तकनीकी प्रश्न: अब तक कितने सार्वजनिक बैंकों ने नेटबैंकिंग हिंदी में शुरू की है ?

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प्रवीण कुमार Praveen

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Jul 22, 2013, 6:51:56 AM7/22/13
to राजभाषा विभाग RajbhashaVibhag, hindian...@googlegroups.com
सम्मानीय सदस्यगण 

जानकारी हो बताने का कष्ट करें:

१. अब तक कितने सार्वजनिक बैंकों ने नेटबैंकिंग हिंदी में शुरू की है?
२. अब तक कितने सार्वजनिक बैंकों ने पासबुक और माँग ड्राफ्ट की १००% छपाई हिंदी में शुरू की है?
३. क्या ऑनलाइन आयकर विवरणी हिंदी में भरी जा सकती है?
४. क्या पैनकार्ड का ऑनलाइन आवेदन हिंदी में किया जा सकता है?
५. क्या ऑनलाइन रेलवे टिकट की बुकिंग हिंदी में की जा सकती है?
६. भारत सरकार के किस मंत्रालय में १००% सॉफ्टवेयर द्विभाषी प्रयोग में लाये जा रहे हैं?  
7. भारत सरकार की कौन सी वेबसाइट शत-प्रतिशत हिंदी अथवा शत-प्रतिशत द्विभाषी रूप में उपलब्ध है? (जिसमें हिंदी वेबसाइट पर हर सामग्री केवल हिंदी में हो एक शब्द-अक्षर भी रोमन में ना लिखा गया हो)  

प्रतिक्रियाएं व्यक्त करें 

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सीएस प्रवीण जैन CS Praveen Jain

‘‘किसी भी सभ्य देश में विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा प्रदान नहीं की जाती। विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा देने से छात्रों का मन विकारग्रस्त हो जाता है और वे अपने ही देश में स्वयं को विदेशी सिद्ध करते जान पड़ते हैं।’’ - रवीन्द्रनाथ टैगोर

Foreign language is not a medium of teaching in any civilized nation. Teaching through foreign language makes students’ minds perverse and they start feeling themselves as foreigners in their own country: Rabindranath Tagore

Yogendra Joshi

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Jul 22, 2013, 10:47:15 AM7/22/13
to hindian...@googlegroups.com
मेरा अनुमान है कि कोई भी साइट वैसी नहीं है जैसी आप तलाश रहे हैं। घूमफ़िर कर सब अंगरेजी वर्णमाला पर आधारित है। लेकिन मेरी जानकारी अतिसीमित है।


22 जुलाई 2013 4:21 pm को, प्रवीण कुमार Praveen <cs.prav...@gmail.com> ने लिखा:
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Vinod Sharma

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Jul 22, 2013, 11:19:30 AM7/22/13
to hindian...@googlegroups.com
सातों प्रश्नों के उत्तर नकारात्मक हैं।

2013/7/22 Yogendra Joshi <yogendr...@gmail.com>



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bestregards.gif
विनोद शर्मा

Dr. Paritosh Malviya

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Jul 22, 2013, 11:42:34 PM7/22/13
to hindian...@googlegroups.com
अभी ये सभी लक्ष्‍य दूर की कौड़ी हैं। जब सामान्‍य पत्राचार ही 100 प्रति‍शत हिंदी में नहीं हो पाया है तो कंप्‍यूटर पर शतप्रति‍शत कैसे होगा।


2013/7/22 प्रवीण कुमार Praveen <cs.prav...@gmail.com>
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Dr. Paritosh Malviya
Gwalior

