> सामान्य यूज़र की भाषा में मेरा जवाब यह था (यहां संदर्भ के लिए पोस्ट किया गया है)-
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> आपकी उलझन मैं समझता हूं। किंतु 'विजया' लिखने के लिए bfp/e कुंजियां दबाने के पीछे तर्क यह है-
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> जिस कुंजी को आप B के रूप में identify कर रहे हैं वह सिर्फ एक कुंजी है जो विद्युतीय संकेत पैदा करती है, कोई अक्षर पैदा नहीं करती। हम इसे इस रूप में जानते हैं तो इसलिए कि उस पर B छपा हुआ है और दबाने से अंग्रेजी का B अक्षर टाइप होता है। लेकिन कंप्यूटर की नज़र में तो वह बस एक बटन मात्र है। इसे किसी एक अक्षर या किसी एक भाषा के साथ जोड़कर मत देखिए। जब हम अंग्रेजी में काम करते हैं तो पूर्व निर्धारित निर्देशों के आधार पर कंप्यूटर समझ जाता है कि आप अंग्रेजी का B अक्षर लिखना चाहते हैं। वह एक खास विद्युतीय संकेत का interpretation B अक्षर के रूप में कर रहा है। सवाल सिर्फ इंटरप्रिटेशन का है।
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> जब आप हिंदी में काम करते हैं (इनस्क्रिप्ट इसका स्वाभाविक तरीका है) तब पुनः पूर्व निर्धारित निर्देशों के आधार पर कंप्यूटर जानता है कि उसे इस बार दूसरी भाषा के नियमों का पालन करते हुए भिन्न तरीके से यह इंटरप्रिटेशन करना है। अब B दबाने पर वह 'व' टाइप करता है। दोनों ही स्थितियों में उसे सिर्फ विद्युतीय संकेत मिले थे। उसने भाषायी इंटरप्रिटेशन तालिका से संदर्भ लेते हुए उन्हें संबंधित भाषाओं के अक्षरों में बदल दिया। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।
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> एक और उदाहरण देखिए। ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम भी आते हैं जिनके जरिए कीबोर्ड का प्रयोग संगीत के लिए किया जा सकता है। जब आप A कुंजी दबाते हैं तो 'सा' और S दबाने पर 'रे' निकलता है। आप पूछेंगे कि ऐसा क्यों होना चाहिए A दबाने पर तो सिर्फ A टाइप होना चाहिए, 'सा' का उच्चारण कैसे हो रहा है। असल में यहां भी कहानी वही interpretation की है। यानी कंप्यूटर को नहीं पता कि आप उससे क्या करवा रहे हैं, वह तो सिर्फ विद्युतीय संकेतों को सॉफ्टवेयर के निर्देशानुसार शब्दों या ध्वनि में बदल रहा है।
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> कहने का अर्थ यह है कि जिस कुंजी पर B लिखा है, वह B अक्षर के लिए आरक्षित नहीं है। अलग-अलग भाषा में वह अलग-अलग अक्षर टाइप करने के काम आएगी। हर भाषा का अपना चार्ट होता है जो अंग्रेजी से पूरी तरह स्वतंत्र होता है। वैसे ही, जैसे हिंदी वर्णमाला का अंग्रेजी वर्णमाला से कोई संबंध नहीं है। हिंदी वर्णमाला हिंदी भाषा के अधिक अनुकूल है। कोई यह नहीं कह सकता कि इसमें पहला अक्षर क क्यों है, अ क्यों नहीं। दोनों का स्वतंत्र अस्तित्व है, स्वतंत्र नियम हैं। हिंदी अगर भाषा के रूप में अंग्रेजी से स्वतंत्र रहकर चल सकती है तो कंप्यूटर पर ऐसा क्यों संभव नहीं हो? इनस्क्रिप्ट के तहत हर कुंजी को अलग-अलग अक्षर दिए गए हैं जो अंग्रेजी के अक्षरों से सामन्जस्य नहीं रखते। रखें भी क्यों? हिंदी उपयोक्ता की जरूरतें, काम करने के तरीके, परिपाटियां आदि अलग हैं। उसका कीबोर्ड उसकी अपनी जरूरत के हिसाब से डिजाइन किया जाना जरूरी था, और वही हुआ। इसमें सारी मात्राएं बाईं तरफ रखी गई हैं। एक तो उनकी जरूरत कम पड़ती है इसलिए और दूसरे, साथ-साथ रहने के कारण याद रखने में आसानी होती है।
