इसी संदर्भ में यह आलेख भी पठनीय है:
पूरे देश का गीत
कभी-कभी एक अकेला गीत ही सिर्फ साढ़े सात मिनिट में पूरे देश को अपने आगोश में समेट लेता है. 15 अगस्त, 1988 की सुबह भारत के टीवी दर्शकों ने देखा एक केशरिया सूरज, समुद्र और उसकी उत्ताल तरंगों की छवियों में से उभरते अधमुंदी आंखों वाले भीमसेन जोशी को, जो अधमुंदी आंखों के साथ गा रहे थे, मिले...सुर मेरा तुम्हारा. राग थी शाही भैरवी – बहुतों को इस राग का नाम ज्ञात नहीं था लेकिन जैसे-जैसे पंडित जी की आवाज़ टीवी सेट्स से बाहर निकल रही थी -और करीब एक मिनिट तक वे एक अकेले तबले की ताल के साथ गा रहे थे- इसकी जादुई स्वर लहरी लोगों को मंत्र मुग्ध करती जा रही थी. धीरे-धीरे संगीत ने गति पकड़ी और दृश्य डल झील में तब्दील हुआ, और फिर पंजाब के खेतों में चलता हुआ ट्रैक्टर, आकाश से ली हुई ताजमहल की एक छवि, उसके पार्श्व में बहती हुई यमुना की जलधारा... यह था देशभक्ति के मुलायम रंगों में रंगा हुआ भारत. और कई अनेक लोगों के साथ-साथ हेमा मालिनी और एक अनाम महावत, अमिताभ बच्चन और एम बाला मुरली कृष्णन, शर्मिला टैगोर और तमस की पूरी कास्ट, जिन्होंने पंजाबी और उड़िया में, कन्नड़ और मराठी में, तमिळ और मलयालम में, असमी और तेलुगु में गाया. बहुत जल्दी ही कश्मीरी लोगों ने तमिळ पंक्ति एंते स्वरवुम निंगलुडे स्वरवुम को गुनगुनाना सीख लिया और मराठी बोलने वालों ने बांगला पंक्ति तोमार शोनार मोदेर शुर गाना सीख लिया. और मिले सुर बहुत ही उम्दा तरह से गाया जा सकने वाला टी वी गान बन गया और बन गया राष्ट्रीयता की एक झांकी.
उस स्वाधीनता दिवस पर बहुत घबराया हुआ एक आदमी -विज्ञापन पुरुष सुरेश मलिक- अपने चौकोर बीपीएल टी वी के सामने इंतज़ार कर रहा था कि कब प्रधान मंत्री राजीव गांधी का भाषण खत्म हो और कब मिले सुर मेरा का पहला प्रसारण शुरू हो. “यह वीडियो उन्हीं के दिमाग की उपज था.” कैलाश सुरेंद्रनाथ, जो उस कार्यक्रम के सहायक निदेशक थे, याद करते हैं. “हमने सोचा भी नहीं था कि यह एक कल्ट एंथम बन जायेगा.”
स्वर्गीय मलिक (मार्च, 2003 में उनका निधन हो गया था) ओगिल्वी एण्ड मेथर के नेशनल डाइरेक्टर थे. इससे पहले, 1988 में उन्होंने ही आज़ादी की मशाल वीडियो की भी परिकल्पना की थी जिसमें खेल की दुनिया के सितारों को लिया गया था. “राजीव जी, जिन्होंने यह आज़ादी की मशाल वीडियो देखा था, ने ही हमें मिले सुर वीडियो का विचार दिया था”, सुरेंद्रनाथ बताते हैं. उनका विचार यह था कि एक ही अंश में हिंदुस्तानी, कर्नाटक, पॉप्युलर, लोक और कंटेमपररी संगीत लीजिये, देश के कई प्रदेशों को लीजिए और उसे चाक्षुष और सांगीतिक दृष्टि से आकर्षक बना दीजिए.
