कुंजीपटल संबंधी समस्याएं एवं विंडोज

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Dr Rajeev kumar Rawat

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Mar 22, 2011, 1:27:53 AM3/22/11
to hindian...@googlegroups.com
माननीय मित्रो,

1. विंडोज एक्सपी में यूनीकोड सक्रिय करने पर प्रौद्योगिकी आता है तथा विंडोज 7 में
प्रौद् योगिकी आता है ( द् एवं यो के मध्य अंतराल नहीं है , मैंने अंतर स्पष्ट करने के लिए दिया है ) ।
इस प्रकार बने दोनों ही संयुक्ताक्षर क्या सही हैं ।

2. देवनागरी इनस्क्रिपट कुंजी पटल पर प्रश्न चिह्न आदि कैसे लाए जाएं। अभी तक तो मैं alt+shift से तुरंत En में जाके ही लगाता रहा  हूँ या अधिकतर छोड़ भी बैठता हूँ । एक बार हरिराम जी ने बताया था किंतु वह  होता नहीं ।

सादर
--
डॉ. राजीव कुमार रावत  Dr. R. K. Rawat
हिन्दी अधिकारी          Hindi Officer
राजभाषा विभाग         Rajbhasha Vibhag
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर 721302
Indian Institute of Technology Khargpur
09564156315,09614887714,09641049944,08653807663
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Vinod Sharma

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Mar 22, 2011, 4:19:31 AM3/22/11
to hindian...@googlegroups.com
रावतजी, संकेत चिह्नों को अभी तक यूनीकोड में किसी कुंजी पर स्थापित नहीं किया गया है.
यदि आप आल्ट+शिफ्ट का प्रयोग न करना चाहें तो आल्ट कोड की सूची डाउनलोड कर मुख्य
मुख्य कोड याद करलें और आल्ट दबाकर वह सांख्यिक कोड दबाएँ जैसे प्रश्नवाचक के लिए
आल्ट+063. हम सभी इन जुगाड़ों से ही काम चला रहे हैं.  

2011/3/21 Dr Rajeev kumar Rawat <dr.raje...@gmail.com>
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ePandit | ई-पण्डित

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Mar 22, 2011, 5:17:26 AM3/22/11
to hindian...@googlegroups.com
राजीव जी विण्डोज़ में हिन्दी के दो कुंजीपटल होते हैं, एक तो Devanagari-INSCRIPT दूसरा Hindi Traditional

इनमें से पहले में तो प्रश्नचिह्न लगाने के लिये भाषा बदलकर अंग्रेजी करना ही पड़ेगी लेकिन दूसरे वाले (Hindi Traditional) में बिना भाषा बदले भी आप AltGr (दायीं Alt कुञ्जी)+SHIFT+? संयोजन दबाकर प्रश्नचिह्न प्राप्त कर सकते हैं।

वैसे मैं Devanagari-INSCRIPT वाले का प्रयोग करता हूँ क्योंकि उसमें देवनागरी के सभी चिह्न होते हैं, इसमें मैंने MSKLC (Microsoft Keyboard Layout Creator) टूल की मदद से प्रश्नचिह्न को ? कुञ्जी के शिफ्ट पोजीशन में डाल रखा है जिससे कि SHIFT+? दबाने से की बजाय प्रश्नचिह्न प्राप्त हो जाता है। सभी को ऐसा कर लेना चाहिये क्योंकि हिन्दी में का प्रयोग नहीं के बराबर है।

२२ मार्च २०११ १०:५७ पूर्वाह्न को, Dr Rajeev kumar Rawat <dr.raje...@gmail.com> ने लिखा:
--
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Vinod Sharma

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Mar 22, 2011, 6:11:07 AM3/22/11
to hindian...@googlegroups.com
पंडितजी कृपया MSKLC से ? को स्थापित करने की विधि का वर्णन करदें तो आपके सुझाव के अनुसार सभी लाभान्वित हो सकेंगे.

