The Only Precious One -- 'Being' -- from Shree MatsyendranAth ji to Guru GorakhnAth ji

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manisha k

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Jan 2, 2015, 10:28:36 AM1/2/15
to manisha k, manisha...@yahoo.co.in





श्री गोरखनाथ जी ने अपने गुरुदेव श्री मत्स्येन्द्र नाथ जी से पूछा:
"स्वामीजी! कोण देखना कोण विचारणा, कोण तत्त ले धरिवा सार। कोण देश मस्तक मुंडाईया, कोण ज्ञान ले उतरवा पार।"


भावार्थ:
गुरुदेव! साधक को क्या देखना, क्या विचार करना, किस तत्त्व में वास करना, किसके लिए सिर मुड़ाना और किस ज्ञान को लेकर पlर उतारना चाहिए ?


श्री मत्स्येन्द्र नाथ जी ने उत्तर दिया :
"अवधू आप देखिबा, अनंत विचारवा, तत्त ले धारीवा सार। गुरु का शब्द ले मस्तक मुंडायबा, ब्रह्म ज्ञान ले उतरिबा पार।"


भावार्थ :

हे शिष्य ! अपने आप को देखना, अनंत अगोचर को विचारना और तत्त्व स्वरुप में वास करना, गुरु-नाम सोऽहं शब्द ले मस्तक मुंडावे तथा ब्रह्मज्ञान को लेकर भवसागर पार उतरना चाहिए।

- गोरखबोध वाणी




_/\_

*AUM SHREE HARI HARA * AUM SHREE SHREE MAA *

_/\_

AUM SHREE NAATHAAYA NAMAh

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Happy Year 2015!

May All be Guided by Divine Light.. 'Ever 

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