हिंदी अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ

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Vinod Sharma

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Oct 29, 2011, 7:08:40 AM10/29/11
to hindian...@googlegroups.com
बंधुगण, सादर नमस्कार.
एक चर्चा आरंभ करना चाहता हूँ आशा है कि विद्वद्जनों और संतजनों का सक्रिय सहयोग मिलेगा.
यह तो सभी स्वीकार करेंगे कि वैश्वीकरण और आधुनिक विधा ‘लोकलाइजेशन’ के कारण अनुवादक
स्वतंत्र न रह कर बंधक हो गया है। पाशचात्य भाषाओं और पूर्वी भाषाओं में कुछ भी समान नहीं है।
लोकलाइजेशन की माँग के कारण लक्ष्य भाषा को भी स्रोत भाषा के मानकों के अनुसार ढाला जाता है।
इसके लिए स्रोत भाषा के हर शब्द के लिए लक्ष्य भाषा में एक शब्द में ही पारिभाषिक शब्द खोजना
होता है। इसीलिए इस मंच पर शब्द सहायता के अनुरोध अक्सर प्राप्त होते हैं और सभी सदस्यों द्वारा
उदारता से सहायता दी भी जाती है। कई बार एक शब्द में समानार्थी पारिभाषिक शब्द नहीं मिल पाता
तो नए शब्द गढ़े भी जाते हैं.
क्या हम अनुवादकों को सीमाओं में बांधने की वर्तमान प्रवृत्ति का प्रतिकार नहीं कर सकते?
यदि हमारे दो या तीन शब्द विदेशी भाषा के एक शब्द को बखूबी व्यक्त कर सकते हैं तो फिर
एक शब्द में ही समानार्थी शब्द लिखने का दुराग्रह स्वीकार करने की विवशता से अनुवादक
को क्या मुक्ति नहीं मिल सकती? हो सकता है मैं अपनी बात को पूरी तरह अभिव्यक्त न कर
पाया हूँ, लेकिन विद्व्द्जन मेरे आशय को समझ कर इस विषय पर अनुवादक समूह के सदस्यों
को अवश्य लाभान्वित करेंगे।
सादर,
विनोद शर्मा

Dr. Durgaprasad Agrawal

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Oct 29, 2011, 9:33:38 AM10/29/11
to hindian...@googlegroups.com
भाई विनोद शर्मा जी ने बहुत ही उपयुक्त प्रश्न सामने रखा है. लेकिन बात और भी अधिक स्पष्ट हो जाती, अगर वे दो-एक उदाहरण सामने रख देते. अब भी रख दें, तो कोई हर्ज़ नहीं है. 

दुर्गाप्रसाद अग्रवाल  

२९ अक्तूबर २०११ ४:३८ अपराह्न को, Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com> ने लिखा:

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abhishek singhal

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Oct 29, 2011, 9:54:51 AM10/29/11
to hindian...@googlegroups.com
दरअसल आप जो बात कह रहे हैं वह अक्सर सामने आती है,,पर मुझे लगता है कि हमें तो जो अनुवाद वास्तव में सहज भावाभिव्यक्ति करे वही करना चाहिए,,, पर हां इससे अनुवादित डॉक्यूमेंट की लम्बाई ज्यादा नहीं बढ़े यह अवश्य ध्यान रखने वाली बात होती है,, कई बार ऐसा करने में लम्बा अनुवाद हो जाता है ,
सादर


2011/10/29 Dr. Durgaprasad Agrawal <dpagr...@gmail.com>



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abhishek singhal
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Narendra Kumar Tomar

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Oct 29, 2011, 9:58:01 AM10/29/11
to hindian...@googlegroups.com
प्रिय विनोद जी,
अनुवाद करते समय किसी दूसरी, खास तौर पर विदेशी भाषा के किसी शब्‍द विशेष के स्‍थान पर, मेरी समझ में तो यह बिल्‍कुल भी जरूरी नहीं हैं कि उसकी जगह हिंदी के भी एक ही समानार्थी शब्‍द का प्रयोग किया जाए( और यह हमेशा संभव भी नहीं है)) । आखिर प्रत्‍येक भाषा की अपनी प्रकति होती है और हर शब्‍द का अपना एक इतिहास होता है। अंग्रेजी या किसी अन्‍य  विदेशी भाषा में ही नहीं अनेक भारतीय भाषाओं में भी ऐसे अनगिनत शब्‍द हैं जिनके पर हिंदी के एक समानार्थी का प्रयोग करना संभव नहीं है। अत: इस मामलें में कोई अनुवादक मेरे अनुसार तो कतई विवश नहीं। अर्थ को स्‍पष्‍ट करने के लिए वह कई शब्‍दों का ही नहीं , जरूरत पडने पर पूरे वाक्‍य का भी इस्‍तेमाल कर सकता है। 


From: Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>
To: hindian...@googlegroups.com
Sent: Saturday, 29 October 2011 4:38 PM
Subject: {हिंदी अनुवादक} हिंदी अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ

Vinod Sharma

unread,
Oct 29, 2011, 10:04:08 AM10/29/11
to hindian...@googlegroups.com
दुर्गाप्रसादजी, यहाँ प्रश्न किसी एक शब्द या दो-चार शब्दों का नहीं है। हमारे बीच
इतने विद्वान मौजूद हैं कि एकल पारिभाषिक शब्द प्रायः मिल ही जाता है लेकिन
वह शब्द आम लोगों के लिए या तो दुरूह होता है या नया। क्लायंट की माँग होती है 
कि अनुवाद की भाषा आम आदमी के समझ में आने वाली होनी चाहिए। अब दो 
विरोधाभासी बंधन हमारे सामने होते हैं। एक तरफ शब्दों की सीमा तो दूसरी तरफ 
उनका आम प्रचलन में होना। इसी गुत्थी पर गुणीजनों के विचार आमंत्रित किए हैं।
सादर,
विनोद शर्मा

2011/10/29 Dr. Durgaprasad Agrawal <dpagr...@gmail.com>
भाई विनोद शर्मा जी ने बहुत ही उपयुक्त प्रश्न सामने रखा है. लेकिन बात और भी अधिक स्पष्ट हो जाती, अगर वे दो-एक उदाहरण सामने रख देते. अब भी रख दें, तो कोई हर्ज़ नहीं है. 

Vinod Sharma

unread,
Oct 29, 2011, 10:09:38 AM10/29/11
to hindian...@googlegroups.com
नरेंद्रजी मैंने एक विशेष परिप्रेक्ष्य, स्थानीकरण (लोकलाइजेशन) के संबंध में इस समस्या को उठाया है, जहाँ अक्सर इस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है।

2011/10/29 Narendra Kumar Tomar <nak...@yahoo.com>

सुयश सुप्रभ

unread,
Nov 5, 2011, 9:01:15 AM11/5/11
to hindian...@googlegroups.com
विनोद जी,

आपने बहुत महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा छेड़ी है। हिंदी अनुवाद के संदर्भ में अंग्रेज़ी के आतंक पर उतनी चर्चा नहीं हो पाती है जितनी होनी चाहिए। 

कुछ उदाहरण ऐसे भी हैं जिनमें अंग्रेज़ी से हिंदी में आए शब्द अधिक उपयुक्‍त होते हैं। उदाहरण के लिए, मैं 'फ़ॉर्म' को 'प्रपत्र' लिखने की सलाह नहीं दूँगा। बहुत-से लोग 'प्रपत्र' का मतलब नहीं जानते हैं। 

पारिभाषिक शब्दावली के संदर्भ में हिंदी जिस जटिल स्थिति में है उसे समझने की कोशिश करते हुए हमें अनुवाद में संतुलन स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए। तकनीक के साथ भाषा में परिवर्तन की स्वाभाविक प्रक्रिया के विपरीत हमारे देश में तकनीक के बदल जाने के बाद हिंदी में संस्थागत स्तर पर परिवर्तन लाने की कोशिश की जाती है। इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी समस्या यह है कि विद्वान जब तक किसी शब्द का समानार्थी चुनते हैं तब तक उसका आसान पर्याय प्रचलित हो जाता है। अनुवाद पर आश्रित शब्दावली की सीमित स्वीकार्यता को देखते हुए संस्था के स्तर पर पर्याय चुनने की प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाने की कोशिश का महत्व बढ़ जाता है। 

हम आम पाठक के लिए उन शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं जिनका प्रयोग सरकारी अनुवाद में होता है। 

स्रोत भाषा के व्याकरण, वर्तनी आदि को लक्ष्य भाषा पर लादने की कोशिश का विरोध होना चाहिए। हिंदी में ऐसे अनेक अनुवादक हैं जो व्याकरण, वर्तनी आदि के सामान्य नियमों को नकार देते हैं। बहुत-से लोग केवल कंप्यूटर, सॉफ़्टवेयर आदि की जानकारी के बल पर अनुवादक बन गए हैं। 

