देश में 1019 स्थलों पर जल गुणवत्ता की निगरानी
गंगा एक्शन प्लान के तहत, प्रदूषण नियंत्रण की 639 स्कीमें पूरी
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देश के 26 राज्यों और 6 केन्द्रशासित प्रदेशों में स्थित 1019 स्थलों पर अलग-अलग जल निकायों की जल गुणवत्ता की निगरानी कर रहे हैं। भूतल जल के मामले में यह निगरानी मासिक तथा तिमाही आधार पर की जाती है और भू-जल के संबंध यह निगरानी छमाही आधार पर की जाती है। मौजूदा निगरानी तंत्र में 592 स्थल नदियों पर, 65 स्थल झीलों पर, 321 स्थल कुओं पर और शेष तालाबों, नहरों और जल-निकासी व्यवस्थाओं पर निगरानी स्थल शामिल हैं। पानी की गुणवत्ता की जांच भौतिक-रासायनिक और जैव-वैज्ञानिक विश्लेषणों के आधार पर की जाती है। मूल्यांकन तथा जल-प्रदूषण की रोकथाम के लिए सुधारात्मक उपाय करने के उद्देश्य से नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता के बारे में आंकड़े प्रकाशित किए जाते हैं।
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के तहत भी पानी की गुणवत्ता पर नजर रखी जाती है। इसके लिए जाने-माने शैक्षिक तथा अनुसंधान संस्थानों का सहयोग लिया जाता है ताकि भारतीय नदियों में प्रदूषण के प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सके। इसके अलावा केन्द्रीय जल आयोग, केन्द्र तथा राज्यों के भू-जल बोर्ड, अनुसंधान संस्थान और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों की प्रयोगशालाएं भी अलग-अलग उद्देश्यों से जल की गुणवत्ता पर नजर रखने का कार्य कर रही हैं।
एनआरसीपी 20 राज्यों में 34 नदियों के प्रदूषित किनारों पर मौजूद 160 शहरों में लागू है। 4735.42 करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना में केन्द्र और राज्य सरकारें 70 तथा 30 के अनुपात में लागत वहन करती हैं। एनआरसीपी के तहत अभी तक मंजूर 960 स्कीमों में से 582 स्कीमें पूरी हो चुकी हैं। इन स्कीमों में सीवरेज उपचार संयंत्र स्थापित करना, सीवरेज के पानी को रोककर उसे अन्यत्र प्रवाहित करना, कम लागत पर स्वच्छता, शवदाह गृहों में सुधार, नदियों के दहानों का विकास आदि शामिल है। एनआरसीपी के तहत 18720 लाख लीटर प्रतिदिन की सीवर उपचार क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसके अलावा 8650 लाख लीटर प्रतिदिन की सीवर उपचार क्षमता गंगा एक्शन प्लान के तहत पहले ही स्थापित की जा चुकी है।
गंगा एक्शन प्लान के तहत, प्रदूषण नियंत्रण की 639 स्कीमें पूरी की जा चुकी हैं और इसके फलस्वरूप 16930 लाख लीटर प्रतिदिन की सीवर उपचार की अतिरिक्त क्षमता स्थापित हो चुकी है। सरकार ने नदियों में कचरे की समस्या से निपटने के लिए कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद और वाराणसी शहरों में व्यवहार्यता अध्ययन कराया है। यह अध्ययन भारत सरकार और जापान के इंटरनेशनल कोऑपरेशन बैंक के बीच त्रऽण समझौते के जरिए कराया गया है।