ए खाक नशीनों उठ बैठो .............
दरबार ए वतन में जब एक दिन सब जाने वाले लायेंगे
कुछ अपनी सजा को पहुचेंगे कुछ अपनी जजा ले जायेंगे
ए खाक नशीनो उठ बैठो वो वक़्त करीब आ पंहुचा है
जब तख़्त गिराए जायेंगे जब ताज उछाले जायेंगे
अब टूट गिरेगी जंजीरे अब जन्दानों की खैर नहीं
जो दरिया झूम के उठे है तिनकों से ना टाले जायेंगे
कटते भी चलो बढ़ते भी चलो बाजु भी बहुत है सर भी बहुत
चलते भी चलो अब डेरे मंजिल पर ही डाले जायेंगे
ए जुल्म के मतों लैब खोलो चुप रहने वालों चुप कब तक
कुछ हर्श तो इनसे उठेगा कुछ दूर तो नाले जायेंगे
कुछ अपनी सजा को पहुचेंगे कुछ अपनी जजा ले जायेंगे
--
अच्छा लगा हो तो आगे फॉरवर्ड कीजिये, और भारतीय भाषाओं में अनुवादित कीजिये, अपने ब्लॉग पर डालिए, मेरा नाम हटाइए, अपना नाम /मोबाईल नंबर डालिए| मुझे कोई आपत्ति नहीं है| मतलब बस इतना है कि ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये|

(स्व. राजीव दिक्षित)
व्यवस्था परिवर्तन
पिछले 64 सालों से हम सरकारे बदल-बदल कर देख चुके है..................... हर समस्या के मूल में मौजूदा त्रुटिपूर्ण संविधान है, जिसके सारे के सारे कानून / धाराएँ अंग्रेजो ने बनाये थे भारत की गुलामी को स्थाई बनाने के लिए ...........इसी त्रुटिपूर्ण संविधान के लचीले कानूनों की आड़ में पिछले 64 सालों से भारत लुट रहा है ............... इस बार सरकार नहीं बदलेगी ...................... अबकी बार व्यवस्था परिवर्तन होगा...................
अधिक जानकारी के लिए रोजाना रात 8 .00 बजे से 9 .00 बजे तक आस्था चेंनल और रात 9 .00 बजे से 10 .00 बजे तक संस्कार चेनल देखिये
Manzoor Khan Pathan
Contact Numbers : 92528-84207
भारत स्वाभिमान से जुड़ने के लिए : http://groups.google.com/group/bharatswabhimantrust/subscribe