बंगलुरु, बंगलुरू, बेंगलुरु, बेंगलुरू
सादर,
सुयश
9811711884
अनुवाद, हिंदी और भाषाओं पर मेरा ब्लॉग : http://anuvaadkiduniya.blogspot.com
--
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अब कौन सा सही है और कौन सा ग़लत ये तो वहाँ का मूल निवासी बता सकता है कि वो
अपने शहर के नाम का उच्चारण कैसे करता है, या अन्य लोग बता सकते हैं जो अपने अपने
तरीक़े से उच्चारण करते हैं।
अंग्रेज़ बंग का उच्चारण नहीं कर पाए होंगे तो उन्होंने bang कर दिया जो उनकी भाषा का
प्रचलित शब्द है, तो ये बंग बेंग बन गया।
शायद बहुत कम लोगों को ज्ञात हो कि अंग्रेज़ों ने कानपुर शहर को Cawnpore की वर्तनी
दी थी जो अभी भी वहाँ की इमारतों पर लिखी है।
और हमारा लखनऊ Luck Now हो गया। वैसे पुराने लोग लखनऊ को वैसे भी नखलऊ बोलते हैं
जिसका तर्क मेरी समझ में कभी नहीं आया।
कभी आरनॉल्ड श्वाजनेगर के नाम की वर्तनी पर ग़ौर कीजिएगा, चकरा जाएँगे।
--
रावत
सुयश जी,
इस बारे में कोई निर्णय करने से पहले इसके निम्नलिखित चार अतिरिक्त
प्रचलित रूपों पर भी विचार करना ज़रूरी होगा:
बंगलूरु, बंगलूरू, बेंगलूरु, बेंगलूरू
प्रसंगवश, अब प्रचलित आठ हिंदी रूपों की तरह अंग्रेज़ी में Bengaluru नाम
रखे जाने से पहले जब इसका नाम Bangalore था, तब भी इसके निम्नलिखित आठ
रूप प्रचलित थे :
बंगलौर, बंगलोर, बंगलूर बंगलुर, बेंगलोर, बैंगलोर, बेंगलोरु, बैंगलोरु
गूगल पर खोज करने से हम यह भी जान सकते हैं कि ये कुल 16 रूप कितने कम या
अधिक प्रचलित हैं.
चन्द्र मोहन रावल
On 9 मई, 23:56, V S Rawat <vsra...@gmail.com> wrote:
> प्रॉपर नाउन में सही और ग़लत स्पष्ट करने का कोई नियम नहीं है। ये आपने चार शब्द लिखे
> हैं जिनको हिन्दी में पढ़ा जा सकता है।
>
> अब कौन सा सही है और कौन सा ग़लत ये तो वहाँ का मूल निवासी बता सकता है कि वो
> अपने शहर के नाम का उच्चारण कैसे करता है, या अन्य लोग बता सकते हैं जो अपने अपने
> तरीक़े से उच्चारण करते हैं।
>
> अंग्रेज़ बंग का उच्चारण नहीं कर पाए होंगे तो उन्होंने bang कर दिया जो उनकी भाषा का
> प्रचलित शब्द है, तो ये बंग बेंग बन गया।
>
> शायद बहुत कम लोगों को ज्ञात हो कि अंग्रेज़ों ने कानपुर शहर को Cawnpore की वर्तनी
> दी थी जो अभी भी वहाँ की इमारतों पर लिखी है।
>
> और हमारा लखनऊ Luck Now हो गया। वैसे पुराने लोग लखनऊ को वैसे भी नखलऊ बोलते हैं
> जिसका तर्क मेरी समझ में कभी नहीं आया।
>
> कभी आरनॉल्ड श्वाजनेगर के नाम की वर्तनी पर ग़ौर कीजिएगा, चकरा जाएँगे।
>
> --
> रावत
> On 5/9/2010 10:48 PM India Time, _सुयश सुप्रभ_ wrote:
>
> > आप इनमें से किस वर्तनी को सही मानते/मानती हैं :
>
> > बंगलुरु, बंगलुरू, बेंगलुरु, बेंगलुरू
>
> > सादर,
>
> > सुयश
> > 9811711884
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> > अनुवाद, हिंदी और भाषाओं पर मेरा ब्लॉग :http://anuvaadkiduniya.blogspot.com
>
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रावल जी ने वर्तनी की अनेकरूपता का बहुत अच्छा उदाहरण दिया है। हिंदी में