Yogendra Joshi

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Jul 23, 2013, 8:47:46 AM7/23/13
to hindian...@googlegroups.com
असल में देखा जाये तो कंप्यूटरों के माध्यम से भाषा-लिपि का प्रयोग अधिक आसान है, कारण कि कंप्यूटरों की अपनी कोई भाषा नहीं होती और वे किसी भाषा विशेष के प्रति लगाव नहीं रखते। यह तो मानव संकल्प पर निर्भर करता है कि वह उसे अपनी मूल भाषा के लिए प्रयोग में लेता है कि नहीं। चीन पहला राष्ट्र है जिसने वेबसाइटों के नाम तक चीनी लिपि में लिखने की शुरुआत की थी। चीन नहीं चाहता कि उसके हर नागरिक को अंगरेजी सीखनी पड़े, क्योंकि हर नागरिक को विदेशियों के साथ संपर्क नहीं साधना होता है। हमारी स्थिति भिन्न नहीं होनी चाहिए, किंतु लंबी गुलामी के कारण हम अंगरेजी मोह से बाहर निकल ही नहीं सकते।  फलतः वह काम भी अब हिंदी में नहीं होते जो पहले होते थे। विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी शब्दों के साथ तैयार फ़ार्मेट में फ़ॉर्म आदि भले ही मिल जायें, उनमें प्रविष्टियां अंगरेजी में ही मिलेंगी। चाहे रेलगाड़ी टिकट हो या बैंक ड्राफ़्ट सब जगह हाल यही है। कहने के लिए हिंदी भी रहती है, लेकिन उसकी उपयोगिता शायद ही कभी हो। भारतीयों की मानसिकता उपर वाला शायद बदल सके, धरती पर आप-हम जैसे कुछ नहीं कर सकते हैं।


23 जुलाई 2013 9:12 am को, Dr. Paritosh Malviya <malviya...@gmail.com> ने लिखा:

डॉ एम एल गुप्ता (Dr. M.L. Gupta)

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Jul 23, 2013, 1:25:10 PM7/23/13
to KEN, राजभाषा विभाग RajbhashaVibhag - भाषायी कंप्यूटरीकरण, प्रवीण कुमार Praveen, hindian...@googlegroups.com
हम सब की चिंता एक जैसी है, पर चिंता किसको है..।


On Mon, Jul 22, 2013 at 10:32 PM, KEN <drk...@gmail.com> wrote:

‘‘किसी भी सभ्य देश में विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा प्रदा नहीं की जाती। विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा देने से छात्रों का मन विकारग्रस्त हो जाता है और  अपने ही देश में स्वयं को विदेशी सिद्ध करते जान पड़ते हैं।’’ - रवीन्द्रनाथ टैगोर

Foreign language is not a medium of teaching in any civilized nation. Teaching through foreign language makes students’ minds perverse and they start feeling themselves as foreigners in their own country: Rabindranath Tagore

He learned drawing, anatomy, geography and history, literature, mathematics, Sanskrit, and English.his father tutored him in history, astronomy, and Sanskrit declensions. He read biographies of Benjamin Franklin among other figures; they discussed Edward Gibbon's The History of the Decline and Fall of the Roman Empire; and they examined the poetry of Kālidāsa.[24]

http://en.wikipedia.org/wiki/Rabindranath_Tagore

A preacher may not practice what he says ! 


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डॉ एम एल गुप्ता (Dr. M.L. Gupta)

