आपने बहुत महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा छेड़ी है। हिंदी अनुवाद के संदर्भ में अंग्रेज़ी के आतंक पर उतनी चर्चा नहीं हो पाती है जितनी होनी चाहिए।
कुछ उदाहरण ऐसे भी हैं जिनमें अंग्रेज़ी से हिंदी में आए शब्द अधिक उपयुक्त होते हैं। उदाहरण के लिए, मैं 'फ़ॉर्म' को 'प्रपत्र' लिखने की सलाह नहीं दूँगा। बहुत-से लोग 'प्रपत्र' का मतलब नहीं जानते हैं।
पारिभाषिक शब्दावली के संदर्भ में हिंदी जिस जटिल स्थिति में है उसे समझने की कोशिश करते हुए हमें अनुवाद में संतुलन स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए। तकनीक के साथ भाषा में परिवर्तन की स्वाभाविक प्रक्रिया के विपरीत हमारे देश में तकनीक के बदल जाने के बाद हिंदी में संस्थागत स्तर पर परिवर्तन लाने की कोशिश की जाती है। इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी समस्या यह है कि विद्वान जब तक किसी शब्द का समानार्थी चुनते हैं तब तक उसका आसान पर्याय प्रचलित हो जाता है। अनुवाद पर आश्रित शब्दावली की सीमित स्वीकार्यता को देखते हुए संस्था के स्तर पर पर्याय चुनने की प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाने की कोशिश का महत्व बढ़ जाता है।
हम आम पाठक के लिए उन शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं जिनका प्रयोग सरकारी अनुवाद में होता है।
स्रोत भाषा के व्याकरण, वर्तनी आदि को लक्ष्य भाषा पर लादने की कोशिश का विरोध होना चाहिए। हिंदी में ऐसे अनेक अनुवादक हैं जो व्याकरण, वर्तनी आदि के सामान्य नियमों को नकार देते हैं। बहुत-से लोग केवल कंप्यूटर, सॉफ़्टवेयर आदि की जानकारी के बल पर अनुवादक बन गए हैं।
सादर,
सुयश