एक गीत :सजीली साँझ का मौसम.....

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anand pathak

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Nov 15, 2009, 8:42:01 AM11/15/09
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एक गीत :सजीली साँझ का मौसम.....

सजीली साँझ का मौसम ,रंगीली रात का मौसम

उनीदी अधखुली पलकें
कपोलों पर झुकीं अलकें
पुरानी याद का मौसम, अधूरी बात का मौसम
सजीली साँझ का मौसम......
नयन में खिल रहे काजल
लहरता सुरमुई आँचल
तुम्हारे साथ का मौसम ,नई सौगात का मौसम
सजीली साँझ का मौसम.....
कोई मासूम बन बैठा
कोई यूँ ही गया लूटा
दिले बर्बाद का मौसम, खुले ज़ज़्बात का मौसम
सजीली साँझ का मौसम....
दबा कर होंठ के कोने
लगा दिल को मिरे छूने
बहकते राह का मौसम ,अजब हालात का मौसम
सजीली साँझ का मौसम.....

आनन्द पाठक ,जयपुर

Bhoopendra singh

unread,
Nov 18, 2009, 1:40:49 AM11/18/09
to hindi...@googlegroups.com
सुंदर रचना ,बधाई आनंद जी ,मेरी शुभ कामनाएं 
Dr.bhoopendra
Rewa M.P


१५ नवम्बर २००९ ५:४२ AM को, anand pathak <akpath...@gmail.com> ने लिखा:
एक  गीत :सजीली साँझ का मौसम.....

सजीली साँझ का मौसम ,रंगीली रात का मौसम

          उनीदी  अधखुली पलकें
          कपोलों पर झुकीं अलकें
पुरानी याद का मौसम,  अधूरी  बात का मौसम
सजीली साँझ का मौसम......
                   नयन में खिल रहे काजल
          लहरता  सुरमुई  आँचल
तुम्हारे साथ का मौसम ,नई सौगात  का मौसम
सजीली साँझ का मौसम.....
                  कोई मासूम बन बैठा
          कोई यूँ ही गया लूटा
दिले बर्बाद का मौसम, खुले ज़ज़्बात  का मौसम

चण्डीदत्त शुक्ल-chandidutt shukla

unread,
Nov 18, 2009, 4:54:21 AM11/18/09
to hindi...@googlegroups.com
भाई आनंद
बहुत सुंदर गीत
गुलाबी संवेदनाएं
आपके शहर की तरह ही...

बधाई

चण्डीदत्त शुक्ल
दिल्ली


2009/11/18 Bhoopendra singh <bks...@gmail.com>

DEEPAK KUMAR

unread,
Nov 18, 2009, 5:22:23 AM11/18/09
to hindi...@googlegroups.com
very  good art anand ji.. 

anand pathak

unread,
Nov 18, 2009, 5:57:19 AM11/18/09
to Hindi Language Forum - Hindi Bhasha
आ० शुक्ल जी
एक अकिंचन भावना की सराहना के लिए
आप का धन्यवाद
साभार व सादर
--आनन्द.पाठक


On 18 नव, 14:54, चण्डीदत्त शुक्ल-chandidutt shukla


<chandiduttshu...@gmail.com> wrote:
> भाई आनंद
> बहुत सुंदर गीत
> गुलाबी संवेदनाएं
> आपके शहर की तरह ही...
>
> बधाई
>
> चण्डीदत्त शुक्ल
> दिल्लीwww.chauraha1.blogspot.com
>

> 2009/11/18 Bhoopendra singh <bksr...@gmail.com>


>
>
>
> > सुंदर रचना ,बधाई आनंद जी ,मेरी शुभ कामनाएं
> > Dr.bhoopendra
> > Rewa M.P
>

> > १५ नवम्बर २००९ ५:४२ AM को, anand pathak <akpathak3...@gmail.com> ने लिखा:


