरण में समय और धन की बचत हुई है। अन्य जिलों में चरण बध्द रूप से इसका विस्तार हो रहा है।
सामान्यतः एक ग्राम पंचायत में जल प्रदाय, लोक स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, साफ-सफाई, सड़कों का रखरखाव, प्रकाश व्यवस्था, राज्य एवं केन्द्र की योजनाओं का क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं का नियमित आयोजन, जन्म-मृत्यु पंजीयन, स्थानीय करों की वसूली, नागरिक अधोसंरचनाओं का संधारण, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संसाधनों का प्रबंधन और जन जागरण अभियानों का संचालन जैसे कार्य होते हैं। सभी पंचायतें अब इन सब कार्यों को सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से सरल बनाने की पहल कर रही हैं।
गोआ में न्नइन्फो ग्रामÞ का प्रयोग सफल रहा है। असम में दो साल पहले कामरूप और कामरूप मैट्रो में भूमि स्वामियों को भू-अधिकार पत्र इन्टरनेट पर उपलब्ध कराया गया। पिछले वर्ष असम के धुबरी जिले के दो विकास खंडों में शुरू की गई न्नई-सुविधा Þ योजना में पांच प्रकार की नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं--मतदान सूची, निवास प्रमाण पत्र, शासकीय कर्मचारियों और किसानों के लिए आय प्रमाण पत्र।
केरल का न्नरूरल साफ्ट Þ और न्नरूरल बाजारÞ माडल लोगों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिध्द हुए हैं। रूरल बाजार एक ई-शॉप है जिसके माध्यम से ग्रामीण उत्पादों का प्रदर्शन किया जाता है। इस प्रकार ग्रामीण शिल्प की पहुंच बढ ज़ाती है। केरल की ही स्विफ्ट न्नसिंगल विन्डो इंटरफेस फार तालुक Þ योजना ने सभी राज्यों का ध्यान आकृष्ट किया है। इसके माध्यम से नौकरियों, उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश और कानूनी औपचारिकताओं के लिए 25 प्रकार के उपयोगी प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।
हिमाचल प्रदेश के न्नलोकमित्र Þ सूचनालयों और मध्य प्रदेश के न्नज्ञानदूत सूचनालयों Þ में काफी समानताएं हैं। दोनों परियोजनाएं किसानों के लिए उपयोगी हैं। इनसे शिकायत पत्र, लाइसेंस प्रति, राशनकार्ड के लिए आवेदन, मेडिकल फार्म की प्रतियां, मंडियों में कृषि उपज के ताजा भाव की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। न्नलोकमित्र सूचनालयों में तो सामान्य जन अपनी वस्तुओं की बिक्री का विज्ञापन भी दे सकते हैं। इसके अलावा ग्रामीण राजस्थान के लिए न्नजनमित्र Þ योजना में विकास कार्यों की प्रगति भी उपलब्ध है। नागरिक सेवाओं में त्रुटियों की शिकायत की जा सकती है और गुणवत्ता के लिए सुझाव दिए जा सकते हैं। मध्य प्रदेश में जिला पंचायतें अपनी वेब साइट शुरू कर रही हैं। भोपाल, बालाघाट और छिन्दवाड़ा जिलों ने यह पहल की है।
पंचायतें और हिन्दी फॉन्ट
हाल ही में उन्नत अभिकलन विभाग केन्द्र (सी डेक) द्वारा जारी हिन्दी फाँट उत्तर भारतीय राज्यों विशेष रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में पंचायतों के लिए क्रान्तकारी पहल सिध्द हुई है। हिन्दी फॉन्ट के एक समान उपयोग से पारदर्शी प्रशासन के लिए अनुकूल वातावरण बनेगा। और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आयेगा। भारत जैसे बहुभाषी देश में स्थानीय भाषाओं में कम्प्यूटर का उपयोग एक अत्यन्त क्रान्तिकारी पहल है, जिसके परिणाम शीघ्र ही सामने आयेंगे। साधनों और संसाधनों तक आम लोगों की सीधी पहुंच से कई समस्याओं का हल निकलेगा। प्रत्येक पंचायत का किसी न किसी क्षेत्र विशेष में उल्लेखनीय आर्थिक योगदान होता है। हिन्दी फाँट के उपयोग से सूचनाओं के प्रदाय में गति आयेगी और आर्थिक उद्यमिता की संभवनाएं भी बढेंग़ी। सूचना का अधिकार और सूचना प्रौद्योगिकी के विवेकपूर्ण उपयोग से पंचायतें ग्रामीण क्षेत्र का परिदृश्य बदल सकती हैं।