कृपया बताएं कि ’स्क्रीन’ पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग

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Rahul Kumar

unread,
Oct 11, 2016, 6:19:14 AM10/11/16
to hindian...@googlegroups.com
आदरणीय सदस्यों,

कृपया इस दुविधा को दूर करें कि स्क्रीन को पुल्लिंग माना जाए या स्त्रीलिंग?

सादर
राहुल कुमार
 

Dhananjay Chaube

unread,
Oct 11, 2016, 6:38:11 AM10/11/16
to hindian...@googlegroups.com
मेरी राय में स्त्रीलिंग

11 अक्तूबर 2016 को 3:49 pm को, Rahul Kumar <onlyrah...@gmail.com> ने लिखा:
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lalit sati

unread,
Oct 11, 2016, 7:18:18 AM10/11/16
to ha
स्त्रीलिंग ही अधिक प्रचलित है। काली स्क्रीन, टूटी हुई स्क्रीन, ब्लिंक करती स्क्रीन, आपकी स्क्रीन

2016-10-11 16:08 GMT+05:30 Dhananjay Chaube <anan...@gmail.com>:
मेरी राय में स्त्रीलिंग
11 अक्तूबर 2016 को 3:49 pm को, Rahul Kumar <onlyrah...@gmail.com> ने लिखा:
आदरणीय सदस्यों,

कृपया इस दुविधा को दूर करें कि स्क्रीन को पुल्लिंग माना जाए या स्त्रीलिंग?

सादर
राहुल कुमार
 

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Yogendra Joshi

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Oct 11, 2016, 7:40:28 AM10/11/16
to hindian...@googlegroups.com
पहले से प्रचलन में आये हुए शब्दों का लिंग तो स्थापित हो चुका होता है।
किंतु नये गढ़े गये शब्द या अन्य भाषा से प्राप्त शब्द (जैसे अंग्रेजी के स्क्रीन) का लिंग उच्चरण की सुविधा से कालांतर में स्थापित हो जाता है ऐसा मेरा मत है। लोगों के मुख से छोटी स्क्रीन, बड़ी स्क्रीन जैसे प्रयोग सुनने को मिलते हैं। छोटी-बड़ी का प्रयोग अधिक स्वाभाविक सा लगता है। अतः अब इसी के अनुसार उसका लिंग स्वीकारा जाये।
लोगों के मुख से मैंने खट्टी दही और खट्टा दही दोनों सुन रखे हैं। सही कौन-सा है?

11 अक्तूबर 2016 को 4:48 pm को, lalit sati <lalit...@gmail.com> ने लिखा:

Rahul Kumar

unread,
Oct 12, 2016, 2:30:44 AM10/12/16
to hindian...@googlegroups.com
दही तो खट्टा ही होना चाहिए. लेकिन स्क्रीन पर दुविधा दूर करने के लिए आप
सब का शुक्रिया.
>>>> लिए, hindianuvaada...@googlegroups.com को ईमेल भेजें.
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Narayan Prasad

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Oct 12, 2016, 2:41:08 AM10/12/16
to hindian...@googlegroups.com
> लोगों के मुख से मैंने खट्टी दही और खट्टा दही दोनों सुन रखे हैं। सही कौन-सा  है?

बचपन में ही मैंने पढ़ रखा था - "दही, पानी, मोती, जी, घी" - ये शब्द पुँल्लिंग होते हैं ।
--- नारायण प्रसाद


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Dr. Paritosh Malviya

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Oct 12, 2016, 5:21:48 AM10/12/16
to hindian...@googlegroups.com
खट्टी दही 


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--
Dr. Paritosh Malviya
Gwalior

हरिराम

unread,
Oct 13, 2016, 4:00:12 AM10/13/16
to hindian...@googlegroups.com
चुटकुला - लालू जी से पूछें तो कहेंगे -

स्क्रीन का कवर उठाकर स्वयं देख लीजिए ना...

हरिराम


 स्क्रीन,
उसका लिंग .

Kartik Saini

unread,
Oct 13, 2016, 6:35:50 AM10/13/16
to hindian...@googlegroups.com
राजस्थान व अन्य कई राज्यों में दही पुल्लिंग तो हरियाणा में स्त्रीलिंग  हैं। हिंदी के भले व विकास के नजरिये से हमें भाषा को अधिक से अधिक अलिंगी बनाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए शुरुआत बेजान चीजों के लिंग के प्रति आग्रह को छोड़कर किया जाए। अर्थात् दही खट्टा या खट्टी दोनों को स्वीकार्य माना जाए। ऐसा करने से हिंदी सबको स्वीकार्य रहेगी। इसी प्रकार मात्राओं के प्रयोग में भी राज्यवार अंतर है। एक राज्य में मंदीर है तो दूसरों में मंदिर। दोनों को स्वीकार्य करने से अर्थ में कोई फर्क नहीं आता।  

खट्टी दही 
--
Dr. Paritosh Malviya
Gwalior

हरिराम

unread,
Oct 18, 2016, 4:01:20 AM10/18/16
to hindian...@googlegroups.com
मैं कार्तिक जी का समर्थन करता हूँ।

क्योंकि--

1. अब तृतीय लिंग को भी कानूनी मान्यता मिल चुकी है। नपुंसक/उभयलिंगी समुदाय द्वारा कार्यालयों सार्वजनिक स्थलों में अपने लिए अलग शौचालयों की वाजिब मांग की जा रही है।

स्कूल में बच्चे शिक्षकों से पूछते हैं, राम खाता है, सीता खाती है, तो वह 'तृतीय लिंग' के लिए क्या शब्द होगा? 

