उच्चतम न्यायालय के आदेशों से तीसरे लिंग को मान्यता मिल चुकी है। विभिन्न सरकारी संस्थाओं, स्कूलों, कालेजों आदि में विभिन्न फार्मों में भी लिंग = पुरुष/स्त्री के अलावा तीसरे लिंग का कॉलम भी जोड़ा जा रहा है।
हिन्दी व्याकरण में नपुंसक लिंग neutral gender नहीं होता, उसके लिए क्या व्यवस्था की जा रही है या क्या व्यवस्था करनी होगी?
वह पुरुष जाता है।
वह स्त्री जाती है।
वह हिजड़ा/हिजड़ी जात है? (क्या होना चाहिए?)
हिन्दी व्याकरण में निर्जीव वस्तुओं के लिए भी पुलिंग/स्त्रीलिंग का प्रयोग ही किया जाता रहा है। जिसके कारण हिन्दीतर भाषियों के द्वारा 'हिन्दी-भाषा' का मखौल उड़ाया जाता रहा है।
काका कालेलकर की कविता भी इस संबंध में प्रसिद्ध है।
उदाहरण के लिए
दाढ़ी-मूँछ पुरुषों के शरीर पर होती है, परन्तु स्त्रीलिंग मानी जाती है।
जूड़ा महिलाओं के शरीर पर होता है, परन्तु पुलिंग माना जाता है।
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हिन्दी व्याकरण में तीसरे लिंग की व्यवस्था/सुधार करने के बारे में विद्वानों के विचार आमन्त्रित हैं...