jahaa.N huu.N mai.n - जहाँ हूँ मैं वहीं उसका ठिकाना है

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Rahul Upadhyaya

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Nov 6, 2009, 3:31:54 AM11/6/09
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(online link: http://tinyurl.com/rahulpoems)
जहाँ हूँ मैं वहीं उसका ठिकाना है
राहुल उपाध्याय
 
जहाँ से हम आए हैं
वहीं हमें जाना हैं
ज़मीं से आए हैं
ज़मी में समाना है
 
रंगीं हो पत्ते
या काले हो बादल
अंत तो सभी का
वही पुराना है
 
बड़े से आसमां में
मैं ढूंढता था जिसको
टेका जो माथा तो
उसे यहीं पे जाना है
 
अब गली-गली हाथ फैलाए
मैं भीख मांगूँगा नहीं
क्योंकि कदमों तले मेरे
गड़ा खजाना है
 
'गर होता वो उपर
तो सोचो आस्ट्रेलिया का क्या होता?
जहाँ हूँ मैं
वहीं उसका ठिकाना है
 
सिएटल | 425-898-9325
6 नवम्बर 2009
A picture may be worth a thousand words. But mere words can inspire millions


anita

unread,
Nov 16, 2009, 2:32:57 AM11/16/09
to हिन्दी-कविता
yes u r right!
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