
श्री गोरखनाथ जी ने अपने गुरुदेव श्री मत्स्येन्द्र नाथ जी से पूछा:
"स्वामीजी! कोण देखना कोण विचारणा, कोण तत्त ले धरिवा सार। कोण देश मस्तक मुंडाईया, कोण ज्ञान ले उतरवा पार।"
भावार्थ:
गुरुदेव! साधक को क्या देखना, क्या विचार करना, किस तत्त्व में वास करना, किसके लिए सिर मुड़ाना और किस ज्ञान को लेकर पlर उतारना चाहिए ?
श्री मत्स्येन्द्र नाथ जी ने उत्तर दिया :
"अवधू आप देखिबा, अनंत विचारवा, तत्त ले धारीवा सार। गुरु का शब्द ले मस्तक मुंडायबा, ब्रह्म ज्ञान ले उतरिबा पार।"
भावार्थ :
हे शिष्य ! अपने आप को देखना, अनंत अगोचर को विचारना और तत्त्व स्वरुप में वास करना, गुरु-नाम सोऽहं शब्द ले मस्तक मुंडावे तथा ब्रह्मज्ञान को लेकर भवसागर पार उतरना चाहिए।
- गोरखबोध वाणी

_/\_
*AUM SHREE HARI HARA * AUM SHREE SHREE MAA *
_/\_
AUM SHREE NAATHAAYA NAMAh
_/\_
Happy Year 2015!
May All be Guided by Divine Light.. 'Ever 