Poem APNE SAPNE

11 views
Skip to first unread message

SUNIL PARIT

unread,
Apr 30, 2016, 12:45:24 AM4/30/16
to hind...@googlegroups.com

आज की मेरी कविता

अपने सपने

जो चाहा वह नहीं मिला
पर अनचाहा वही मिला।
सच पराये तो पास आये
पर अपने दूर चले गये॥

तन्हाई में तडपता रहा
दिल की आह सुना नहीं।
खामोशी जिन्दगी में छायी
ये सपने चूर हो गये कहीं॥

भरी दुनिया में अकेला
आसपास था भरा मेला।
धडकने थम सी गयी
आत्मा भटकती ही रहीं॥

अपने सपने छोड दिये
रुह को मुक्ति दिलाना है।
अब भरोसा सिर्फ उसपे
दिल से हरिनाम जपना है॥

डॉ. सुनील कुमार परीट, बेलगांव, कर्नाटक 08867417505

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages