मानक हिंदी वर्तनी

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lalit sati

unread,
Nov 20, 2014, 10:53:40 PM11/20/14
to ha
सभी विद्वानों को प्रणाम,
क्या हिंदी में कोई मानक वर्तनी संबंधी दस्तावेज़ है? जानकारी चाहिए थी। मैं स्वतंत्र हिंदी अनुवादक हूँ। कमर्शियल अनुवाद करता हूँ। अक्सर क्या सही है क्या नहीं है के प्रश्न सामने उपस्थित हो जाते हैं।
वर्ष 2003 में देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी के मानकीकरण के लिए आयोजित अखिल भारतीय संगोष्ठी में निर्धारित नियमों के अलावा भी कोई सर्वमान्य या बहुप्रचलित दस्तावेज़ हो, जिसे "The Chicago Manual of Style" की तरह देखा जाता हो।

साथ ही कृषि विज्ञान की किसी शब्दावली की जानकारी हो तो वह भी प्रदान करने का कष्ट करें। वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा तैयार शब्दकोश मेरे पास हैं, पर समस्या किसान को समझ में आने वाले शब्दों की है। यदि कोई विद्वान इस पर प्रकाश डाल सकें तो कृपा होगी।

सादर,
ललित सती

Yashwant Gehlot

unread,
Nov 20, 2014, 11:12:00 PM11/20/14
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)
ललित जी,

केंद्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी "देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण" को संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोग में लिया जा सकता है. इसका प्रकाशन वर्ष 2010 है. संभवतः इस पर इस समूह या 'तकनीकी हिंदी' समूह में इस संदर्भ ग्रंथ पर चर्चा हुई थी.

यशवंत

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Yashwant Gehlot

Hariraam

unread,
Nov 21, 2014, 12:19:50 AM11/21/14
to hindian...@googlegroups.com
इसके बाद संशोधित व नवीनतम मानक भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जारी किए - अगस्त-2012 में, IS-16500.

ऑनलाइन खरीद हेतु उपलब्ध हैं:


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हरिराम
प्रगत भारत <http://hariraama.blogspot.com>

Suyash Suprabh (सुयश सुप्रभ)

unread,
Nov 21, 2014, 3:28:45 AM11/21/14
to hindian...@googlegroups.com
ललित जी,

आपको केंद्रीय हिंदी निदेशालय की पुस्तिका से ठीक-ठाक मदद मिल जाएगी, लेकिन इसमें कुछ नियम ऐसे भी हैं जिनका पालन करने से आपकी परेशानी बढ़ ही जाएगी। नियम संख्या 2.1.2.5 देखें:

"हल् चिह्‍न युक्‍त वर्ण से बनने वाले संयुक्‍ताक्षर के द्‍‌वितीय व्यंजन के साथ इ की मात्रा का प्रयोग संबंधित व्यंजन के तत्काल पूर्व ही किया जाएगा, न कि पूरे युग्म से पूर्व। यथा:– कुट्‌टिम, चिट्‌ठियाँ, द्‌वितीय, बुद्‌धिमान, चिह्‌नित आदि (कुट्टिम, चिट्ठियाँ, द्‍‌वितीय, बुद्‍धिमान, चिह्‍नित नहीं)।"

अगर आप केंद्रीय हिंदी निदेशालय की पुस्तिका की तुलना शिकागो मैनुअल, एपी स्टाइलबुक जैसी निर्देशिकाओं से करेंगे तो यह देखेंगे कि जहाँ निदेशालय के नियमों में लंबे समय तक कोई परिवर्तन नहीं होता वहीं शिकागो या एपी जैसी निर्देशिकाओं की वेबसाइटों पर हर दूसरे या तीसरे दिन या तो किसी-न-किसी वर्तनी में संशोधन होता है या पुराने पड़ चुके नियमों पर चर्चा होती है।

उपर्यु‍क्‍त समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मैंने हिंदी वर्तनी और व्याकरण से संबंधित नियमों की सूची बनाई है जिसे आप अनुवादक संघ के ब्लॉग पर देख सकते हैं। इस सूची में नए नियम जोड़े जाएँगे। हिंदी अनुवादक समूह में जिन वर्तनियों पर चर्चा होती है उन्हें भी इस सूची में शामिल किया जाएगा।

भाषा इतनी तेज़ रफ़्तार से बदल रही है कि अब हमें व्याकरण की किताबों से अधिक मदद इन निर्देशिकाओं से मिलने लगी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इन निर्देशिकाओं में समय के साथ बदलते नियमों और वर्तनियों को नियमित अंतराल पर शामिल किया जाता है।  

सादर,

सुयश

21 नवंबर 2014 को 9:23 am को, lalit sati <lalit...@gmail.com> ने लिखा:
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lalit sati

unread,
Nov 21, 2014, 4:25:34 AM11/21/14
to ha
धन्यवाद यशवंत भाई और हरिराम जी।

शुक्रिया सुयश, विस्तार से उत्तर देने के लिए।

सुयश भाई, क्या निष्कर्ष यह निकाला जाए कि फ़िलहाल हिंदी में ऐसा कोई "सर्वमान्य या बहुप्रचलित दस्तावेज़" नहीं है, जिसका पालन सभी या अधिकांश करते हों। समाचार-पत्र अपनी स्टाइल शीट लेके बैठे रहते हैं, प्रकाशकों के अपने मानक होते हैं। अब बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (गूगल से लेकर माइक्रोसॉफ़्ट तक) ने अपने स्तर पर मानक तय कर दिए हैं। छोटी-छोटी चीज़ों में एक राय नहीं है। कोई चंद्रबिंदु का इस्तेमाल करता है, कोई नहीं। किसी को नुक्ते से परहेज है, किसी के लिए अनिवार्य है। कोई गये, आये करता है, किसी को गए, आए सुहाता है। आदि आदि। 

ब्लॉग पर लगातार अपडेट करने वाला विचार अच्छा है।

Hariraam

unread,
Nov 21, 2014, 7:10:08 AM11/21/14
to hindian...@googlegroups.com
'सर्वमान्य', 'एकरूपता' आदि की बात करें तो अभी तक विभिन्न कम्प्यूटर प्रचालन तन्त्रों, फोंट्स्, रेण्डरिंग इंजन आदि में भी अलग-अलग प्रकार से शब्दों की वर्तनी प्रकट होती है। मंगल फोंट में बायें से दायें मिलकर संयुक्ताक्षर बने अक्षरों को प्राथमिकता दी गई है तो Arial Unicode MS में पुराने रूप में ऊपर-नीचे जुड़कर बने अनेक संयुक्ताक्षर प्रकट होते हैं। विण्डोज में कुछ शब्दों की डिफॉल्ट रेण्डरिंग कुछ और है तो लिनक्स, युनिक्स, मैक आदि में कुछ और रूप में प्रकट होते हैं।

युनिकोड में केवल मूल वर्णों का कूट-निर्धारण हुआ है। विश्वस्तर पर रेण्डरिंग की एकरूपता के लिए Indic Layout Task Force, World Wide Web की कमिटि द्वारा मानकों के निर्धारण का कार्य जारी है।


हरिराम
प्रगत भारत <http://hariraama.blogspot.com>

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