2011/3/22 ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>



--

Hariraam

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Mar 22, 2011, 1:05:13 PM3/22/11
to hindian...@googlegroups.com
आधुनिक हिन्दी (देवनागरी) में संयुक्ताक्षरों के प्रयोग को कम से कम करने का प्रयास किया गया है। क्योंकि संयुक्ताक्षरों का विकास कागज पर कलम से शीघ्र लिखने के प्रयास में कालक्रम में होता गया। संयुक्ताक्षरों के अधिक प्रयोग से कई हिन्दीतर भाषी लोग दुविधा का शिकार होकर गलत प्रयोग करने लगते हैं। यथा - द्वारा को लोग व्दारा लिखने लगे हैं। सिद्ध को सिध्द लिखने लगे हैं। द्घ - उद्घाटन और उद्धार दोनों में वे कोई अन्तर समझ नहीं पाते। त्र को त्न समझने लगते हैं।

अतः विण्डोज 7 में यथासंभव मौलिक रूप में रेण्डरिंग की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। क्योंकि कम्प्यूटर में टंकण तो द+हलन्त+ध = द्ध होता है। अतः हलन्त युक्त मूल रूप में संयुक्ताक्षरों के प्रकटीकरण पर जोर डाला गया है।

--- हरिराम

Ravishankar Shrivastava

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Mar 22, 2011, 10:45:01 PM3/22/11
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)

On Mar 22, 10:27 am, Dr Rajeev kumar Rawat <dr.rajeev.ra...@gmail.com>
wrote:


> माननीय मित्रो,
>
> 1. विंडोज एक्सपी में यूनीकोड सक्रिय करने पर प्रौद्योगिकी आता है तथा विंडोज 7
> में
> प्रौद् योगिकी आता है ( द् एवं यो के मध्य अंतराल नहीं है , मैंने अंतर स्पष्ट
> करने के लिए दिया है ) ।

ऐसा मंगल फ़ॉन्ट के विंडोज 7 के साथ आए संस्करण में बग की वजह से है.
उम्मीद है कि अगले संस्करण में इसे ठीक कर लिया जाएगा. आप चाहें तो इस
समस्या से छुटकारा पाने के लिए विंडोज 7 के साथ आए हिंदी के दूसरे
यूनिकोड फ़ॉन्ट कोकिला या उत्साह का भी प्रयोग कर सकते हैं, जिसमें ये
समस्या नहीं है.
सादर,
रवि

Dr.Rawat

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Mar 23, 2011, 1:10:48 AM3/23/11
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)
धन्यवाद


On Mar 22, 10:27 am, Dr Rajeev kumar Rawat <dr.rajeev.ra...@gmail.com>
wrote:

> dr.rajeevra...@yahoo.co.in , rkra...@hijli.iitkgp.ernet.in

Dr.Rawat

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Mar 23, 2011, 1:11:59 AM3/23/11
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)
बोल श्री जुगाड़ देवता की जय ।

On Mar 22, 1:19 pm, Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com> wrote:
> रावतजी, संकेत चिह्नों को अभी तक यूनीकोड में किसी कुंजी पर स्थापित नहीं किया
> गया है.
> यदि आप आल्ट+शिफ्ट का प्रयोग न करना चाहें तो आल्ट कोड की सूची डाउनलोड कर
> मुख्य
> मुख्य कोड याद करलें और आल्ट दबाकर वह सांख्यिक कोड दबाएँ जैसे प्रश्नवाचक के
> लिए
> आल्ट+063. हम सभी इन जुगाड़ों से ही काम चला रहे हैं.
>

> 2011/3/21 Dr Rajeev kumar Rawat <dr.rajeev.ra...@gmail.com>


>
>
>
>
>
>
>
>
>
> > माननीय मित्रो,
>
> > 1. विंडोज एक्सपी में यूनीकोड सक्रिय करने पर प्रौद्योगिकी आता है तथा विंडोज
> > 7 में
> > प्रौद् योगिकी आता है ( द् एवं यो के मध्य अंतराल नहीं है , मैंने अंतर स्पष्ट
> > करने के लिए दिया है ) ।
> > इस प्रकार बने दोनों ही संयुक्ताक्षर क्या सही हैं ।
>
> > 2. देवनागरी इनस्क्रिपट कुंजी पटल पर प्रश्न चिह्न आदि कैसे लाए जाएं। अभी तक
> > तो मैं alt+shift से तुरंत En में जाके ही लगाता रहा  हूँ या अधिकतर छोड़ भी
> > बैठता हूँ । एक बार हरिराम जी ने बताया था किंतु वह  होता नहीं ।
>
> > सादर
> > --
> > डॉ. राजीव कुमार रावत  Dr. R. K. Rawat
> > हिन्दी अधिकारी          Hindi Officer
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Arvind Kumar

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Mar 23, 2011, 1:22:34 AM3/23/11
to hindian...@googlegroups.com
मुझे एरियल यूनिकोड ऐमऐस Arial Unicode MS है... इस मेँ देवनागरी के सभी गुण मौजूद हैँ और वैब पर इसे प्रश्रय दिया जाना चाहिए...

