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anwar suhail

unread,
Nov 18, 2009, 9:23:03 AM11/18/09
to eka...@yahoogroups.com, a, hindi...@googlegroups.com
चावल का दाना
anwar suhail
पहले मैं भी
तुम्हारी तरह नहीं जानता था
बनता है कैसे चावल का एक दाना
मैं किसी करोडपति का बेटा नहीं
मैं महानगरों में पला-बढा नहीं
लेकिन मध्यमवर्गीय परिवार में 
जन्म लेने के कारण
हाथ पहुंच सुविधाओं के बीच
नहा नहीं पाया किसी नदी में 
आउटडोर संडास में लोटा लेकर गया नहीं
ढिबरी की रोशनी में पढा नहीं कभी
बारिश में चूते छानी के नीचे रहा नहीं कभी 
शायद इसीलिए 
जाना नहीं कभी किसान के दुख-दर्द

मैंने तो यही जाना था 
कि हर महीने की पहली तारीख को 
पिता होते उदार
क्योंकि घर में आती थी पगार
और फ़िर भर जाते घर के तमाम 
डब्बे-कनस्तर, राशन-पानी से
स्कूल फ़ीस का समय से होता भुगतान
और हमें क्या चाहिए...
कि सफ़र के दौरान 
ट्रेन या बस की खिडकी से दीखते खेत 
या सिनेमा में नज़र आते खेत खलिहान
यही तो था खेतों से परिचय हमारा

यह एक कठिन प्रक्रिया है दोस्त
बडी लम्बी साधना 

इसे मैंने जाना
खदान जाने के दौरान
खेतों के बीच से गुज़रते हुए
लगभग पांच माह की 
इबादत का फ़ल है चावल का एक दाना

किसानों की उम्मीदों के धूप-छांव का
किसानों के पसीने के छिडकाव का
मेहनतकश के गीतों की आरती का
होता है प्रतिफल चावल का एक दाना

जेठ माह के बाद 
कितनी शिद्दत से देखता किसान 
आग उगलता सूना आसमान
खोजता बादलों के निशान
निहारता खेत की मिट्टी
जो उसकी एडियों की तरह
दीखती कटी-फटी...

जब आप देखते ख्वाब 
रियल-स्टेट में इन्वेस्टमेंट का
किसान देखता स्वप्न 
पानी से भरे झूमते बादलों का
जब आप को होती चिन्ता 
सेंसेक्स में गिरावट की
किसान खेत जुताई के लिए रहता परेशान
उसे होती चिन्ता
बीज और खाद का कैसे होगा जुगाड
बरसे नहीं भगवान तो फिर
बिटिया के गौने का कैसे होगा इंतेज़ाम
कैसे पटेगा साहूकार का कर्ज़ श्रीमान
 
भारत किसानों का देश है
अच्छा है कि आप रहते हो इंडिया में
जहां चंद लोगों को 
एकदम नहीं होती जानकारी
कि बनता नहीं चावल का दाना किसी कारखाने में
कि कैसे धान की बालियों में आता है दूध 
कैसे पकती हैं धान की बालियां
कैसे लीप-पोत कर किया जाता तैयार खलिहान
कैसे धान हो किसान के मेहमान

तुम्हें भी मालूम होना चाहिए दोस्त
कि चावल के एक दाना
बनता कितनी मुश्किलों से है





anwarsuhail


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Bhoopendra singh

unread,
Nov 18, 2009, 10:34:12 AM11/18/09
to hindi...@googlegroups.com
सुहैल जी ,
बहुत सुंदर कविता लिखी आपने ,आनंद आगया ,इतनी वास्तविक भावभूमि पर बहुत दिनों बाद कोई रचना पढ़ी /
हार्दिक साधुवाद ,
सादर 
Dr.bhoopendra
Rewa M.P


१८ नवम्बर २००९ ६:२३ AM को, anwar suhail <anwarsu...@yahoo.co.in> ने लिखा:
चावल का दाना
anwar suhail
पहले मैं भी
तुम्हारी तरह नहीं जानता था
बनता है कैसे चावल का एक दाना
मैं किसी करोडपति का बेटा नहीं
मैं महानगरों में पला-बढा नहीं
लेकिन मध्यमवर्गीय परिवार में 
जन्म लेने के कारण
हाथ पहुंच सुविधाओं के बीच
नहा नहीं पाया किसी नदी में 
आउटडोर संडास में लोटा लेकर गया नहीं
ढिबरी की रोशनी में पढा नहीं कभी
बारिश में चूते छानी के नीचे रहा नहीं कभी 
शायद इसीलिए 
जाना नहीं कभी किसान के दुख-दर्द

मैंने तो यही जाना था 
कि हर महीने की पहली तारीख को 
पिता होते उदार
क्योंकि घर में आती थी पगार
और फ़िर भर जाते घर के तमाम 
डब्बे-कनस्तर, राशन-पानी से
स्कूल फ़ीस का समय से होता भुगतान
और हमें क्या चाहिए...
कि सफ़र के दौरान 
ट्रेन या बस की खिडकी से दीखते खेत 
या सिनेमा में नज़र आते खेत खलिहान
यही तो था खेतों से परिचय हमारा

यह एक कठिन प्रक्रिया है दोस्त
बडी लम्बी साधना 

इसे मैंने जाना
खदान जाने के दौरान
खेतों के बीच से गुज़रते हुए
लगभग पांच माह की 
इबादत का फ़ल है चावल का एक दाना

किसानों की उम्मीदों के धूप-छांव का
किसानों के पसीने के छिडकाव का
मेहनतकश के गीतों की आरती का
होता है प्रतिफल चावल का एक दाना

जेठ माह के बाद 
कितनी शिद्दत से देखता किसान 
आग उगलता सूना आसमान
खोजता बादलों के निशान
निहारता खेत की मिट्टी
जो उसकी एडियों की तरह
दीखती कटी-फटी...