सादर,

सुयश

abhishek singhal

unread,
Nov 5, 2011, 10:04:28 AM11/5/11
to hindian...@googlegroups.com
सुयश जी,
आपकी बात काफी हद सही है कि हमें अनुवाद के दौरान उसे क्लिष्ट होने से बचाना चाहिए परन्तु जहां पर सहज समानार्थी शब्द मौजूद है तो उसका प्रयोग अवश्य किया जाना चाहिए। मैं रेल के स्थान पर लौहपथगामिनी जैसे प्रयोगों के सख्त खिलाफ हूं पर वहीं मेरी राय में फ़ॉर्म को प्रपत्र या प्रारूप ही लिखा जाना चाहिए,,,
हम यहां सभी लोग मिल कर किसी वेब पते पर विकीपीडिया की तर्ज पर मानक पारिभाषिक शब्दों का संग्रहण कर सकते हैं,, । इसमें वरिष्ठ लोग उस पर मोहर लगाएं.. इस समूह के सदस्य दस शब्द प्रतिदिन के लिहाज से उसे समृद्ध बनाएं,,,। यह कार्य सुयश जी की ओर से पहले से स्थापित वेब पते पर भी हो सकता है।
सादर।

2011/11/5 सुयश सुप्रभ <translate...@gmail.com>

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abhishek singhal
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Suyash Suprabh (सुयश सुप्रभ)

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Nov 5, 2011, 11:29:54 AM11/5/11
to hindian...@googlegroups.com
अभिषेक जी,

चिकित्सा से संबंधित सहमति फ़ॉर्म के अनुवाद के संदर्भ में कुछ क्लाइंटों ने मुझे यह जानकारी दी कि बहुत-से मरीज 'प्रपत्र' का अर्थ नहीं जानते हैं। अगर मरीजों को 'प्रपत्र' का अर्थ जानने के लिए शब्दकोश देखना पड़े तो इससे अनुवाद का लक्ष्य पूरा नहीं होगा।

हिंदी माध्यम के छात्रों को 'प्रपत्र' जैसा शब्द शायद आसान लग सकता है। यह मैं अपनी पीढ़ी के छात्रों के अकादमिक स्तर को ध्यान में रखते हुए कह रहा हूँ। वर्तमान पीढ़ी को 'प्रपत्र' जैसा शब्द आसान लगता है या नहीं, इस विषय पर मैं अन्य सदस्यों की राय जानना चाहूँगा। 

सादर,

सुयश          

५ नवम्बर २०११ ७:३४ अपराह्न को, abhishek singhal <abhi19...@gmail.com> ने लिखा:

abhishek singhal

unread,
Nov 5, 2011, 11:58:31 AM11/5/11
to hindian...@googlegroups.com
may be you are right,,,


2011/11/5 Suyash Suprabh (सुयश सुप्रभ) <translate...@gmail.com>

kartik Saini

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Nov 7, 2011, 9:45:36 AM11/7/11
to hindian...@googlegroups.com
यदि अस्पताल सरकारी है तो फार्म द्विभाषी बनाया जायेगा इसलिए इस पर प्रपत्र लिखा जाये तो कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए ग्राहक / क्लायंट को. यदि कोई निजी अस्पताल है तो फार्म लिखना ही उचित रहेगा क्योंकि आम आदमी फार्म को आसानी से समझता है.

2011/11/5 abhishek singhal <abhi19...@gmail.com>

Vinod Sharma

unread,
Nov 7, 2011, 10:05:53 AM11/7/11
to hindian...@googlegroups.com
कार्तिकजी,
इस चर्चा को आरंभ करने का मेरा प्रयोजन सॉफ़्टवेयर और वेबसाइट के अनुवाद में हिंदी भाषा के प्रयोग में आ रही कठिनाइयों के संबंध में विद्वद्जनों के सुझाव/विचार आमंत्रित करने का था। वहाँ शब्दों की ही नहीं कैरेक्टरों की भी सीमा होती है। अतः मुक्त भाव से अनुवाद करना संभव नहीं हो पाता। स्रोत भाषा (अंग्रेजी) के शब्दों को उतनी ही लंबाई में हिंदी से प्रतिस्थापित करना होता है। इस दिशा में बंधुओं के सुझाव और विचार निश्चय ही बहुमूल्य साबित होंगे।
सादर,
विनोद शर्मा 

2011/11/7 kartik Saini <karti...@gmail.com>



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Best Regards,
Vinod Sharma
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