रविजी, इसे इस्तेमाल कर के देखिए... अपनी आगामी कुछ पोस्ट इस मॆं अपलोड कीजिए. हमारे आगामी दो कोश The Penguin Language Explorer (Hindi-English) और (English-Hindi) इसी फ़ौंट में टाइपसैट किए गए हैं. हमारी आगामी वैबसाइट arvindlexicon.com पर मेरा गीता का और फ़ाउस्ट का अनुवाद इसी कोड मॆं है.


शुभ कामनाएँ

अरविंद कुमार
सी-18 चंद्र नगर
गाज़ियाबाद 201 011
टेलिफ़ोन - लैंडलाइन (0120) 411 0655 - मोबाइल 09716116106

samant...@gmail.com

ePandit | ई-पण्डित

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Mar 23, 2011, 2:58:10 AM3/23/11
to hindian...@googlegroups.com
ओह तो ये बात है, कुछ समय से मेरे पीसी में हिन्दी के कई संयुक्ताक्षर अलग-अलग दिख रहे थे। आपके बताये से याद आया कि मैंने कुछ समय पहले अपने विण्डोज़ ऍक्सपी के मंगल फॉण्ट को विण्डोज़ ७ वाले से बदल दिया था। अब वापस ऍक्सपी वाला करने से सही दिख रहे हैं।

मैं तो सोच रहा था कि मंगल की संयुक्ताक्षर सम्बन्धी कुछ पुरानी गलतियाँ (जैसे शृंगार का शृ) नये वर्जन में सुधारी गयी होंगी लेकिन यहाँ तो उल्टा और बढ़ गयी हैं। आगे भी कोई उम्मीद नहीं दिखती।

२३ मार्च २०११ ८:१५ पूर्वाह्न को, Ravishankar Shrivastava <ravir...@gmail.com> ने लिखा:
--
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ePandit | ई-पण्डित

unread,
Mar 23, 2011, 3:14:35 AM3/23/11
to hindian...@googlegroups.com
हरिराम जी कुछ संयुक्ताक्षर तो अलग रुप में भी ठीक लगते हैं जैसे श्‍व (श्व), द्‍ध (द्ध) लेकिन सभी सही नहीं लगते जैसे द्य एक अलग वर्ण है लेकिन दुर्भाग्यवश इसे द्‍य के रुप में असुन्दर ढ़ंग से लिखने को मान्यता मिल गयी है।

कुछ संयुक्ताक्षरों में तो अलग दिखाना सही है जैसे ह्म, द्म आदि क्योंकि नये लोगों को इन्हें समझने में कठिनायी होती है लेकिन द्य जैसे आसानी से समझ आने वाले संयुक्त वर्ण को अलग दिखाना बेकार है। सरलता के चक्कर में समझौते की कुछ सीमा होनी चाहिये कल को लोग बाग त्र को भी त्‍र तथा श्र को श्‍र लिखने लगें तो देवनागरी लिपि की सारी सुन्दरता ही नष्ट हो जायेगी।

मैंने पहले भी कहा है कि किसी लोकप्रिय, मानक या किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के डिफॉल्ट फॉण्ट के दो रुप होने चाहिये एक तो जो संयुक्ताक्षरों को पारम्परिक रुप में दर्शाये दूसरा जो आधुनिक सरल रुप में। साथ ही ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रयोक्ता को सुविधा हो कि वह अपना पसन्दीदा फॉण्ट डिफॉल्ट रुप में सैट कर सके। लिनक्स में शायद ऐसा हो सकता है परन्तु विण्डोज़ में नहीं (मैं पूरे ऑपरेटिंग सिस्टम की बात कर रहा हूँ केवल ब्राउजर की नहीं)। 

२२ मार्च २०११ १०:३५ अपराह्न को, Hariraam <hari...@gmail.com> ने लिखा:

prashant dhyani

unread,
Mar 23, 2011, 2:45:23 PM3/23/11
to hindian...@googlegroups.com
अगर आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में टाइप करते हों तो प्रश्नचिह्न का मैक्रो रिकार्ड कर कोई भी शॉर्टकट कुंजी एसाइन कर सकते हैं। मैने प्रश्नचिह्न (?) के लिए Alt+shift+? कुंजी तथा (/)  चिह्न के लिए Alt + / कुंजी का युग्म एसाइन किया है।  

