नीरा राडिया का दलाल- वीर,बरखा या कोई और?

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sandeep kumar saini

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May 29, 2010, 3:08:30 AM5/29/10
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Friday, May 7, 2010

नीरा राडिया का दलाल- वीर,बरखा या कोई और?








-आलोक तोमर -
सोचा था कि इतने बड़े देश में बहुत दलाल पड़े है इसीलिए नीरा राडिया ( NIRA RADIA) के बारे में दुबारा नहीं लिखूंगा। मगर सीबीआई के एक दोस्त राडिया की पूरी फाइल थमा गए और जैसा कि मुहावरे में कहते हैं, मेरी नींद हराम हो गई। नीरा राडिया ने चार कंपनियां बनाई हैं और इनमें वैष्णवी कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड सबसे पुरानी है। इसके अलावा रिश्ते बेचने की नोएसिस कंसलटिंग विटकॉम और न्यूकॉम कंसलटिंग भी दलाली का अच्छा खासा कारोबार कर रही है। ये पहली बार पता चला कि पिछले साल 21 अक्टूबर को सीबीआई ने नीरा राडिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उनकी कंपनी नोएसिस पर आपराधिक साजिश रचने का इल्जाम हैं। इस जांच की जानकारी 16 नवंबर 2009 को सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के डीआईजी विनीत अग्रवाल ने आयकर महानिदेशालय में सतर्कता अधिकारी मीराब जैन को भेज दी थी। चार दिन बाद 20 नवंबर को इसका जवाब भी आ गया और चिट्ठी में साफ लिखा है कि नीरा राडिया के टेलीफोन को आयकर विभाग के आदेश पर निगरानी में डाल दिया गया। नीरा राडिया जो चारो कंपनियां चलाती है उन सभी के फोन टेप हुए। पता चला कि अपने कॉरपोरेट ग्राहकों के लिए नीरा राडिया ने संचार मंत्री ए राजा से कह कर कई बड़े और महंगे सौदे अपने ग्राहकों के हक में बदलवाए। सिर्फ चार महीने में हजारों करोड़ के सौदे हो गए। नीरा राडिया ने नए टेलीफोन ऑपरेटरों को सिखाया कि विदेशी निवेश कैसे छिपाया जा सकता है। नीरा राडिया के ए राजा के साथ संदिग्ध होने की हद तक अंतरंग संबंध है। राजा और राडिया सीधे मोबाइल पर प्रेमालाप करते है। सीबीआई के अधिकारियों के अनुसार जब मनमोहन सिंह अपना दूसरा मंत्रिमंडल बना रहे थे तो गुप्तचर रिपोर्ट दी गई थी कि ए राजा के बहुत सारे आर्थिक स्वार्थ हैं इसलिए उन्हें कोई जिम्मेदार विभाग नहीं दिया जाए। मगर राजनैतिक मजबूरियों और नीरा राडिया के ताकतवर कॉरपोरेट ग्राहकों की मदद से आखिरकार राजा संचार मंत्री बन ही गए। सबूत सामने है। कैबिनेट के शपथ ग्रहण से ग्यारह दिन पहले नीरा राडिया के फोन टेप दस्तावेजों के अनुसार कॉरपोरेट लॉबी की पहल पर नीरा राजा को संचार मंत्री बनवाने में लगी हुई थी। कई बड़े पत्रकारों के नाम भी (हिन्दुस्तान टाइम्स के पूर्व सम्पादक वीर संघवी, एनडीटीवी की प्रबंध सम्पादक बरखा दत्त का नाम नीरा राडिया के साथ और उसके लाबिंग में तथाकथित मदद को लेकर चर्चा में है , और भी सुनामधन्य खबरनवीसों के नाम हैं ) इन दस्तावेजों में है। टाटा इंडिकॉम तो