अनुस्वार की जगह पंचमाक्षर?

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पीयूष ओझा

unread,
Aug 24, 2014, 5:42:32 PM8/24/14
to hindian...@googlegroups.com

मित्रो,


किसी संयुक्त व्यंजन में जहाँ क- से प-वर्ग के प्रथम चार वर्णों के पहले उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण हो वहाँ पाँचवें वर्ण की जगह अनुस्वार लिखा जा सकता है। क्या इसका विपरीत नियम भी सही है, अर्थात् जहाँ क- से प-वर्ग के प्रथम चार वर्णों से पहले अनुस्वार हो, क्या वहाँ अनुस्वार की जगह पाँचवें वर्ण से बना संयुक्त व्यंजन हमेशा लिखा जा सकता है?


(इस प्रश्न का उत्तर देते समय कृपया केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा किए गए मानकीकरण पर ध्यान न दें।)


क्या निम्न तालिका के शब्दों की दूसर वर्तनी सही है? यदि नहीं, तो किन शब्दों की वर्तनी ग़लत है?


सादर


पीयूष ओझा


कलंक  --  कलङ्क

शंका   --  शङ्का

डंका   --  डङ्का

गंगा   --  गङ्गा

कंकाल  --  कङ्काल

संगत  --   सङ्गत

संघर्ष  --   सङ्घर्ष

झंझा   --  झञ्झा

वांछित  --   वाञ्छित

पंछी   --   पञ्छी

पंजाब   --  पञ्जाब

टिंडा   --   टिण्डा

पंडा   --  पण्डा

गुंडा  --   गुण्डा

ग्रंथ   --   ग्रन्थ

पंथी  --   पन्थी

तंतु   --   तन्तु

गेंद   --   गेन्द

रौंद   --  रौन्द

कंपन  --  कम्पन

चंपा   --  चम्पा

गुंफित   --  गुम्फित

संबल   --  सम्बल

गंभीर   --  गम्भीर


Yogendra Joshi

unread,
Aug 24, 2014, 9:57:30 PM8/24/14
to hindian...@googlegroups.com
मेरी जानकारी यह है: संस्कृत भाषा के नियमों के अनुसार शब्दों में संयुक्ताक्षर के रूप में जहां पांचवां वर्ण प्रथम चार के पूर्व हो उसे अनुस्वार से नहीं बदला जा सकता है। अर्थात् गङ्गा को गंगा नहीं लिखा जा सकता। अनुस्वार केवल पांच वर्गों के बाहर के अन्य वर्णों (यथा य, ... श, ...) के पूर्व प्रयोग में लिया जाता है, जैसे संवाद, संशय। संस्कृत साहित्य में मैने इसका उल्लंघन देखा है। हिंदी में सुविधा एवं एकरूपता के लिए शायद अनुस्वार का प्रयोग किया गया हो।

ध्यान दें कि यह नियम पदों के बीच संधि पर लागू नहीं होगा, जैसे अह्म् गच्छामि सन्धि पर अहं गच्छामि होता है और उसे कई स्थलों पर (पुरातन साहित्य में विशेषतः) अहंगच्छामि भी लिखा पाया जा सकता है इसे संस्कृत में अहङ्गच्छामि लिखना अशुद्ध होगा। जहां संस्कृत में अनुस्वार ही प्रयुक्त हुआ हो वहां पचम वर्ण का प्रयोग उचित नहीं होगा यह मेरा मत है।


25 अगस्त 2014 को 3:12 am को, पीयूष ओझा <piyus...@gmail.com> ने लिखा:
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Hariraam

unread,
Aug 25, 2014, 1:29:53 AM8/25/14
to hindian...@googlegroups.com
मुझे केवल
 
रौंद = रौन्द
 
सही नहीं लगा, क्योंकि रौँद, रौँदना आदि में अनुस्वार नहीं बल्कि चन्द्रबिन्दू का प्रयोग होना चाहिेए।

 
हरिराम
प्रगत भारत <http://hariraama.blogspot.com>


2014-08-25 3:12 GMT+05:30 पीयूष ओझा <piyus...@gmail.com>:

मित्रो,


किसी संयुक्त व्यंजन में जहाँ क- से प-वर्ग के प्रथम चार वर्णों के पहले उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण हो वहाँ पाँचवें वर्ण की जगह अनुस्वार लिखा जा सकता है। क्या इसका विपरीत नियम भी सही है, अर्थात् जहाँ क- से प-वर्ग के प्रथम चार वर्णों से पहले अनुस्वार हो, क्या वहाँ अनुस्वार की जगह पाँचवें वर्ण से बना संयुक्त व्यंजन हमेशा लिखा जा सकता है?


(इस प्रश्न का उत्तर देते समय कृपया केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा किए गए मानकीकरण पर ध्यान न दें।)


क्या निम्न तालिका के शब्दों की दूसर वर्तनी सही है? यदि नहीं, तो किन शब्दों की वर्तनी ग़लत है?


