[दिल की आवाज़] छोड़ दूंगा सारी दुनियाँ मैं तुम्हारे लिए

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Popular India

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Nov 14, 2008, 11:27:37 AM11/14/08
to hindi...@googlegroups.com
छोड़ दूंगा सारी दुनियाँ मैं तुम्हारे लिए
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दुनियाँ वाले मुझे तुमसे अब नहीं है कुछ कहना। 
मुझे यहाँ रहने का अब नहीं है कोई बहाना॥
क्या फायदा हुआ तुझे मुझको यूँ ही तड़पा कर।
क्या फायदा हुआ तुझे मुझको यूँ ही रुला कर॥
क्या फायदा हुआ तुझे मुझसे मेरा अधिकार छिनकर।
क्या फायदा हुआ तुझे मेरे जीने का आधार छिनकर॥
यदि मैं कुछ नहीं कर सकता उसके लिए।
तो मैं जिऊँगा फिर किसके लिए॥
जीने का अंतिम आधार था वह मेरे लिए।
मौत से बचने का एक ही सहारा था वह मेरे लिए॥
आया था मैं मौत के बहुत ही करीब से।
जीने की आशा थी अब सिर्फ उसी से॥
जीने के लिए मुझे उसके लिए कुछ करना जरुरी था।
उसके लिए मुझे जीना भी बहुत जरुरी था॥
उसके लिए मेरा सपना रह जाएगा अधुरा।
उस सपना को फिर कौन करेगा पूरा॥
एक सिर्फ वही बचा था मेरे लिए।
उसे छिनकर कुछ नहीं छोड़ा तुम मेरे लिए॥
अब मुझे कुछ नहीं कहना है तुमसे।
चलाओ दुनियाँ को तुम अपनी मन से॥
नहीं कुछ रहा यहाँ अब मेरे लिए।
नहीं रहा मैं यहाँ अब किसी के लिए॥
छोड़ दूंगा सारी दुनियाँ मैं तुम्हारे लिए।
छोड़ दूंगा सारी दुनियाँ मैं तुम्हारे लिए॥
 
 


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Posted By Popular India to दिल की आवाज़ on 11/14/2008 09:57:00 PM

Bihar Bhakti

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Nov 14, 2008, 11:28:48 AM11/14/08
to hindi...@googlegroups.com
Sundar Kavita
Sanjiv Jha
+91 9430906022  for  
Bihar  Bhakti Aandolan.
V   I   S   I   T
http://www.biharbhakti.com
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2008/11/14 Popular India <vermam...@gmail.com>

chandrabha...@gmail.com

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Nov 15, 2008, 3:44:36 AM11/15/08
to Hindi Language Forum - Hindi Bhasha
Bandhu jeevan men vijay ki kamnayen khojiye
Haar men bhi jeet ki sambhavanayen khojiye
Waqt jo beeta use mudhakar abhi kya dekhana
kal karen nirmadh yug ka ve shilayen khojiye
Kaun aayega kiran bankar tumhari rah men
Khud bano deepak swayam ke khud dishayen khojiye
chandrabha...@gmail.com

sudhakar mishra

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Nov 15, 2008, 4:09:31 AM11/15/08
to hindi...@googlegroups.com
priya, bah-bah aap  ki rachana bhi khub rahi, bahut aanand aa gaya aap ki rachana mai dhanyadad ji,

sudhakarmishra


--- On Sat, 15/11/08, chandrabha...@gmail.com <chandrabha...@gmail.com> wrote:


Add more friends to your messenger and enjoy! Invite them now.

MAHESH KUMAR VERMA

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Nov 15, 2008, 10:03:36 AM11/15/08
to hindi...@googlegroups.com, sudhaka...@yahoo.co.in

Vijay Kumar Sappatti

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Nov 17, 2008, 2:33:13 AM11/17/08
to hindi...@googlegroups.com

परायों के घर

कल रात दिल के दरवाजे पर दस्तक हुई;
ज़िन्दगी की आंखो से देखा तो,
तुम थी,


मुझसे मेरी नज्में मांग रही थी,
उन नज्मों को, जिन्हें संभाल रखा था,
मैंने तुम्हारे लिए,


एक उम्र भर के लिए ...
आज कही खो गई थी,
वक्त के धूल भरे रास्तों में ......
शायद उन्ही रास्तों में ..

जिन पर चल कर तुम यहाँ आई हो....


क्या किसी ने तुम्हे बताया नहीं कि,
परायों के घर भीगी आंखों से नहीं जाते.....


