तीन मुक्तक होली पर .... डा. उदय मणि

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डा. उदय ’ मणि’ कौशिक

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Mar 12, 2009, 2:56:15 AM3/12/09
to हिन्दी-कविता

हिन्दी - कविता के सभी साथियों , मित्रों , अग्रजों को
रंगो के इस त्यौहार पर सह्रिदय
असीम शुभकामनाएं ...

एक मुक्तक परिचय का ..

हमारी कोशिशें हैं इस , अन्धेरे को मिटाने की
हमारी कोशिशें हैं इस , धरा को जगमगाने की
हमारी आंख ने काफ़ी बडा सा ख्वाब देखा है
हमारी कोशिशें हैं इक , नया सूरज उगाने की

और

तीन मुक्तक होली पर

लगें छलकने इतनी खुशियां , बरसें सबकी झोली मे
बीते वक्त सभी का जमकर , हंसने और ठिठोली मे
लगा रहे जो इस होली से , आने वाली होली तक
ऐसा कोई रंग लगाया , जाये अबके होली मे

नजरें उठाओ अपनी सब आस पास यारों
इस बार रह न जाये कोई उदास यारों
सच मायने मे होली ,तब जा के हो सकेगी
जब एक सा दिखेगा , हर आम-खास यारों

और

मौज मस्ती , ढेर सा हुडदंग होना चाहिये
नाच गाना , ढोल ताशे , चंग होन चाहिये
कोई ऊंचा ,कोई नीचा , और छोटा कुछ नही
हर किसी का एक जैसा रंग होना चाहिये


शुभकामनाओ सहित
डा. उदय मणि
http://mainsamayhun.blogspot.com

Chintan Maheta

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Mar 12, 2009, 6:12:26 AM3/12/09
to hindi...@googlegroups.com
Yeh rachanaye moti jaisi chamakdar aur sathosath tejdar bhi hai...
thanks...
aapka KAVYARAJ
09978763674

 

Uday Mani Kaushik

unread,
Mar 12, 2009, 9:25:04 AM3/12/09
to hindi...@googlegroups.com
बहुत बहुत धन्यवाद चेतन जी ,
स्नेह बनाये रखियेगा

2009/3/12 Chintan Maheta <kavyaraj....@gmail.com>

Yogendra Mani

unread,
Mar 13, 2009, 3:48:09 AM3/13/09
to hindi...@googlegroups.com
अच्छे मुक्तक हैं

2009/3/12 डा. उदय ’ मणि’ कौशिक <umka...@gmail.com>



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DR.Yogendra mani kaushik
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