नमस्कार,
जानकारी के लिए धन्यवाद मखीजाजी |
मैंने काफ़ी समय पहले एक लेख पढ़ा था कि रोमन से भिन्न अन्य लिपियों के प्रयोग की मुहिम चीन ने छेड़ीं है | देखें http://www.icann.org/en/announcements/idn-tld-cdnc.pdf | वस्तुतः चीन ने स्वतन्त्र रूप से आगे बढ़ना आरंभ कर दिया था | अकेले रोमन के पक्षधरों के लिए यह चिंता और असमंजस की बात थी | तब अंतरराष्ट्रीय संस्था Internet Corporation for Assigned Names and Numbers (ICANN - http://www.icann.org/en/general/background.htm) समस्या के समाधान में जुट गयी |
एक बात गौर करने योग्य है | चीन भाषाई गौरव में हमसे कहीं आगे है | वह देश पूरी ताकत और लगन से अपनी भाषा को न केवल प्रयोग में ले रहा है अपितु उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृण रूप से स्थापित कर रहा है | चीनी भाषा आज अमेरिका में सबसे अधिक सीखी जाने वाली विदेशी भाषा है |अपने देश की बात ही विचित्र है | यहां तो लोगों को हिंदी बोलने और देवनागरी लिखने से ही परहेज है | डोमेन नेम देवनागरी में लिखना संभव हो गया तो क्या हुआ ? लगाव किसे है | डोमेन नेम में `भारत' जुड़ भी जाये तो क्या, शेष कार्य तो अंग्रेजी में ही होने हैं |- योगेन्द्र जोशी
२८ अक्तूबर २००९ ५:५९ PM को, LOCHAN MAKHIJA <lochan....@gmail.com> ने लिखा:
नमस्कार,
आखिरकार, इंटरनेट पर सर्वभाषा उपयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित निर्णय लिया जा चुका है...
अभी तक यदि आपकी वैबसाइट भले ही हिन्दी या अन्य किसी भाषा में हो, उसका नाम / वैबसाइट डोमेन / वैबसाइट पता/एड्रेस हमें रोमन में ही रजिस्टर कराना पड़ता था...परन्तु अब इस मजबूरी से भी छुटकारा मिल गया है...अब यदि आपकी वैबसाइट हिन्दी में या अन्य किसी भी भाषा में हो, आप अपना वैबसाइट नाम / वैबसाइट पता भी हिन्दी/देवनागरी या अपनी किसी भी लिपि में उसका रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं...ईमेल पतों का सर्वभाषीकरण तो पहले ही हो गया था..अब वैबसाइट नाम / डोमेन नाम आदि का भी सर्वभाषीकरण हो गया है....डोमेन नाम .in का स्थान अब .भारत लेने वाला है..अब हम अपनी संस्थाओं / कार्यालयों / बैंकों का वैबसाइट पता देवनागरी में निर्धारित कर सकते हैं, जैसे - सिडबी.भारत, एसबीआई.भारत आदि ...ज्ञात हो कि इंटरनेट पर अंग्रेजी/रोमन/लैटिन के प्रभुत्व को समाप्त करने के लिए काफी लंबी बहसें, लंबे संघर्ष ही नहीं, गहन तकनीकी व्यवस्थाएं भी करनी पड़ी हैं...
यह मांग / प्रस्ताव औपचारिक रूप से लगभग वर्ष 2008 से लम्बित था... अनौपचारिक रूप से तो काफी पहले से मांग थी...