प्रशान्त ध्यानी
रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन
देहरादून




2011/3/22 Dr Rajeev kumar Rawat <dr.raje...@gmail.com>

prashant dhyani

unread,
Mar 23, 2011, 2:51:31 PM3/23/11
to hindian...@googlegroups.com
मैं भी एरियल यूनिकोड एम एस फोंट का ही प्रयोग करता हूँ और यह यूनिकोड में देवनागरी का सबसे अच्छा फोंट है। इसमें अक्षरों की बनावट अत्यंत सुंदर है साथ ही अंग्रेजी के सभी फोंट से भी अच्छी तरह मैच करता है। हालांकि इसमें भी कुछ सुधार की आवश्यकता है।   

प्रशान्त ध्यानी



2011/3/23 Arvind Kumar <samant...@gmail.com>

Ravishankar Shrivastava

unread,
Mar 24, 2011, 12:53:14 AM3/24/11
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)

On Mar 23, 10:22 am, "Arvind Kumar" <samantark...@gmail.com> wrote:
> मुझे एरियल यूनिकोड ऐमऐस Arial Unicode MS है... इस मेँ देवनागरी के सभी गुण मौजूद हैँ और वैब पर इसे प्रश्रय दिया जाना चाहिए...
>
> रविजी, इसे इस्तेमाल कर के देखिए... अपनी आगामी कुछ पोस्ट इस मॆं अपलोड कीजिए. हमारे आगामी दो कोश The Penguin Language Explorer (Hindi-English) और (English-Hindi) इसी फ़ौंट में टाइपसैट किए गए हैं. हमारी आगामी वैबसाइट arvindlexicon.com पर मेरा गीता का और फ़ाउस्ट का अनुवाद इसी कोड मॆं है.
>

जी यह है तो अच्छा, परंतु चूंकि इसमें विश्व की लगभग तमाम भाषाओं के
फ़ॉन्टों को सम्मिलित किया गया है, अतः इसका आकार 22731 किलोबाइट है.
जबकि सामान्य मंगल फ़ॉन्ट 389 किलोबाइट का है. आकार बड़ा होने से यह [कम
क्षमता वाले] कंप्यूटिंग को धीमा कर सकता है.

हालांकि यूनिकोड हिंदी में बनाई गई सामग्री उपयोक्ता के कंप्यूटर पर
उपलब्ध यूनिकोड हिंदी फ़ॉन्ट पर ज्यादा निर्भर करती है. उदाहरण के लिए,
जब मैं लिनक्स का प्रयोग करता हूँ, तो चूंकि वहाँ न तो यूनिकोड एरियल
होता है न ही मंगल, बल्कि लोहित फ़ॉन्ट होता है तो तमाम यूनिकोड हिन्दी
सामग्री मुझे लोहित फ़ॉन्ट में ही दिखती है. और, यही है यूनिकोड की खूबी.
फ़ॉन्ट कोई भी प्रयोग किया गया हो, सब में दिखेगा. बशर्तें कोई भी एक
हिन्दी यूनिकोड फ़ॉन्ट सिस्टम में इंस्टाल हो.
सादर,
रवि

Arvind Kumar

unread,
Mar 24, 2011, 1:49:54 AM3/24/11
to hindian...@googlegroups.com, hindi-...@googlegroups.com
रविजी

मुझे यही इस फ़ौंट की ख़ूबी नज़र आती है... इस में सभी भारतीय लिपियाँ और यूरोपीय, अरब, चीनी आदि लिपियाँ समाई हैँ. अतः अंततोगत्वा यह वैब पर स्टैंडर्ड या मानक या सर्वप्रचलित फ़ौंट होने में सक्षम है. औरोँ का तो पता नहीँ पर यह मेरे सिस्टम पर पहले से ही इंस्टाल था... वर्ड 2003 मेँ भी और अब वर्ड 2007 में भी. यह बात टाइम्स न्यू रोमन आदि के पक्ष मेँ भी नहीँ कही जा सकती...

यह केवल मेरा प्रस्ताव है--विशेषकर मंगल फ़ौंट को ले कर उठाई गई समस्या के बारे में. हाँ मंगल में इंग्लिश तो है लेकिन अन्य लिपियाँ नहीँ है. अतः अखिल भारतीय स्तर पर भी यह अधिक काम नहीँ आ सकेगा.

और अगर हमें किसी कोश मेँ हिंदी और इंग्लिश के अलावा अन्य भारतीय भाषाएँ डालनी होँ, जैसे मलयालम, तमिल, या फिर गुजराती तो यह फ़ौंट बेकार हो जाता है. तब एरियल उपयोगी होगा.