सुरेंद्रनाथ बताते हैं, “हमने कलाकारों को लिखा कि वे इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें और वे तुरंत तैयार हो गए.” मलिक साहब ने जैज़ संगीतकार लुइ बैंक्स, कम्पोज़र पी. वैद्यनाथन और सिनेमेटोग्राफर आर के राव को शामिल कर लिया. अब समस्या थी गीत के बोलों की. मलिक साहब को मंजे हुए गीतकारों, और यहां तक कि उनकी कंपनी के वरिष्ठ कॉपी राइटर्स का कोई भी गीत पसंद नहीं आया. इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के एक युवा सदस्य को कोशिश कर देखने को कहा. और उसकी कोशिश कामयाब रही - अठारहवें प्रयास में. यह सदस्य था पीयूष पांडे. “मलिक साहब मेरे बॉस थे और उन्होंने मुझे कहा था कि मैं झण्डा, देश जैसे अगणित बार प्रयुक्त कर लिए गए शब्द इस्तेमाल न करूं. वे चाहते थे कि मैं लोगों को जोड़ने के लिए सरल शब्दों का इस्तेमाल करूं,” पाण्डे बताते हैं जो अब ओगिल्वी एण्ड मेथर के सी ई ओ हैं.
मलिक साहब के इस देशभक्ति पूर्ण प्रोजेक्ट का दूसरा ज़रूरी तत्व था राग भैरवी. यह एक संपूर्ण राग है जिसमें 12 स्वर (आधारभूत सात स्वरों में से कुछ के तीव्र और मध्यम स्वरूपों सहित) होते हैं, और जो हिंदुस्तानी और कर्नाटक दोनों शैलियों में प्रयुक्त होता है. लेकिन, पूरे देश को सम्मोहित कर लेने वाले इस गीत की धुन के कम्पोज़र के बारे में बहुत कम जानकारी है. “अधिकांश लोग इस गीत की धुन का श्रेय बैंक्स और वैद्यनाथन को देते हैं, लेकिन उनका काम तो काफी बाद में शुरू हुआ,” पांडे बताते हैं. इसके कम्पोज़र थे पण्डित भीमसेन जोशी. “हमने उन्हें इस गीत की शुरुआती छह पंक्तियां दीं और कहा कि हमारी इच्छा है कि यह राग भैरवी में हो. एक दिन पंडितजी स्टूडियो में आए और उन्होंने आधे घण्टे तक इस गीत को गाया. हमें तुरंत वह पसंद आ गया”, सुरेंद्रनाथ बताते हैं. वैद्यनाथन और बैंक्स ने विभिन्न भाषाओं के लिए संगीत अरेंज किया, अलग-अलग राज्यों के संगीतकारों की मदद से एक से दूसरी भाषा में अंतरण की व्यवस्था की और राष्ट्र गान को समाहित करते हुए इसके अंतिम उत्कर्ष का सृजन किया.
“हमारा राष्ट्रगान के अंतिम अंश को समाहित करना दूरदर्शन को पसंद नहीं आया. उन्हें लगा कि अपूर्ण राष्ट्रगान को प्रयुक्त करना उपयुक्त नहीं होगा. लेकिन राजीव जी ने इसे देखा और बेहद पसंद किया. उन्हें इसमें किसी भी बदलाव की ज़रूरत महसूस नहीं हुई,” बैंक्स कहते हैं.
सिनेमेटोग्राफर राव ने इस फिल्म को शूट करने के लिए पूरे देश की यात्रा की. “वीडियो की सादगी, सामान्य लोगों की मौज़ूदगी और ज़बान पर चढ़ जाने वाली धुन ने हमारे लिए जादू का काम किया,” वे कहते हैं. “इसमें कोई ज़ोरदार कैमरा मूमेंट्स नहीं थे. ज़्यादातर तो एक बार में ही ले लिए गए शॉट्स थे और उन सभी को मैंने ही लिया था. इससे फिल्म में एकरूपता बनी रह सकी.” कुल 20 लोकेशनों पर इसे महज़ 31 दिनों में शूट कर लिया गया था.”
ऐसा नहीं है कि शूटिंग में कोई दिक्कतें नहीं आईं. लता मंगेशकर उन दिनों रूस में एक कंसर्ट कर रही थीं अत: अंतिम अंश कविता कृष्णमूर्ति ने गाया. कृष्णमूर्ति को सुनते हुए लता जी को उस हिस्से को डब करना था लेकिन उन्हें यह बात पसंद नहीं आई.” वे खुश तो नहीं थीं, लेकिन अंतत: उन्होंने यह भी किया,” हंसते हुए राव बताते हैं.
जनवरी 2010 में इसी टीम ने, अलबता इस बार मलिक और वैद्यनाथन इसमें नहीं थे, फिर मिले सुर की रचना की. लेकिन यह पुनर्सृजन दुखद था. फिर मिले सुर पर बॉलीवुड और उसके नखरे हावी थे. यह मूल की मासूमियत समाहित कर पाने में नाकामयाब था,” राव कहते हैं.
वैसे उस मासूमियत का ताल्लुक 1988 से भी था, जब रंगीन दूरदर्शन महज़ छह बरस पुराना था और अपने रंगों से हमें सम्मोहित करने की काबिलियत रखता था. तब कमल हासन और कलकत्ता मेट्रो शायद पहली बार एक साथ हमारे टेलीविज़न सेट्स पर आए थे, और यह वह वक़्त था जब राष्ट्रवाद को कुल जमा इतने नखरे की ज़रूरत थी कि एक अदद लता मंगेशकर गाना गाए और उनके दांये कंधे पर केसरिया, श्वेत और हरा वस्त्र हो!
◙◙◙
15 अगस्त 2010 के इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित सुआंशु खुराना के लेख द वन ट्यून का डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल द्वारा मुक्त अनुवाद.
९ फरवरी २०११ ६:३४ पूर्वाह्न को, Vijay K. Malhotra <malho...@gmail.com> ने लिखा:न केवल इस गीत के बोल, सुर और प्रस्तुति विविधता में एकता का संदेश देती है,बल्कि सभी भारतीय भाषाओं मेंइसके लिप्यंतरण से यह भावना और भी प्रबल हुई है.इसके श्रव्य-दृश्यात्मक चित्रण में जहाँ एक ओर देश-भर के सभी भाषाओं के प्रमुख गायकों और वादकों ने इसे सुर और संगीत दिया है,वहीं बॉलीवुड के अभिनेताओं और खेलकूद की प्रतिभाओं ने इसमें शिरकत करके इसे सच्चे अर्थों में भारतीय एकता का उद्बोधन गीत बना दिया है.इसी भावना के मद्देनज़र .युवा भारती संस्थान ने इसे अपना उद्बोधन गीत बना लिया है और ६ फ़रवरी,२०११ को खालसा कॉलेज,दिल्ली में आयोजित संस्थान के पहले कार्यक्रम की शुरूआत भी इसीसे की गई.ऑन लाइन हिंदी शिक्षण की वेबसाइट हिंदी शिक्षक बंधु की निदेशक प्रो. वशिनी शर्मा और तकनीकी सहायक श्री सुधीर कुमार को इसे खोज कर लाने के लिए एक बार फिर बधाई !!!विजय
2011/2/8 Vijay K. Malhotra <malho...@gmail.com>
हिंदी शिक्षक बंधुओ !हमने इस गीत को 6 फरवरी 2011 के कार्यक्रम में उद्बोधन गीत का सम्मान दिया जो अपनी अनूठी प्रस्तुति मेंभारतीय एकता और सांस्कृतिक विविधता का अनुपम उदाहरण है ।
हम सब इस सुमधुर गीत को लगातार सुनते रहे पर इसका इतिहास भी जानिए विकीपीडिया के माध्यम से-http://en.wikipedia.org/wiki/Mile_Sur_Mera_Tumhara#Lyrical_format
Mile Sur Mera Tumhara
From Wikipedia, the free encyclopedia
"Ek Sur, or Mile Sur Mera Tumhara"
Single by Various
Released
15 August 1988
Recorded
Piyush Pandey
Aarti Gupta & Kailash Surendranath with Lok Seva Sanchar Parishad, India
"Ek sur" (One Tune) (languages of India), or "Mile Sur Mera Tumhara" as it is better known, is an Indian song and accompanying video promoting national integration and unity in diversity.
The concept for Mile Sur was developed in 1988 by Lok Seva Sanchar Parishad, and promoted by Doordarshan (then India's sole TV broadcaster) and India's Ministry of Information. The song was composed by Ashok Patki, co-composed & arranged by Louis Banks, written by Piyush Pandey (then an Account Manager and presently the Executive Chairman and Creative Head of Ogilvy and Mather, India). The project was conceived and directed by Suresh Mullick (then all India Creative Director, Ogilvy & Mather) and recorded by a group of people from all walks of life, including a supergroup of popular Indians - musicians, sports persons, movie stars, etc.
The national integration video was intended to instill a sense of pride and promote unity amongst Indians, highlighting the different linguistic communities and societies that live in India - India's unity in diversity, so to speak.
Mile Sur was telecast for the first time on Independence Day 1988, after the telecast of the Prime Minister’s speech from the ramparts of theRed Fort.[1]
It quickly captivated India, gaining and maintaining near-anthem status ever since.
Contents
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· 3 People featured (partial list, not in order of appearance)[2]
[edit]Lyrical format
The song's lyrics are unique; One phrase, repeated in fourteen Indian languages: "Milē sur mērā tumhārā, tō sur banē hamārā", meaning "When my musical note and your musical note merge, it becomes our musical note". The lyrics in different languages is given below:
“
[hi] मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
सुर की नदियाँ हर दिशा से, बहते सागर में मिलें
बादलों का रूप लेकर, बरसे हलके हलके
मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
मिले सुर मेरा तुम्हारा
[ks-dev] चॉन्य् तरज़ तय म्यॉन्य् तरज़, इक॒वट॒ बनि यि सॉन्य् तरज़
[ks-nast]چأنِۂ ترز تَے میأنِۂ ترز، اِکوَٹہٕ بَنِہ یِہ سأنِۂ ترز
[pa] ਤੇਰਾ ਸੁਰ ਮਿਲੇ ਮੇਰੇ ਸੁਰ ਦੇ ਨਾਲ, ਮਿਲਕੇ ਬਣੇ ਇੱਕ ਨਵਾਂ ਸੁਰ ਤਾਲ
[hi] मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
[sd-dev] मुंहिंजो सुर तुहिंजे सां पियारा मिले जड॒हिं, गीत असांजो मधुर तरानो बणे तड॒हिं
[sd-nast] مُنهِنجو سُر تُنهِنجي سان پِيارا مِلي جَڏَهِن، گِيت اَسانجو مَڍُر تَرانوبَڻي تَڏَهِن
[ur] سر کی دریا بہتے ساگر میں ملے
[pa] ਬਾਦਲਾਂ ਦਾ ਰੂਪ ਲੈਕੇ, ਬਰਸਨ ਹੌਲੇ ਹੌਲੇ
[ta] இசைந்தால் நம் இருவரின் ஸ்வரமும் நமதாகும்
திசை வேறானாலும் ஆழி சேர் ஆறுகள் முகிலாய்
மழையாய் பொழிவது போல் இசை
நம் இசை
[kn] ನನ್ನ ಧ್ವನಿಗೆ ನಿನ್ನ ಧ್ವನಿಯ, ಸೇರಿದಂತೆ ನಮ್ಮ ಧ್ವನಿಯ
[te] నా స్వరము నీ స్వరము సంగమమై, మన స్వరంగా అవతరించే