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> इसी तरह, अधिक काम आने वाले अक्षर उन कुंजियों पर रखे गए हैं जो जिन्हें दबाने में हमें ज्यादा आसानी होती है। आधे अक्षरों को बनाने के लिए हलंत का वैज्ञानिक प्रयोग हुआ है जिसने हिंदी की कंप्यूटरीय वर्णमाला में अलग से आधे अक्षर रखने की जरूरत ही खत्म कर दी। कोई भी पूर्ण अक्षर दबाएं और हलंत टाइप करें तो वह स्वतः आधा अक्षर बनाता है। आप इतने सारे आधे अक्षरों की कुंजियां याद करने से बच गए। फिर अल्पप्राण और महाप्राण अक्षर एक ही कुंजी पर रखे गए हैं और Shift कुंजी का प्रयोग उन्हें अलग करता है। सिर्फ अल्पप्राण का चार्ट याद कर लें तो पूरी वर्णमाला की कुंजियां याद हो जाएंगी। मात्राओं के चिह्न और अक्षर एक ही कुंजी पर रहते हैं- जैसे इ और ि दोनों एक ही कुंजी पर हैं, सिर्फ शिफ्ट की दबाने से दोनों अलग-अलग identify होते हैं। लीजिए आपको पूरी मात्राएं भी याद नहीं करनी पड़ीं, सिर्फ आधी से काम चल गया। अक्षर याद करना काफी है क्योंकि मात्रा भी तो उसी कुंजी पर मौजूद है। ऐसी और भी बहुत सारी वैज्ञानिक और व्यावहारिक खूबियां हैं इनस्क्रिप्ट में, जिन पर अलग से चर्चा की जा सकती है।
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> हम B लिखी कुंजी को व के रूप में identify इसलिए नहीं कर पाते क्योंकि उस पर 'व' अंकित नहीं है। यह सरकारी ढिलाई की वजह से है। इसकी सजा हम हिंदी को नहीं दे सकते। अन्य भाषाओं में कीबोर्ड पर अंग्रेजी के साथ-साथ संबंधित भाषा के अक्षर भी अंकित रहते हैं।
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> इनस्क्रिप्ट हिंदी में तेजी से काम करना संभव बनाता है और बहुत आसान भी। एक शब्द को ट्रांसलिटरेशन पद्धति से टाइप करने में अधिक कुंजियां दबाने की जरूरत पड़ेगी, इनस्क्रिप्ट की बनिस्पत। क्योंकि यही हिंदी के लिए सबसे अनुकूल टाइपिंग पद्धति है। हम ट्रांसलिटरेशन को अपनी निजी सुविधा की वजह से अपनाते हैं, किसी वैज्ञानिक या तकनीकी कारण से नहीं। ट्रांसलिटरेशन हिंदी में काम करने का आधिकारिक तरीका नहीं है। वह तो हमने लाभ के लिए ईज़ाद किया है। इनस्क्रिप्ट हिंदी की अपनी पहचान है। यही वजह है कि चाहे इस्की हो या फिर यूनिकोड एनकोडिंग, सबमें सामान्य रूप से इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड लेआउट ही मौजूद होता है। ट्रांसलिटरेशन पद्धति को हमें अलग से सक्रिय करना पड़ता है।
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> इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड को आप यहां देख सकते हैं-
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> शुभकामनाओं सहित, सादर,
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> बालेन्दु शर्मा दाधीच