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On Mar 22, 10:27 am, Dr Rajeev kumar Rawat <dr.rajeev.ra...@gmail.com>
wrote:
> माननीय मित्रो,
>
> 1. विंडोज एक्सपी में यूनीकोड सक्रिय करने पर प्रौद्योगिकी आता है तथा विंडोज 7
> में
> प्रौद् योगिकी आता है ( द् एवं यो के मध्य अंतराल नहीं है , मैंने अंतर स्पष्ट
> करने के लिए दिया है ) ।
ऐसा मंगल फ़ॉन्ट के विंडोज 7 के साथ आए संस्करण में बग की वजह से है.
उम्मीद है कि अगले संस्करण में इसे ठीक कर लिया जाएगा. आप चाहें तो इस
समस्या से छुटकारा पाने के लिए विंडोज 7 के साथ आए हिंदी के दूसरे
यूनिकोड फ़ॉन्ट कोकिला या उत्साह का भी प्रयोग कर सकते हैं, जिसमें ये
समस्या नहीं है.
सादर,
रवि
On Mar 22, 10:27 am, Dr Rajeev kumar Rawat <dr.rajeev.ra...@gmail.com>
wrote:
> dr.rajeevra...@yahoo.co.in , rkra...@hijli.iitkgp.ernet.in
On Mar 22, 1:19 pm, Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com> wrote:
> रावतजी, संकेत चिह्नों को अभी तक यूनीकोड में किसी कुंजी पर स्थापित नहीं किया
> गया है.
> यदि आप आल्ट+शिफ्ट का प्रयोग न करना चाहें तो आल्ट कोड की सूची डाउनलोड कर
> मुख्य
> मुख्य कोड याद करलें और आल्ट दबाकर वह सांख्यिक कोड दबाएँ जैसे प्रश्नवाचक के
> लिए
> आल्ट+063. हम सभी इन जुगाड़ों से ही काम चला रहे हैं.
>
> 2011/3/21 Dr Rajeev kumar Rawat <dr.rajeev.ra...@gmail.com>
>
>
>
>
>
>
>
>
>
> > माननीय मित्रो,
>
> > 1. विंडोज एक्सपी में यूनीकोड सक्रिय करने पर प्रौद्योगिकी आता है तथा विंडोज
> > 7 में
> > प्रौद् योगिकी आता है ( द् एवं यो के मध्य अंतराल नहीं है , मैंने अंतर स्पष्ट
> > करने के लिए दिया है ) ।
> > इस प्रकार बने दोनों ही संयुक्ताक्षर क्या सही हैं ।
>
> > 2. देवनागरी इनस्क्रिपट कुंजी पटल पर प्रश्न चिह्न आदि कैसे लाए जाएं। अभी तक
> > तो मैं alt+shift से तुरंत En में जाके ही लगाता रहा हूँ या अधिकतर छोड़ भी
> > बैठता हूँ । एक बार हरिराम जी ने बताया था किंतु वह होता नहीं ।
>
> > सादर
> > --
> > डॉ. राजीव कुमार रावत Dr. R. K. Rawat
> > हिन्दी अधिकारी Hindi Officer
> > राजभाषा विभाग Rajbhasha Vibhag
> > भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर 721302
> > Indian Institute of Technology Khargpur
> > 09564156315,09614887714,09641049944,08653807663
> > off/fax- 03222 281718,res- 03222 281865
> > dr.rajeevra...@yahoo.co.in , rkra...@hijli.iitkgp.ernet.in
>
> > --
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जी यह है तो अच्छा, परंतु चूंकि इसमें विश्व की लगभग तमाम भाषाओं के
फ़ॉन्टों को सम्मिलित किया गया है, अतः इसका आकार 22731 किलोबाइट है.
जबकि सामान्य मंगल फ़ॉन्ट 389 किलोबाइट का है. आकार बड़ा होने से यह [कम
क्षमता वाले] कंप्यूटिंग को धीमा कर सकता है.
हालांकि यूनिकोड हिंदी में बनाई गई सामग्री उपयोक्ता के कंप्यूटर पर
उपलब्ध यूनिकोड हिंदी फ़ॉन्ट पर ज्यादा निर्भर करती है. उदाहरण के लिए,
जब मैं लिनक्स का प्रयोग करता हूँ, तो चूंकि वहाँ न तो यूनिकोड एरियल
होता है न ही मंगल, बल्कि लोहित फ़ॉन्ट होता है तो तमाम यूनिकोड हिन्दी
सामग्री मुझे लोहित फ़ॉन्ट में ही दिखती है. और, यही है यूनिकोड की खूबी.