इस समस्या ने अराजकता का रूप ले लिया है। हिंदी में 'सब-कुछ चलता है' की
प्रवृत्ति के कारण कभी-कभी एक पाठ में किसी शब्द के दो-तीन रूप मिल जाते
हैं। अगर किसी पाठ में 'बेंगलुरु' और 'बेंगलुरू' दोनों रूपों का प्रयोग
हो तो यह चिंता का विषय बन जाता है। अगर हम हिंदी को सही अर्थ में ज्ञान
की भाषा बनाना चाहते हैं तो हमें हिंदी के मानकीकरण के लिए कुछ ठोस कदम
उठाने होंगे। हमारे लिए यह सचमुच शर्म की बात है कि अभी तक हिंदी में
देशों के नामों का मानकीकरण नहीं हो पाया है।
रावत जी ने लिखा है कि व्यक्तिवाचक संज्ञा की वर्तनी की शुद्धता या
अशुद्धता निर्धारित करने का कोई नियम नहीं है। मैं उनकी बात से सहमत होते
हुए भी यह कहना चाहूँगा कि अगर अंग्रेज़ी में सामूहिक प्रयास से वर्तनी
की अराजकता कम की जा सकती है तो हिंदी में भी यह काम किया जा सकता है।
हमें अपनी भाषा में वर्तनी की एकरूपता का ध्यान रखना होता है। हमें यह तय
कर लेना होगा कि 'बेंगलूरु' या 'बेंगलुरु' जैसे रूपों में से हमें किसका
चयन करना चाहिए। रावल जी की सलाह मानते हुए हम इस संदर्भ में गूगल की मदद
ले सकते हैं। मुझे गूगल पर निम्नलिखित परिणाम मिले :
बंगलुरु - 17,200
बंगलुरू - 41,400
बेंगलुरु - 365,000
बेंगलुरू - 301,000
बेंगलूरु - 18,800
बेंगलूरू - 55,500
इस तरह हम देखते हैं कि अधिकतर लोग 'बेंगलुरु' का प्रयोग करते हैं। क्या
हमें प्रयोग के आधार पर इस वर्तनी को अपनाना चाहिए?
सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वे मुझे अपना उत्तर व्यक्तिगत संदेश के रूप
में नहीं भेजें। हो सकता है कि आपके संदेश में कोई ऐसा विचार या तथ्य हो
जो दूसरे सदस्य को कुछ लिखने के लिए प्रेरित करे।
सादर,
सुयश
9811711884
अनुवाद, हिंदी और भाषाओं पर मेरा ब्लॉग : http://anuvaadkiduniya.blogspot.com
गूगल में 'बंगलौर' के लिए 5,13,000 परिणाम हैं - सबसे ज्यादा. इसलिए
सिर्फ़ इस आधार पर तो फ़ैसला नहीं किया जा सकता. हिंदी की प्रकृति को
देखते हुए मूल उच्चारण के सर्वाधिक पास रखना ही मेरे ख़याल से जगहों और
नये आयातित शब्दों की वर्तनी तय करने का बेहतर तरीका है. इसलिए मेरा मत
भी 'बेंगलूरु' के पक्ष में ही है.
विनय
> ...
>
> read more »
मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ।
मैंने जान-बूझकर 'बंगलौर' का उल्लेख नहीं किया था क्योंकि मुझे इस शहर के
नए नाम की वर्तनी के बारे में जानकारी प्राप्त करनी थी।
किसी शब्द के मानक रूप पर चर्चा करते समय भाषागत शुद्धता के अलावा प्रयोग
पर भी ध्यान देना चाहिए। हम इस तथ्य की उपेक्षा नहीं कर सकते हैं कि पत्र-
पत्रिकाओं में 'बेंगलूरु' का बहुत कम प्रयोग होता है।
अब हमारे पास दो विकल्प बचते हैं - 'बेंगलुरु' और 'बेंगलूरु'। सभी
सदस्यों से अनुरोध है कि वे हमें यह बताएँ कि इन दो रूपों में से हमें
किसका चयन करना चाहिए।
सादर,
सुयश
9811711884
अनुवाद, हिंदी और भाषाओं पर मेरा ब्लॉग : http://anuvaadkiduniya.blogspot.com
> ...