विजय कुमार
M : 09849746500
E : vksap...@rediffmail.com
B : www.poemsofvijay.blogspot.com

 

Ummed Baid

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Nov 18, 2008, 6:00:50 AM11/18/08
to hindi...@googlegroups.com
khoj meM hee main lagaa hoon bandhu!....ummed

uday kant dixit

unread,
Nov 18, 2008, 8:34:40 AM11/18/08
to hindi...@googlegroups.com
मेरे देश का युवा
मेरे देश का युवा शंकर !
सनातन धर्म की ,
पुनर्स्थापना के लिए ,
दिग्विजय करता है ।
विभिन्न पंथ ,विभिन्न मतों में ,
समन्वय स्थापित कर ,
राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोता है ।
युवा संन्यासी विवेकानंद !
अपनी माटी का धर्म ,इसकी संस्कृति की ,
महानता का उदघोष ,
सुदूर पश्चिम में करता है ।
सिध्दार्थ !
दृढ और कठिन साधना से ,
सम्बोधि प्राप्त कर ,
बुध्द बनता है ।
आजाद ,भगत सिंह ,सुभाष जैसा युवा ,
अपनी भारत माता के लिए
अपने प्राण न्यौछावर करता है ।
युवा शक्ति !
तुम्हारी वीर गाथा से ,हमारा ,
ह्रदय श्रध्दा से भरता है ।
मेरे देश का युवा ,
दृढ ,शक्तिशाली ,मेधावान है ,
उसके ज्ञान ,कौशल का डंका ,
देश विदेश में ,
पिट रहा है ।
देखो !देश की कीर्ति का ,
ध्वज कैसा फहर रहा है ।
मत करो ,उस भोले मन को ,
दिग्भ्रमित ,
उसकी शक्ति ,उसके अदम्य साहस को ,
कुत्सित राजनीति में मत घसीटो ।
हिंसा ,घृणा ,आतंक की लाठी ,
उसको माध्यम बना ,
मत पीतो।
उसकी ऊर्जा ,उसकी सृजनशीलता ,
का मजाक मत उडाओ ।
बहुत हो चुका अब तक ,
अब तो हरकतों से बाज आओ ।
उड़ने दो उसे स्वतंत्र ,
अपने कल्पना लोक में ,
कुछ नया रचेगा ।
कुछ नया सृजन करेगा ।
अपनी उमंग में ,
संसार को देगा नया कुछ ।
फ़िर जन्मने दो ,
गांधी ,सुभाष को ,
इस धरा पर ,
मानवता का संदेश ,
फ़िर उदघोषित होगा ।
भ्रमित युवा का
मोह भंग होगा ।
राष्ट्र का नव निर्माण ,
उसका अगला कदम होगा ।
जिसमें आम जन ,
शांत ,खुशहाल ,सम्रध्द होगा .
Posted by BHAV SARITA at 5:11 AM 0 comments

harshanvardhan tiwary

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Nov 18, 2008, 11:23:46 PM11/18/08
to hindi...@googlegroups.com

very ood to inspire youtgh of bharatvarsha
prof tiwary



--- On Tue, 18/11/08, uday kant dixit <uday.k...@gmail.com> wrote:

sahil saxena

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Nov 21, 2008, 12:20:38 AM11/21/08
to hindi...@googlegroups.com
kabhi unse mulakaat hue he nahi..
shyad kabhi unse baat hue he nahi..
shyad ab wo muje bhool gaye hain..
ya
shayaad
me badal gaya hun

rakesh kumar

unread,
Nov 21, 2008, 9:19:19 AM11/21/08
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Ummed Baid

unread,
Nov 21, 2008, 1:03:01 PM11/21/08
to hindi...@googlegroups.com
प्रेम अछूता भाव है, शब्द में कैसे आय.
कविता पढी है आपकी, मगर समझ ना आय.

rakesh kumar

unread,
Nov 22, 2008, 11:53:56 AM11/22/08
to hindi...@googlegroups.com
we do not want the poems any more!
please stop!

Ummed Baid

unread,
Nov 22, 2008, 12:43:39 PM11/22/08
to hindi...@googlegroups.com
रोक सकें तो रोक लें, यह कविता की धार.
आपको नफ़रत है मगर, हमे आपसे प्यार.
हमे आपसे प्यार, अमिट विश्वास ह्रादय मे.
बदलेगा मौसम, जागेगा प्यार ह्रदय मे.
कह साधक कवि, चाहे आप भी कोशिश करलें
नही रुकेगी कविता, रोक सके तो रोक लें.

On 11/22/08, rakesh kumar <bitaj...@googlemail.com> wrote:
> *we do not want the poems any more!*
> *please stop!*

sahil saxena

unread,
Nov 23, 2008, 12:10:14 AM11/23/08
to hindi...@googlegroups.com
kabhi din kabhi raat
kyun byan nahi kar pate apne jazbaat
maalom hain dono sath nahi
par itna bhi viswassh hai ki wo sath hain

Farooqui

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Nov 23, 2008, 1:21:44 AM11/23/08
to Hindi Language Forum - Hindi Bhasha

On 14 नव, 21:27, Popular India <vermamahe...@gmail.com> wrote:

> छोड़ दूंगा सारी दुनियाँ मैं तुम्हारे लिए
> ***************************************
>

ek suman ki chah main bolo bhala kyon ,
ek poori watika wiraan kar doon , KRISHNA ADHAR MISHR

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