सादर


पीयूष ओझा


....

....

रौंद   --  रौन्द

...




Anil Janvijay

unread,
Aug 25, 2014, 5:19:15 AM8/25/14
to hindian...@googlegroups.com
पीयूष जी,
आपके द्वारा लिखे गए सभी शब्द ठीक हैं।
सादर
अनिल


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पीयूष ओझा

unread,
Aug 26, 2014, 6:32:57 PM8/26/14
to hindian...@googlegroups.com

योगेन्द्र जी – संस्कृत वर्तनी पर आपकी ज्ञानवर्धक टिप्पणी और उदाहरण के लिए बहुत धन्यवाद।


हरिराम जी – जहाँ तक मुझे याद है मैंने 'रौंदना' में हमेशा अनुस्वार ही देखा है, चन्द्रबिन्दु नहीं। इसकी पुष्टि के लिए शब्दकोश टटोले तो पाया कि आर एस मैक्ग्रेगर की ऑक्सफ़ोर्ड हिन्दी-इंग्लिश डिक्शनरी, फ़ादर कामिल बुल्के के अँगरेज़ी - हिन्दी कोश और डॉ हरदेव बाहरी के अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्दकोश में अनुस्वार का प्रयोग किया गया है ( अंग्रेज़ी-हिन्दी कोशों में trample के अर्थ में) किन्तु हिन्दी शब्द सागर के डिजिटल संस्करण में कहीं अनुस्वार है और कहीं चन्द्रबिन्दु (http://dsalsrv02.uchicago.edu/cgi-bin/philologic/contextualize.pl?p.15.dasahindi.858363)। मुझे लगता है कि शब्द सागर के डिजिटलीकरण में कई त्रुटियाँ हुई हैं। (ऊपर दिए गए पृष्ठ पर रौंदना के अर्थ, पैरों से कुचलना, में पैरों की जगह पौरों लिखा गया है। शब्द सागर के आठवें भाग की कागज़ी प्रति मेरे पास नहीं है इसलिए नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित संस्करण नहीं देख सका। डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इण्डिया से डाउनलोड की गई प्रति में यह पृष्ठ नदारद है।


(मैं हिन्दी लिखने के लिए जिस सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करता हूँ उसमें अनुस्वार और चन्द्रबिन्दु लिखते समय बहुत ध्यान रखना पड़ता है। इस सन्देश में भी कई जगह बटन दबाने की ग़लती से अनुस्वार की जगह चन्द्रबिन्दु आ गया था जिसका ध्यान से पढ़कर संशोधन करना पड़ा, फिर भी सम्भव है कहीं ग़लती रह गई हो।)


डिजिटल शब्द सागर से उत्पन्न भ्रम के बावजूद मेरा निष्कर्ष है कि रौंदना में अनुस्वार सही है और चन्द्रबिन्दु सम्भवत: ग़लत।


अनिल जी – दूसरे कॉलम में दी गई वर्तनी की पुष्टि के लिए धन्यवाद।


पिछले साल रात को सोते वक़्त मैं कई बार रेडियो रूस की हिन्दी सेवा का रिकॉर्ड किया हुआ प्रसारण इण्टरनेट रेडियो सेट पर सुना करता था, जिसमें आपको कई बार सुना। लगभग एक साल पहले यह फ़ीड मेरे रेडियो सेट से गायब हो गई। अब दुबारा ढूँढूँगा और मिली तो सिलसिला दुबारा शुरू करूँगा। वैसे तो रेडियो रूस का प्रसारण कम्प्यूटर पर सुना जा सकता है पर इण्टरनेट रेडियो पर सुनना मेरे लिए सुविधाजनक है।

Vinod Sharma

unread,
Aug 26, 2014, 11:46:59 PM8/26/14
to hindian...@googlegroups.com
पीयूषजी से पूर्णतः सहमत।


C.M. Rawal

unread,
Aug 27, 2014, 12:12:22 AM8/27/14
to ha
ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी द्वारा प्रकाशित बृहत् हिन्दी कोश में भी रौँद, रौँदन, रौँदना और रौँदी शब्दों में चन्द्रबिन्दु का ही प्रयोग किया गया है।

- चन्द्र मोहन रावल


2014-08-27 4:02 GMT+05:30 पीयूष ओझा <piyus...@gmail.com>:
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C.M. Rawal

M.A. (Hindi),  B.A. (Com.), Prabhakar (Hons. in Hindi),

Certificate Course in Translation, C.A.I.I.B.

(Ex. Asstt. General Manager (Hindi), Reserve Bank of India )

Vice President, Indian Translators Association

I-58, Sector 41, NOIDA - 201303 (U.P.)  INDIA

Phone: +91 120 4357111

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