जब आप देखते ख्वाब 
रियल-स्टेट में इन्वेस्टमेंट का
किसान देखता स्वप्न 
पानी से भरे झूमते बादलों का
जब आप को होती चिन्ता 
सेंसेक्स में गिरावट की
किसान खेत जुताई के लिए रहता परेशान
उसे होती चिन्ता
बीज और खाद का कैसे होगा जुगाड
बरसे नहीं भगवान तो फिर
बिटिया के गौने का कैसे होगा इंतेज़ाम
कैसे पटेगा साहूकार का कर्ज़ श्रीमान
 
भारत किसानों का देश है
अच्छा है कि आप रहते हो इंडिया में
जहां चंद लोगों को 
एकदम नहीं होती जानकारी
कि बनता नहीं चावल का दाना किसी कारखाने में
कि कैसे धान की बालियों में आता है दूध 
कैसे पकती हैं धान की बालियां
कैसे लीप-पोत कर किया जाता तैयार खलिहान
कैसे धान हो किसान के मेहमान

तुम्हें भी मालूम होना चाहिए दोस्त
कि चावल के एक दाना
बनता कितनी मुश्किलों से है





anwarsuhail

Anita Kumar

unread,
Nov 18, 2009, 12:14:17 PM11/18/09
to hindi...@googlegroups.com
बहुत खूब

अनीता

2009/11/18 anwar suhail <anwarsu...@yahoo.co.in>



--
http://anitakumar-kutchhumkahein.blogspot.com/

suresh kumar

unread,
Nov 19, 2009, 12:23:08 AM11/19/09
to hindi...@googlegroups.com
anwar,
Is Kavita sey mai gad gad ho gaya.

best wishes,

suresh
chennai,India

2009/11/18 Anita Kumar <anita...@gmail.com>

Madhu Tripathi

unread,
Nov 20, 2009, 10:49:44 AM11/20/09
to hindi...@googlegroups.com
आपकी कविता मन को छू लेने वली कविता है. सच ही कहाँ आपने कि लोग क्या जाने किसनो का दुख-दर्द .

2009/11/18 anwar suhail <anwarsu...@yahoo.co.in>

Mridula Pradhan

unread,
Feb 3, 2010, 9:23:09 AM2/3/10
to hindi...@googlegroups.com
bahut hi achchi kavita hai ,chawal ka dana,man khush ho gaya .

2009/11/18 anwar suhail <anwarsu...@yahoo.co.in>
चावल का दाना
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[New] http://www.IPLkhabar.com - हिन्‍दी में आईपीएल क्रिकेट
Read http://www.HindiBlogs.com - हिन्दी चिट्ठों की जीवन धारा

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ummedsingh baid

unread,
Feb 4, 2010, 9:27:28 AM2/4/10
to hindi...@googlegroups.com
और इससे भी ज्यादा कीमती है
वह मिट्टी का कण
जिसे ठोकरों में उङाते
आप श्रीमान.
पैदा नहीं कर सकता विज्ञान
अपनी सारी ऊर्जा लगाकर जिसे
उसे आप सीमेंट में बदल कर
फ़िर उसी मिट्टी पर पोत देते हैं
कि वह कभी भी
बारिस की बूंदों से मिलकर
ना महक सके सौंधी-सौंधी.
या फ़िर ईंट बना देते हैं
लोहे के कारखाने में दबा देते हैं
जो सब मिलकर
मिट्टी के दुश्मनों के लिये
लोहे-सीमेंट के जंगल तैयार करते हैं....
और बाँध भी तो....
जो मिट्टी-पानी के प्रेम का दुश्मन बन
गाद बना देता है
वरदान को अभिशाप बना देता है...
आप नहीं जानते
कि वही मिट्टी
चावल  के पैदा होनेमें
सहयोगी बन्ती है....
और आपका यह सुन्दर शरीर भी
एक दिन उसी में मिल जाता है....
जानते हैं ?
कितनी कीमती है यह मिट्टी????
 
 
 
आपकी कविता बेहद अच्छी लगी... बधाई!... साधक sahiasha.wordpress.com

 

परमजीत सिहँ बाली

unread,
Feb 5, 2010, 1:37:18 AM2/5/10
to hindi...@googlegroups.com
बहुत बढिया रचना है।धन्यवाद।

४ फरवरी २०१० ६:२७ AM को, ummedsingh baid <umme...@gmail.com> ने लिखा:

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--
मित्रवर,
आप से निवेदन है कि  इस रचना को
समय निकाल कर अगर पढ़ पाए तो कृपा होगी

जरुर पढें <a href="http://paramjitbali-ps2b.blogspot.com">दिशाएं</a>  पर क्लिक करें ।

परमजीत बाली










ABHISHEK NARAYAN VERMA

unread,
Feb 5, 2010, 2:09:39 AM2/5/10
to hindi...@googlegroups.com
सुहैल जी इतनी बेहतरीन कविता का उत्पादन करने के लिए धन्यवाद्.उम्मीद है आगे भी ऐसी उत्कृष्ट रचनायें हमें मिलेंगी.

अभिषेक नारायण वर्मा
इलेक्ट्रो स्टील , बोकारो

2010/2/5 परमजीत सिहँ बाली <paramj...@gmail.com>
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