एक मुक्तक परिचय का ..
हमारी कोशिशें हैं इस , अन्धेरे को मिटाने की
हमारी कोशिशें हैं इस , धरा को जगमगाने की
हमारी आंख ने काफ़ी बडा सा ख्वाब देखा है
हमारी कोशिशें हैं इक , नया सूरज उगाने की
और
तीन मुक्तक होली पर
लगें छलकने इतनी खुशियां , बरसें सबकी झोली मे
बीते वक्त सभी का जमकर , हंसने और ठिठोली मे
लगा रहे जो इस होली से , आने वाली होली तक
ऐसा कोई रंग लगाया , जाये अबके होली मे
नजरें उठाओ अपनी सब आस पास यारों
इस बार रह न जाये कोई उदास यारों
सच मायने मे होली ,तब जा के हो सकेगी
जब एक सा दिखेगा , हर आम-खास यारों
और
मौज मस्ती , ढेर सा हुडदंग होना चाहिये
नाच गाना , ढोल ताशे , चंग होन चाहिये
कोई ऊंचा ,कोई नीचा , और छोटा कुछ नही
हर किसी का एक जैसा रंग होना चाहिये
शुभकामनाओ सहित
डा. उदय मणि
http://mainsamayhun.blogspot.com