अरविंद

-----Original Message-----
From: hindian...@googlegroups.com [mailto:hindian...@googlegroups.com] On Behalf Of Ravishankar Shrivastava
Sent: 24 March 2011 10:23
To: हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)

Hariraam

unread,
Mar 25, 2011, 3:11:22 AM3/25/11
to hindian...@googlegroups.com
Windows 2007 के मंगल फोंट का वर्सन है -- 5.90 इसका मूल उद्देश्य की कम्प्यूटर की आन्तरिक प्रोसेसिंग के डायलोग, मीनू कमांड आदि के हिन्दी वर्णों को सही रीति डिस्प्ले करना है।

यदि आपको पारम्परिक रूप में rendering चाहिए तो CDAC के OT fonts का प्रयोग करें। ildc.in पर उपलब्ध हैं।

-- हरिराम



On 23-03-2011 12:44, ePandit | ई-पण्डित wrote:
हरिराम जी कुछ संयुक्ताक्षर तो अलग रुप में भी ठीक लगते हैं जैसे श्‍व (श्व), द्‍ध (द्ध) लेकिन सभी सही नहीं लगते जैसे द्य एक अलग वर्ण है लेकिन दुर्भाग्यवश इसे द्‍य के रुप में असुन्दर ढ़ंग से लिखने को मान्यता मिल गयी है।

कुछ संयुक्ताक्षरों में तो अलग दिखाना सही है जैसे ह्म, द्म आदि क्योंकि नये लोगों को इन्हें समझने में कठिनायी होती है लेकिन द्य जैसे आसानी से समझ आने वाले संयुक्त वर्ण को अलग दिखाना बेकार है। सरलता के चक्कर में समझौते की कुछ सीमा होनी चाहिये कल को लोग बाग त्र को भी त्‍र तथा श्र को श्‍र लिखने लगें तो देवनागरी लिपि की सारी सुन्दरता ही नष्ट हो जायेगी।

मैंने पहले भी कहा है कि किसी लोकप्रिय, मानक या किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के डिफॉल्ट फॉण्ट के दो रुप होने चाहिये एक तो जो संयुक्ताक्षरों को पारम्परिक रुप में दर्शाये दूसरा जो आधुनिक सरल रुप में। साथ ही ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रयोक्ता को सुविधा हो कि वह अपना पसन्दीदा फॉण्ट डिफॉल्ट रुप में सैट कर सके। लिनक्स में शायद ऐसा हो सकता है परन्तु विण्डोज़ में नहीं (मैं पूरे ऑपरेटिंग सिस्टम की बात कर रहा हूँ केवल ब्राउजर की नहीं)। 

२२ मार्च २०११ १०:३५ अपराह्न को, Hariraam <hari...@gmail.com> ने लिखा:
आधुनिक हिन्दी (देवनागरी) में संयुक्ताक्षरों के प्रयोग को कम से कम करने का प्रयास किया गया है। क्योंकि संयुक्ताक्षरों का विकास कागज पर कलम से शीघ्र लिखने के प्रयास में कालक्रम में होता गया। संयुक्ताक्षरों के अधिक प्रयोग से कई हिन्दीतर भाषी लोग दुविधा का शिकार होकर गलत प्रयोग करने लगते हैं। यथा - द्वारा को लोग व्दारा लिखने लगे हैं। सिद्ध को सिध्द लिखने लगे हैं। द्घ - उद्घाटन और उद्धार दोनों में वे कोई अन्तर समझ नहीं पाते। त्र को त्न समझने लगते हैं।

अतः विण्डोज 7 में यथासंभव मौलिक रूप में रेण्डरिंग की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। क्योंकि कम्प्यूटर में टंकण तो द+हलन्त+ध = द्ध होता है। अतः हलन्त युक्त मूल रूप में संयुक्ताक्षरों के प्रकटीकरण पर जोर डाला गया है।

--- हरिराम



On 22-03-2011 10:57, Dr Rajeev kumar Rawat wrote:
माननीय मित्रो,

1. विंडोज एक्सपी में यूनीकोड सक्रिय करने पर प्रौद्योगिकी आता है तथा विंडोज 7 में
प्रौद् योगिकी आता है ( द् एवं यो के मध्य अंतराल नहीं है , मैंने अंतर स्पष्ट करने के लिए दिया है ) ।
इस प्रकार बने दोनों ही संयुक्ताक्षर क्या सही हैं ।

2. देवनागरी इनस्क्रिपट कुंजी पटल पर प्रश्न चिह्न आदि कैसे लाए जाएं। अभी तक तो मैं alt+shift से तुरंत En में जाके ही लगाता रहा  हूँ या अधिकतर छोड़ भी बैठता हूँ । एक बार हरिराम जी ने बताया था किंतु वह  होता नहीं ।

सादर
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डॉ. राजीव कुमार रावत  Dr. R. K. Rawat
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