हिन्दी में तीसरे लिंग की व्यवस्था...

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Hariraam

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Jun 18, 2015, 8:31:04 AM6/18/15
to hindian...@googlegroups.com, technic...@googlegroups.com, HINDI-...@yahoogroups.com, Hindi...@yahoogroups.com
उच्चतम न्यायालय के आदेशों से तीसरे लिंग को मान्यता मिल चुकी है। विभिन्न सरकारी संस्थाओं, स्कूलों, कालेजों आदि में विभिन्न फार्मों में भी लिंग = पुरुष/स्त्री के अलावा तीसरे लिंग का कॉलम भी जोड़ा जा रहा है।

हिन्दी व्याकरण में नपुंसक लिंग neutral gender नहीं होता, उसके लिए क्या व्यवस्था की जा रही है या क्या व्यवस्था करनी होगी? 

वह पुरुष जाता है।
वह स्त्री जाती है।
वह हिजड़ा/हिजड़ी जात है? (क्या होना चाहिए?)

हिन्दी व्याकरण में निर्जीव वस्तुओं के लिए भी पुलिंग/स्त्रीलिंग का प्रयोग ही किया जाता रहा है। जिसके कारण हिन्दीतर भाषियों के द्वारा 'हिन्दी-भाषा' का मखौल उड़ाया जाता रहा है।
काका कालेलकर की कविता भी इस संबंध में प्रसिद्ध है। 
उदाहरण के लिए 
दाढ़ी-मूँछ पुरुषों के शरीर पर होती है, परन्तु स्त्रीलिंग मानी जाती है।
जूड़ा महिलाओं के शरीर पर होता है, परन्तु पुलिंग माना जाता है।
...

हिन्दी व्याकरण में तीसरे लिंग की व्यवस्था/सुधार करने के बारे में विद्वानों के विचार आमन्त्रित हैं...



हरिराम
प्रगत भारत <http://hariraama.blogspot.in>

डॉ एम एल गुप्ता (Dr. M.L. Gupta)

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Jun 19, 2015, 12:11:22 AM6/19/15
to hindian...@googlegroups.com
हरे राम !

18 जून 2015 को 6:01 pm को, Hariraam <hari...@gmail.com> ने लिखा:
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Suyash Suprabh (सुयश सुप्रभ)

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Jun 19, 2015, 4:41:26 AM6/19/15
to hindian...@googlegroups.com
हरिराम जी,

किन्नर को तीसरे लिंग की मान्यता मिली है, लेकिन इस तीसरे लिंग में भी अधिकतर मामलों में पुरुष और स्त्री का भेद व्यावहारिक रूप से बना रहता है। कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह है लेकिन भाषा में महिला किन्नर और पुरुष किन्नर जैसे शब्दों की प्रासंगिकता बनी हुई है।

महिला किन्नर के लिए स्त्रीलिंग का प्रयोग होगा और पुरुष किन्नर के लिए पुल्लिंग का। कुछ किन्नर ऐसे भी होते हैं जो न तो स्त्री कहलाना पसंद करते हैं न पुरुष। हिंदी में अज्ञात लिंग के लिए पुल्लिंग के प्रयोग की परंपरा रही है, इसलिए भविष्य में ऐसे किन्नरों के लिए भी शायद पुल्लिंग का प्रयोग होगा। हालाँकि इस संदर्भ में अभी अंतिम रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता।

स्वीडिश के आधिकारिक शब्दकोश में एक नया लिंग-निरपेक्ष सर्वनाम जोड़ा गया है। हिंदी जैसी विस्तृत भूभाग की भाषा में संस्थागत स्तर पर ऐसा परिवर्तन लाना संभव ही नहीं है।

सादर,

सुयश 







 

18 जून 2015 को 6:01 pm को, Hariraam <hari...@gmail.com> ने लिखा:
उच्चतम न्यायालय के आदेशों से तीसरे लिंग को मान्यता मिल चुकी है। विभिन्न सरकारी संस्थाओं, स्कूलों, कालेजों आदि में विभिन्न फार्मों में भी लिंग = पुरुष/स्त्री के अलावा तीसरे लिंग का कॉलम भी जोड़ा जा रहा है।

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