[ml] എന്റെ സ്വരവും നിങ്ങളുടെ സ്വരവും, ഒന്നുചേര്ന്നു നമ്മുടെ സ്വരമായ്
[bn] তোমার সুর মোদের সুর, সৃষ্টি করুক ঐক্যসুর
[as] সৃষ্টি হউক ঐক্যতান
[or] ତୁମ ଆମର ସ୍ବରର ମିଳନ, ସୃଷ୍ଟି କରି ଚାଲୁ ଏକ ତାନ
[gu] મળે સૂર જો તારો મારો, બને આપણો સૂર નિરાળો
[mr] माझ्या तुमच्या जुळता तारा, मधुर सुरांच्या बरसती धारा
[hi] सुर की नदियाँ हर दिशा से, बहते सागर में मिलें
बादलों का रूप लेके, बरसे हलके हलके
मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
मिले सुर मेरा तुम्हारा
”
“
Transcription
[hi] milē sur merā tumhārā, tō sur banē hamārā
sur kī nadiyān̐ har diśā sē, bahte sāgar men̐ milē
bādalōn̐ kā rūp lēkar, barse halkē halkē
milē sur merā tumhārā, tō sur banē hamārā
milē sur merā tumhārā
[ks] Chaain taraz tai myain taraz, ik watt baniye saayen taraz
[pa] tērā sur milē mērē sur dē nāl, milkē baṇē ikk navān̐ sur tāl
[hi] milē sur merā tumhārā, tō sur banē hamārā
[sn] mun̐hin̐jō sur tun̐hin̐jē sān̐ piyārā milē jad̤ahin̐, gīt asān̐jō madhur tarānō baṇē tad̤ahin̐
[ur] sur ka darya bahte sagar men mile
[pa] bādalān̐ dā rūp laikē, barsan haulē haulē
[ta] Isaindhal namm iruvarin suramum namadhakum
Dhisai veru aanalum aazi ser aarugal Mugilai
mazaiyai pozivadu pol isai
Nam isai
[kn] nanna dhvanige ninna dhvaniya, sēridante namma dhvaniya
[te] nā svaramu nī svaramu sangamamayi, mana svaranḡa avatarincē
[ml] eṉṯe svaravum niṅṅkaḷoṭe svaravum, ottucērnnu namoṭe svaramāy
[bn] tōmār śūr mōdēr śūr, sriṣṭi kōruk ōikōśūr
[as] sriṣṭi hauk aikyatān
[or] tuma āmara svarara miḷana, sriṣṭi kari chālu ekā tāna
[gu] maḷē sur jō tārō mārō, banē āpṇō sur nirāḷō
[mr] mājhyā tumchyā juḷtā tārā, madhur surānchyā barastī dhārā
[hi] sur kī nadiyān̐ har diśā sē, bahte sāgar men̐ milē
bādalōn̐ kā rūp lēkar, barse halkē halkē
milē sur merā tumhārā, tō sur banē hamārā
”
The song itself ends by fading into the final notes of the Indian National Anthem.
[edit]Languages used
Hindi, Kashmiri, Urdu, Punjabi, Sindhi, Tamil, Kannada, Telugu, Malayalam, Bangla, Assamese, Oriya, Gujarati <span st
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विजय कुमार मल्होत्रा
पूर्व निदेशक (राजभाषा),
रेल मंत्रालय,भारत सरकार
Vijay K Malhotra
Former Director (Hindi),
Ministry of Railways,
Govt. of India
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Vijay K Malhotra
WW/67/SF,
MALIBU TOWNE,
SOHNA ROAD,
GURGAON- 122018
Mobile:91-9910029919
91-9311170555
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URL<www.vijaykmalhotra.mywebdunia.com>
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