>
> >> एक  गीत :सजीली साँझ का मौसम.....
>
> >> सजीली साँझ का मौसम ,रंगीली रात का मौसम
>
> >>           उनीदी  अधखुली पलकें
> >>           कपोलों पर झुकीं अलकें
> >> पुरानी याद का मौसम,  अधूरी  बात का मौसम
> >> सजीली साँझ का मौसम......
> >>                    नयन में खिल रहे काजल
> >>           लहरता  सुरमुई  आँचल
> >> तुम्हारे साथ का मौसम ,नई सौगात  का मौसम
> >> सजीली साँझ का मौसम.....
> >>                   कोई मासूम बन बैठा
> >>           कोई यूँ ही गया लूटा
> >> दिले बर्बाद का मौसम, खुले ज़ज़्बात  का मौसम
>
> >> सजीली साँझ का मौसम....
> >>                   दबा कर होंठ के कोने
> >>           लगा दिल को मिरे छूने
> >> बहकते राह का मौसम ,अजब हालात का मौसम
> >> सजीली साँझ का मौसम.....
>

> >> आनन्द पाठक ,जयपुर- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
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anand pathak

unread,
Nov 18, 2009, 5:57:52 AM11/18/09
to Hindi Language Forum - Hindi Bhasha
आ० दीपक जी

एक अकिंचन भावना की सराहना के लिए
आप का धन्यवाद
साभार व सादर
--आनन्द.पाठक


On 18 नव, 15:22, DEEPAK KUMAR <deepak22041...@gmail.com> wrote:
> very  good art anand ji..
>

> On 2009-11-18, Bhoopendra singh <bksr...@gmail.com> wrote:
>
>
>
>
>
>
>
> > सुंदर रचना ,बधाई आनंद जी ,मेरी शुभ कामनाएं
> > Dr.bhoopendra
> > Rewa M.P
>

> > १५ नवम्बर २००९ ५:४२ AM को, anand pathak <akpathak3...@gmail.com> ने लिखा:


>
> >> एक  गीत :सजीली साँझ का मौसम.....
>
> >> सजीली साँझ का मौसम ,रंगीली रात का मौसम
>
> >>           उनीदी  अधखुली पलकें
> >>           कपोलों पर झुकीं अलकें
> >> पुरानी याद का मौसम,  अधूरी  बात का मौसम
> >> सजीली साँझ का मौसम......
> >>                    नयन में खिल रहे काजल
> >>           लहरता  सुरमुई  आँचल
> >> तुम्हारे साथ का मौसम ,नई सौगात  का मौसम
> >> सजीली साँझ का मौसम.....
> >>                   कोई मासूम बन बैठा
> >>           कोई यूँ ही गया लूटा
> >> दिले बर्बाद का मौसम, खुले ज़ज़्बात  का मौसम
> >> सजीली साँझ का मौसम....
> >>                   दबा कर होंठ के कोने
> >>           लगा दिल को मिरे छूने
> >> बहकते राह का मौसम ,अजब हालात का मौसम
> >> सजीली साँझ का मौसम.....
>
> >> आनन्द पाठक ,जयपुर
>

> --
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Rector Kathuria

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Nov 19, 2009, 4:17:05 AM11/19/09
to hindi...@googlegroups.com
सजीली साँझ का मौसम और रंगीली रात का मौसम साथ हो तो फिर दिल के लुटने का
गम होता ही कहाँ है......लगता है आप मुग़ले-आज़म का गीत संगीत भूल गए
शायद... "इस रंग में कोई जी ले अगर मरने का उसे गम क्या होगा....जब रात
है ऐसी मतवाली फिर सुबह का आलम क्या होगा...!!!!!!

आपका अपना ही,

रेक्टर कथूरिया (rectork...@gmail.com)


१७-११-०९ को, Bhoopendra singh <bks...@gmail.com> ने लिखा:


--
Rector Kathuria

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