हिन्दी में दोहरे शब्दों का उपयोग
मंगला जी,
आपने बहुत रोचक प्रसंग छेड़ा है, अनुवादकों के लिए अत्यंत उपयोगी विषय भी है। प्रश्न करने के लिए आपने गहरी छान-बीन भी की है। ताज्जुब है कि किसी ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की । मैं उत्तर देना चाहता था, हिम्मत नहीं पड़ी, क्योंकि थोड़े लंबे उत्तर की अपेक्षा है और मुझसे ज़्यादा टंकण नहीं होता।
पुनरुक्त शब्दों के कई प्रकार्य हैं, संक्षेप में बताना चाहूँगा।
पुनरुक्ति द्रविड़ भाषाओं की विशेषता है, दो हिंदी में आ गई है। पुनरुक्ति का संस्कृत तथा अंग्रेज़ी आदि यूरोपीय भाषाओं में अभाव है। इसका पहला काम है बहुवचन सूचित करना। मलाय भाषा में शब्द दुहराकर बहुवचन शब्द बनाया जाता है जैसे दुकान-दुकान = दुकानें। हिंदी में यह व्यवस्था तो नहीं है, लेकिन निकट के प्रयोग हैं। बड़े-बड़े मकान (all the big houses), नयी-नयी गाड़ियाँ आदि।भीगी भीगी रातों, मीठी मीठी बातों, बार बार देखो, हज़ार बार देखो, दिल के टुकड़े टुकड़े करके मुस्कुरा के चल दिए आदि में बहुवचन का संदर्भ देख सकते हैं। हम साथ साथ हैं में दो लोगों के परस्पर साथ की बात है।पल पल दिल के पास का अर्थ है हर पल।
जहाँ वचन न हो, वहाँ मात्रा की अधिकता (ठण्डे ठण्डे पानी से नहाना, सूनी सूनी है ज़िन्दगी), कार्य की निरंतरता (और मैं पीछे पीछे, धीरे धीरे), निकटता (अभी अभी तो आई हो - समय की दृष्टि से यह अभी से अधिक निकट है।)
पुनरुक्त शब्दों की दूसरी प्रमुख विशेषता वाक्य संरचना से संबंधित है। इन सब क्रियाविशेषणों में हम कार्य की निरंतरता का आभास पा सकते हैं।
वह पढ़ते-पढ़ते सो गई। सुपरमार्केट से बासी फल खरीद खरीद कर। वह हमेशा खोया-खोया रहता है। इसी अर्थ में है खोया खोया चान्द।
ध्यान रखें कि गानों में एकाध जगह लय के कारण पुनरुक्ति का अनावश्यक या गलत प्रयोग भी हो सकता है।
जगन्नाथन