आज की मेरी कविता
पुण्य कर्म
जात-पात न पूछिए बात का
क्या असर पडा है जमाने पर।
एक कदम नहीं बढता आगे
इसका असर तो है सयाने पर॥
ब्रम्ह से क्या है ब्राम्हण यारों
फिर हरि से क्या है हरिजन।
जात-पात की गरम तवे पर
फिर त्रस्त हैं सब जन-जन॥
नाटक कहिए या आडम्बर
धर्म के नाम पर न कुछ कम।
पहुँचे हुए के खिलवाड है सब
दिन-ब-दिन फोडते कुछ बम॥
अन्न जल थल पवन समान
क्या है इनमे कोई जात धर्म।
क्यों घोलते हैं इनमे जहर
क्यों करते हैं ऐसा पाप कर्म॥
बंद मुठ्टी खोल दी जायेगी
न कुछ लाया न ले जायेगा।
न हाथ में कुछ न साथ में
पुण्य कर्म पीछे रह जायेगा॥
डॉ. सुनील कुमार परीट, बेलगांव, कर्नाटक 08867417505