फ़ॉन्ट कोई भी प्रयोग किया गया हो, सब में दिखेगा. बशर्तें कोई भी एक
हिन्दी यूनिकोड फ़ॉन्ट सिस्टम में इंस्टाल हो.
सादर,
रवि
हरिराम जी कुछ संयुक्ताक्षर तो अलग रुप में भी ठीक लगते हैं जैसे श्व (श्व), द्ध (द्ध) लेकिन सभी सही नहीं लगते जैसे द्य एक अलग वर्ण है लेकिन दुर्भाग्यवश इसे द्य के रुप में असुन्दर ढ़ंग से लिखने को मान्यता मिल गयी है।
कुछ संयुक्ताक्षरों में तो अलग दिखाना सही है जैसे ह्म, द्म आदि क्योंकि नये लोगों को इन्हें समझने में कठिनायी होती है लेकिन द्य जैसे आसानी से समझ आने वाले संयुक्त वर्ण को अलग दिखाना बेकार है। सरलता के चक्कर में समझौते की कुछ सीमा होनी चाहिये कल को लोग बाग त्र को भी त्र तथा श्र को श्र लिखने लगें तो देवनागरी लिपि की सारी सुन्दरता ही नष्ट हो जायेगी।
मैंने पहले भी कहा है कि किसी लोकप्रिय, मानक या किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के डिफॉल्ट फॉण्ट के दो रुप होने चाहिये एक तो जो संयुक्ताक्षरों को पारम्परिक रुप में दर्शाये दूसरा जो आधुनिक सरल रुप में। साथ ही ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रयोक्ता को सुविधा हो कि वह अपना पसन्दीदा फॉण्ट डिफॉल्ट रुप में सैट कर सके। लिनक्स में शायद ऐसा हो सकता है परन्तु विण्डोज़ में नहीं (मैं पूरे ऑपरेटिंग सिस्टम की बात कर रहा हूँ केवल ब्राउजर की नहीं)।
२२ मार्च २०११ १०:३५ अपराह्न को, Hariraam <hari...@gmail.com> ने लिखा:
आधुनिक हिन्दी (देवनागरी) में संयुक्ताक्षरों के प्रयोग को कम से कम करने का प्रयास किया गया है। क्योंकि संयुक्ताक्षरों का विकास कागज पर कलम से शीघ्र लिखने के प्रयास में कालक्रम में होता गया। संयुक्ताक्षरों के अधिक प्रयोग से कई हिन्दीतर भाषी लोग दुविधा का शिकार होकर गलत प्रयोग करने लगते हैं। यथा - द्वारा को लोग व्दारा लिखने लगे हैं। सिद्ध को सिध्द लिखने लगे हैं। द्घ - उद्घाटन और उद्धार दोनों में वे कोई अन्तर समझ नहीं पाते। त्र को त्न समझने लगते हैं।
अतः विण्डोज 7 में यथासंभव मौलिक रूप में रेण्डरिंग की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। क्योंकि कम्प्यूटर में टंकण तो द+हलन्त+ध = द्ध होता है। अतः हलन्त युक्त मूल रूप में संयुक्ताक्षरों के प्रकटीकरण पर जोर डाला गया है।
--- हरिराम
On 22-03-2011 10:57, Dr Rajeev kumar Rawat wrote:माननीय मित्रो,
1. विंडोज एक्सपी में यूनीकोड सक्रिय करने पर प्रौद्योगिकी आता है तथा विंडोज 7 मेंप्रौद् योगिकी आता है ( द् एवं यो के मध्य अंतराल नहीं है , मैंने अंतर स्पष्ट करने के लिए दिया है ) ।इस प्रकार बने दोनों ही संयुक्ताक्षर क्या सही हैं ।
2. देवनागरी इनस्क्रिपट कुंजी पटल पर प्रश्न चिह्न आदि कैसे लाए जाएं। अभी तक तो मैं alt+shift से तुरंत En में जाके ही लगाता रहा हूँ या अधिकतर छोड़ भी बैठता हूँ । एक बार हरिराम जी ने बताया था किंतु वह होता नहीं ।
सादर--
डॉ. राजीव कुमार रावत Dr. R. K. Rawat