>
> और पढ़ें »
मैं मानकीकरण के संदर्भ में आपके विचार से पूरी तरह सहमत हूँ।
इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि अनेकरूपता संसार की हर भाषा में
होती है। अनेकरूपता को समस्या तब माना जाता है जब इसके कारण ज्ञान के
आदान-प्रदान की प्रक्रिया बाधित होती है। मैं इस संदर्भ में एक उदाहरण
देना चाहूँगा। अगर हमें ऐसे पाठ का अनुवाद करना है जिसमें संसार के सभी
देशों का उल्लेख हुआ है और हमारा समय देशों की वर्तनी तय करने में ही
बर्बाद हो जाए तो यह चिंता का विषय माना जाएगा। अगर सरकार हिंदी के लिए
सचमुच कुछ करना चाहती है तो उसे इस भाषा को व्यवस्थित रूप देने के लिए
कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल नियम बनाने से कुछ नहीं होगा। नियमों की
स्वीकार्यता सुनिश्चित करने के लिए वेबसाइट, नि:शुल्क पुस्तिका आदि के
माध्यम से लोगों को इन नियमों के बारे में बताना होगा। अभी तक मानक हिंदी
वर्तनी के सभी नियम इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं। मैंने कुछ नियमों को
इंटरनेट पर डाला है। आप ये नियम निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करके देख सकते
हैं :
मानक हिंदी के कुछ नियम अब अप्रासंगिक हो गए हैं।
कुछ लोग समझते हैं कि मानकीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि भाषा में
अनेकरूपता हमेशा रहती है। मैं इन लोगों से कहना चाहूँगा कि भाषा केवल
संप्रेषण का साधन नहीं है। यह ज्ञान को सहेजकर रखने का भी साधन है। अगर
हम हिंदी को ज्ञान की भाषा बनाना चाहते हैं तो हमें इसके मानकीकरण की
उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका बहुत महत्व है।
अगर छात्र वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद भी यह नहीं जान पाए कि 'इज़रायल',
'इज़राइल', 'इस्रायल', 'इस्राइल' आदि वर्तनियों में से कौन-सी वर्तनी
मानक है तो इससे वह भाषागत भ्रम का शिकार हो जाता है।
कुछ काम तो हम इस समूह के माध्यम से भी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, हमें
मालूम हो गया है कि कर्नाटक की राजधानी को 'बेंगलुरु' या 'बेंगलूरु'
लिखना चाहिए। हमें बस इस बात का ध्यान रखना होगा कि पाठ में 'बेंगलुरु'
और 'बेंगलूरु' दोनों न लिखे जाएँ। ऐसे अनेक शब्द हैं जिनकी वर्तनी को
लेकर भ्रम बना हुआ है। अगर सभी सदस्यों का सहयोग इसी तरह मिलता रहा तो हम
उन शब्दों के मानक रूप पर भी सहमत हो जाएँगे।
सादर,
सुयश
9811711884
अनुवाद, हिंदी और भाषाओं पर मेरा ब्लॉग : http://anuvaadkiduniya.blogspot.com
हिंदी में अन्य भाषाओं की ध्वनियों के लिप्यंतरण की पद्धति को आज तक
सुव्यवस्थित रूप नहीं दिया जा सका है। जब देशों के नामों का मानकीकरण
नहीं हो पाया है तो 'बेंगलुरु' या 'बेंगलूरु' के संदर्भ में कितनी
अराजकता होगी आप इसका अनुमान लगा सकते हैं। इस स्थिति में संभावना इसी
बात की है कि हिंदी में 'बेंगलूरु' के बदले 'बेंगलुरु' प्रचलित हो जाएगा।
मैं आपकी इस बात से सहमत हूँ कि हमें मूल शब्द के उच्चारण की उपेक्षा
नहीं करनी चाहिए।
सादर,
सुयश
9811711884
अनुवाद, हिंदी और भाषाओं पर मेरा ब्लॉग : http://anuvaadkiduniya.blogspot.com
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हरिराम जी,
हिंदी में अन्य भाषाओं की ध्वनियों के लिप्यंतरण की पद्धति को आज तक
सुव्यवस्थित रूप नहीं दिया जा सका है। जब देशों के नामों का मानकीकरण
नहीं हो पाया है तो 'बेंगलुरु' या 'बेंगलूरु' के संदर्भ में कितनी
अराजकता होगी आप इसका अनुमान लगा सकते हैं। इस स्थिति में संभावना इसी
बात की है कि हिंदी में 'बेंगलूरु' के बदले 'बेंगलुरु' प्रचलित हो जाएगा।
मैं आपकी इस बात से सहमत हूँ कि हमें मूल शब्द के उच्चारण की उपेक्षा
नहीं करनी चाहिए।
सादर,
सुयश
9811711884