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Jul 24, 2013, 1:12:09 AM7/24/13
to hindian...@googlegroups.com, ramaka...@rbi.org.in, Hariyash Rai, pradeep sharma, Manorama Mishra, Balendu Sharma Dadhich, bindu...@gmail.com, Kewal Krishan, राजभाषा विभाग RajbhashaVibhag - भाषायी कंप्यूटरीकरण, Rajbhasha Dept. RO Gandhinagar, arvin...@bankofindia.co.in, agmraj...@centralbank.co.in, sar...@denabank.com.in, rajbh...@rbi.org.in, jmsingla, Chief Manager Hindi, Ramchandra VISHWAKARMA, Jawahar Karnavat, Jay prakash Manas, Ajai M., buddhi nath mishra, Anil Upadhyaya, Dr ved partap Vaidik, navendu kumar vajpayee, Naresh Chandrakar
बैंकों का 95% कार्य तो कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर (CBS)  के माध्यम से होता है।  कार्य की बात तो दूरकी है, कई बैंक ऐसे भी हैं जिन्होंने भारत सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक तथा माननीय जयपुर उच्च न्यायालय के आदेशों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए  कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर (CBS) में  हिंदी या द्विभाषी ( हिंदी- अंग्रेजी ) में कार्यकरने की व्यवस्था तक नहीं की है । कई बैंक ऐसे भी हैं जिन्हों पहले कुछ  व्यवस्था की  थी लेकिन  कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर (CBS) में   परिवर्तन आदि के बाद हिंदी या द्विभाषी ( हिंदी- अंग्रेजी ) में कार्यकरने की व्यवस्था  नहीं की । जब तक  इस मामले में राजभाषा कार्यान्वयन के लिए मौजूद संस्थाओं द्वारा इसके लिए  गंभीरतापूर्वक  कार्रवाई  नहीं की जाएगी, स्थिति जस की तस रहेगी।  यदि बैंको के कोर  बैंकिंग सॉफ्टवेयर (CBS)  से जारी होने वाले पत्रों, रिपोर्टों, फार्मों  और   पास बुक प्रविष्टियेों आदि कार्य  एक ही पृष्ठ पर  साथ-साथ करने की व्यवस्था की जाए और  अलग-अलग  केवल अंग्रेजी व केवल हिंदी के विकल्पों के बजाए केवल द्विभाषी विकल्प रखा जाए तो समग्र कार्यमें हिंदी का समावेश हो सकेगा और किसी भी क्षेत्र में किसी शिकाय तया समस्या की बात भी नहीं होगी । मुंबई में इस विषय पर आयोजित  बैंकों की एक विशेष बैठक में चर्चा के पश्चात सबने सहमति भी व्यक्त की  थी।बैंकों के वरिष्ठतम कार्यपालकों ने  भी इसे सही विकल्प माना था लेकिन  इच्छा शक्ति के अभाव में बाद में बहुत से लोग खामोश हो गए। इच्छा शक्ति के अभाव में  तो कुछ नहीं हो सकता।

कृपया प्रतिक्रियाएं व्यक्त करें , 
u
डॉ. एम. एल. गुप्ता' 'आदित्य'


2013/7/23 Yogendra Joshi <yogendr...@gmail.com>

Vinod Sharma

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Jul 24, 2013, 2:25:23 AM7/24/13
to hindian...@googlegroups.com, ramaka...@rbi.org.in, Hariyash Rai, pradeep sharma, Manorama Mishra, Balendu Sharma Dadhich, bindu...@gmail.com, Kewal Krishan, राजभाषा विभाग RajbhashaVibhag - भाषायी कंप्यूटरीकरण, Rajbhasha Dept. RO Gandhinagar, arvin...@bankofindia.co.in, agmraj...@centralbank.co.in, sar...@denabank.com.in, rajbh...@rbi.org.in, jmsingla, Chief Manager Hindi, Ramchandra VISHWAKARMA, Jawahar Karnavat, Jay prakash Manas, Ajai M., buddhi nath mishra, Anil Upadhyaya, Dr ved partap Vaidik, navendu kumar vajpayee, Naresh Chandrakar
गुप्ताजी और अन्य मित्रगण, यहाँ तो हर शाख पे उल्लू बैठा है, पूरे कुएं में भाँग घुली हुई है। मैंने 26 साल सरकारी विभाग में और 13 साल सरकारी उद्यम में पूरे किए गए अपने सेवा काल में दिल्ली मुख्यालय से कभी भी, एक भी पत्र हिंदी में प्राप्त होता नहीं देखा। आप किस किस का उदाहरण पूछेंगे। मेरी राय में प्रश्न को उल्टा पूछा जाना चाहिए कि क्या ऐसा कोई बैंक है जिसमें हिंदी में या द्विभाषी कार्य होता है। आज की सच्चाई यही है कि ऐसा कोई वाणिज्यिक बैंक नहीं है, सिवाय हिंदी भाषी राजस्थान, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के। 



2013/7/24 डॉ एम एल गुप्ता (Dr. M.L. Gupta) <mlgd...@gmail.com>



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