चलाता ही है और नई मोबाइल कंपनी एयरसेल में मैक्सिस कम्युनिकेशन और अपोलो के जरिए टाटा ही मालिक है। रतन टाटा वोल्टास के जरिए करुणानिधि के पत्नी के चार्टर्ड अकाउंटेंट के संपर्क में भी थी। एयरटेल के सुनील मित्तल लगातार कोशिश कर रहे थे कि राजा नहीं, दयानिधि मारन दोबारा संचार मंत्री बने। इस काम के लिए भी मित्तल ने राडिया से संपर्क किया। आयकर विभाग के गुप्त दस्तावेज बताते है कि स्वान टेलीकॉम, एयरसेल, यूनीटेक वायरलैस और डाटा कॉम को लाइसेंस और स्पेक्ट्रम के लाभ भी मिले। राडिया ने अपनी सभी कंपनियों में रिटायर्ड अफसरों को रखा हुआ हैं और वे बहुत काम आते है। कहा जाता है कि झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोडा टाटा समूह से एक सौ अस्सी करोड़ रुपए मांग रहे थे मगर राडिया ने राज्यपाल के जरिए मुफ्त में काम करवा दिया। जाहिर है कि यह सेवा निशुल्क नहीं हुई होगी। नीरा राडिया की कंपनिया टाटा के अलावा यूनीटेक, रिलायंस, स्टार समूह जैसे बड़े ब्रांड के लिए जनसंपर्क यानी दलाली कर रही है। इस दलाली में भी खूब खेल हो रहे हैं। स्वान को पंद्रह सौ सैतीस करोड़ रुपए में लाइसेंस मिला और कुछ ही दिन बाद इसका सिर्फ चौवालीस प्रतिशत हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात के ईटीसैलेट को बयालीस सौ करोड़ में बेच दिया। यूनीटेक वायरलैस को स्पेक्ट्र लाइसेंस सोलह सौ इकसठ करोड़ में मिला और उन्होंने नार्वे की टेलनोर को साठ प्रतिशत शेयर इकसठ सौ बीस करोड़ रुपए में बेच दिया। ईमानदारी की कसम खाने वाले टाटा टेली सर्विसेज ने भी सिर्फ छब्बीस फीसदी शेयर जापान के डोकोमो को तेरह हजार दो सौ तीस करोड़ रुपए में बेचे। स्वान कंपनी ने तो और भी कमाल किया। चार महीने पहले चेन्नई की जेनेक्स एग्जिम वेंचर को तीन सौ अस्सी करोड़ रुपए के शेयर एक लाख रुपए में दे दिए। घपला साफ दिख रहा है। लेकिन इस घपले को पकड़ने वाले सीबीआई के मिलाप जैन का तबादला हो चुका है और आयकर विभाग अब कह रहा है कि उसने कभी नीरा राडिया का फोन टेप करने के आदेश दिए ही नहीं थे। नीरा राडिया के ग्र्राहकों में पीसीएस हैं, टाटा स्टील है, टाटा मोटर्स है, टाटा टेली सर्विसेज है, इंडियन होटल्स है, ट्रेंट इंटरनेशनल है, टाइटन है, सन माइक्रो सिस्टम है, आईटीसी है, जीएमआर है, स्टार है, सीमंस है, कोटक महिंद्रा है, चैनल वी है, ईबे है, अरेवा पावर्स है, रेमंड्स है और भारतीय उद्योग महासंघ भी है। आप समझ सकते हैं कि नीरा जी कितनी प्रतिभाशाली है। नीरा की कंपनियों की बोर्ड में मध्य प्रदेश काडर के आईएएस अफसर और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरटी के अध्यक्ष रहे प्रदीप बैजल है, बड़े सचिव पदो पर रहे सीएम वासुदेव हैं जो महाराष्ट्र के मुख्य सचिव थे, एस के नरुल्ला है जिन्हें और बड़ा दलाल माना जाता है और सीईओ के पद पर राजीव मोहन है जो दुर्भाग्य से नीरा वाडिया से पहले जेल जाएंगे।
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