ललित जी,
आपको केंद्रीय हिंदी निदेशालय की पुस्तिका से ठीक-ठाक मदद मिल जाएगी, लेकिन इसमें कुछ नियम ऐसे भी हैं जिनका पालन करने से आपकी परेशानी बढ़ ही जाएगी। नियम संख्या 2.1.2.5 देखें:
"हल् चिह्न युक्त वर्ण से बनने वाले संयुक्ताक्षर के द्वितीय व्यंजन के साथ इ की मात्रा का प्रयोग संबंधित व्यंजन के तत्काल पूर्व ही किया जाएगा, न कि पूरे युग्म से पूर्व। यथा:– कुट्टिम, चिट्ठियाँ, द्वितीय, बुद्धिमान, चिह्नित आदि (कुट्टिम, चिट्ठियाँ, द्वितीय, बुद्धिमान, चिह्नित नहीं)।"
अगर आप केंद्रीय हिंदी निदेशालय की पुस्तिका की तुलना शिकागो मैनुअल, एपी स्टाइलबुक जैसी निर्देशिकाओं से करेंगे तो यह देखेंगे कि जहाँ निदेशालय के नियमों में लंबे समय तक कोई परिवर्तन नहीं होता वहीं शिकागो या एपी जैसी निर्देशिकाओं की वेबसाइटों पर हर दूसरे या तीसरे दिन या तो किसी-न-किसी वर्तनी में संशोधन होता है या पुराने पड़ चुके नियमों पर चर्चा होती है।
उपर्युक्त समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मैंने हिंदी वर्तनी और व्याकरण से संबंधित नियमों की सूची बनाई है जिसे आप अनुवादक संघ के
ब्लॉग पर देख सकते हैं। इस सूची में नए नियम जोड़े जाएँगे। हिंदी अनुवादक समूह में जिन वर्तनियों पर चर्चा होती है उन्हें भी इस सूची में शामिल किया जाएगा।
भाषा इतनी तेज़ रफ़्तार से बदल रही है कि अब हमें व्याकरण की किताबों से अधिक मदद इन निर्देशिकाओं से मिलने लगी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इन निर्देशिकाओं में समय के साथ बदलते नियमों और वर्तनियों को नियमित अंतराल पर शामिल किया जाता है।
सादर,
सुयश