कुछ उत्तर यों मिलते हैं, जैसे आजकल डैडी के लिए डैडु, जीजा के लिए जीजू, चाचा के लिए चाचू शब्द का प्रयोग चल रहा है, अतः तृतीय लिंग के लिए "वह खातु है" लिखा जाना चाहिए।
-- तो खाता/खाती/खाते के प्रयोग के साथ 'खातु' का विकल्प भी जोड़ना न पड़ेगा??????

निर्जीव पदार्थों के लिए भी हिंदी में पुलिंग/स्त्रीलिंग निर्धारण के नियम इस इंटरनेट के जमाने में स्वतः ही हटने जा रहे हैं। गाँवों में जिस सरल हिंदी का आम जनता (गँवार) जैसे प्रयोग करती है, वैसे ही प्रचलन अखबारों में, सोसिएल मीडिया में बढ़ता जा रहा है।

राम आम खात है, सीता आम खात है, वे सब आम खात है, माई आम खात है, भाई आम खात है, ..... ता/ती/ते/तु प्रत्ययों में सिर्फ को रखकर ा/ी/े/ु विलुप्त होने लगे हैं।

जैसे संस्कृत का जटिल व्याकरणिक नियमों के कारण प्रयोग कम होकर प्राकृत व अपभ्रंश का प्रयोग बढ़ चला था।
उसी प्रकार खड़ी बोली हिंदी का भी जटिल व अपवादों से भरे व्याकरणिक नियमों के कारण हिंदवी, हिंदुस्तानी, या ग्रामीण या गंवारु हिंदी का प्रयोग बढ़ने लगा है।

खड़ी बोली की शुद्ध समझी जानेवाली हिंदी शायद कुछ मुठ्ठीभर साहित्यकारों व पुस्तकालयों में धूल चाटती किताबों तक सीमित रह जाएगी। 

आज अखबार, सोसियल मीडिया आदि में जो हिंदी प्रसरित होती जा रही है, उसमें 'यदि वर्तनी' सुधारने बैठें तो हिंदी साहित्यकारों को उम्रभर का समय भी कम पड़ेगा।

चूँकि भाषा किसी कारखाने में नहीं बनाई जाती, भाषा में आए किसी विकार को भी विकास ही माना जाता है, भविष्य ही बताएगा कि हिंदी का किस रूप में आविर्भाव होगा?

 


हरिराम
प्रगत भारत <http://hariraama.blogspot.in>

Kartik Saini

unread,
Oct 19, 2016, 2:44:31 AM10/19/16
to hindian...@googlegroups.com
दही अच्छा है या अच्छी है की जगह हम 'दही बढ़िया है'  जैसे प्रयोग करके भी भाषा में जहां तक संभव हो लिंग निर्धारण से बच सकते हैं।  

Yogendra Joshi

unread,
Oct 19, 2016, 3:14:04 AM10/19/16
to hindian...@googlegroups.com
यदि यह माना जाये - जैसा कि आजकल अधिकांश जन मानने लगे हैं - कि भाषा का मकसद अपनी बात दूसरे तक पहुंचाना है ताकि वह मतलब या मन्तव्य समझ सके, तो न लिंग बहुत माने रखता है और न ही वर्तनी। वाक्य में बहुत कुछ त्रुटिपूर्ण हो या उसमें कुछ छूटा हो तो भी अर्थ निकाल ही लेते हैं लोग। तब क्या फ़र्क इन सब बातों का? ट्विटर में अंग्रेजी की वर्तनी कैसी होती है? लेकिन सब चलता है, किसी को पसंद हो या न हो! शुद्धता के पक्षधर अब ग़ायब होते जा रहे हैं।

19 अक्तूबर 2016 को 12:14 pm को, Kartik Saini <karti...@gmail.com> ने लिखा:

हरिराम

unread,
Oct 19, 2016, 7:09:27 AM10/19/16
to hindian...@googlegroups.com
जोशी जी, सही कहा है आपने...

अति शुद्धता के कारण ही संस्कृत का प्रयोग सीमित हो चला था, प्राकृत अपभ्रंश आदि का उपयोग बढ़ चला था... आज मंत्री से लेकर सन्तरी तक 'सरल हिंदी' की दुहाई देने लगे हैं, 'हिंदी' कैसी "सरल" होती जा रही है... बहती गंगा की तरह... पंडित, गँवार, पशु, पक्षी सब डुबकी लगा रहे हैं...

हरिराम
प्रगत भारत <http://hariraama.blogspot.in>

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