'नए' या 'नये' (मानक हिंदी वर्तनी से संबंधित प्रश्‍न)

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सुयश सुप्रभ

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Jan 27, 2011, 11:30:59 AM1/27/11
to hindian...@googlegroups.com
अगर 'य' किसी शब्द का मूल अंग हो तो उसके बदले वैकल्पिक स्वर रूपों के प्रयोग को मानक नहीं माना जाता है। बहुत-से लोग 'ज़रिये', 'साये' आदि शब्दों में इस नियम का पालन करते हैं, लेकिन वे 'नये' को 'नए' लिखते हैं। मैं भी अभी इस दुविधा में हूँ कि वर्तनी के संदर्भ में सुविचारित नियम का पालन करूँ या वर्तमान प्रयोग को देखते हुए 'नये' को 'नए' लिखना शुरू कर दूँ।

आप 'नये' या 'नए' में से किस वर्तनी का प्रयोग करते हैं?

सादर,


V S Rawat

unread,
Jan 27, 2011, 3:30:51 PM1/27/11
to hindian...@googlegroups.com
मैं तो "-ये" वाले रूपों का ही इस्तेमाल करता था लेकिन एक बार एक क्लाइंट ने "-ए" वाले
रूप का ही इस्तेमाल करने को कहा। अब इसके लिए मुझे अपनी ग्लॉसरी को बदलना पड़ा तो
उसके बाद से मैं "-ए" वाले रूपों का ही इस्तेमाल करता आ रहा हूँ।

इसी प्रसंग में पहले में नुक्ते का सही इस्तेमाल बहुतायत से करता था, लेकिन गूगल अनुवाद तो
नुक्ते का इस्तेमाल ही नहीं करता है जिस वजह से मुझे अपनी ग्लॉसरी में भी बिना नुक्ते वाले
शब्दों का ही इस्तेमाल करना पड़ा, वरना क्लाइंट को नुक्ते वाले और बिना नुक्ते वाले दो
तरह के शब्दों की प्रूफ़रीडिंग में दिक्कत होती थी, जिसे संगत शब्दों का इस्तेमाल न करने
की मेरी गलती मानकर मेरी रैंकिंग कम हो जाती थी।

यही बात ँ की है। गूगल अनुवाद ँ का इस्तेमाल बहुत कम करता है और इसकी जगह पर ं का
इस्तेमाल करता है इसलिए अब मैं भी ँ की जगह पर ज्यादातर ं का इस्तेमाल करने लगा हूँ।

--
रावत

Vijay K. Malhotra

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Jan 27, 2011, 11:49:38 PM1/27/11
to hindian...@googlegroups.com, Jagan Nathan, vashini sharma, Suraj Singh, Surendra Gambhir, JAWAHAR KARNAVAT
प्रिय सुयश,
तुम्हारी बात तर्कसंगत होते हुए भी भारत सरकार ने 'नये' के स्थान पर 'नए' और  'नयी को 'नई' लिखने की सिफ़ारिश की है.
प्रो. जगन्नाथन् से निवेदन है कि इस पर अपना अभिमत प्रस्तुत करें.
विजय  
2011/1/27 सुयश सुप्रभ <translate...@gmail.com>

--
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Vijay K Malhotra
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सुयश सुप्रभ

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Jan 28, 2011, 2:20:08 AM1/28/11
to hindian...@googlegroups.com, Jagan Nathan, vashini sharma, Suraj Singh, Surendra Gambhir, JAWAHAR KARNAVAT
विजय जी,

भारत सरकार ने पिछले साल कुछ नियमों में संशोधन किया था। संशोधित नियम में वैकल्पिक स्वर रूपों के प्रयोग को क्रिया तक सीमित कर दिया गया है। मैं यह नियम नीचे उद्धृत कर रहा हूँ :

"5. श्रुतिमूलक 'य' और 'व' के शब्द

(i) श्रुतिमूलक 'य' और 'व' का प्रयोग क्रिया रूपों में होता है। क्रिया रूप इस तरह से बनेंगे -

आया आए, आई आईं

(हुवा...) हुआ हुए हुई हुईं

(ii) जिन शब्दों में मूल रूप से 'य' और 'व' शब्द के अंग हों, तो वे छोड़े नहीं जा सकते। जैसे -

पराया - पराये
पहिया - पहिये
रुपया - रुपये
दायाँ - दायें
करुणामय - करुणामयी
स्थायी, अव्ययीभाव आदि"

आपने जिस पुराने नियम का संदर्भ दिया है उसमें श्रुतिमूलक 'य' और 'व' के बदले 'ई' और 'ए' जैसे स्वरात्मक रूपों के प्रयोग को केवल क्रिया रूपों तक सीमित नहीं रखा गया था। यह नियम नीचे प्रस्तुत है :

"3.13.1 जहाँ श्रुतिमूलक य, व का प्रयोग विकल्प से होता है वहाँ न किया जाए, अर्थात् किए : किये, नई : नयी, हुआ : हुवा आदि में से पहले (स्वरात्मक) रूपों का प्रयोग किया जाए। यह नियम क्रिया, विशेषण, अव्यय आदि सभी रूपों और स्थितियों में लागू माना जाए। जैसे :– दिखाए गए, राम के लिए, पुस्तक लिए हुए, नई दिल्ली आदि।" 

संशोधित नियम की जानकारी बहुत कम लोगों को है क्योंकि इस नियम का उल्लेख 'देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण' नामक पुस्तिका में नहीं हुआ है। मैंने यह नियम इस पुस्तिका के बाद छपी तीन-चार पेजों की बुकलेट में पढ़ा है। इस बुकलेट की जानकारी बहुत कम लोगों को है। मुझे लगता है कि संबंधित विभाग को अपने प्रकाशन के प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है।

Vijay K. Malhotra

unread,
Jan 28, 2011, 5:29:33 AM1/28/11
to hindian...@googlegroups.com, Jagan Nathan, vashini sharma, Suraj Singh, Surendra Gambhir, JAWAHAR KARNAVAT
अद्यतन  जानकारी के लिए धन्यवाद ....फिर भी मैं प्रो.जगन्नाथन् की टिप्पणी की प्रतीक्षा करूँगा.
विजय

2011/1/28 सुयश सुप्रभ <translate...@gmail.com>

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