सही शब्द क्या...

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Hariraam

unread,
Aug 6, 2014, 3:22:21 AM8/6/14
to hindian...@googlegroups.com
कुछ विद्वानों का कहना है कि 'वृक्षारोपण' शब्द सही नहीं है, यह वृक्ष+आरोपण इंगित करता है।
सही 'वृक्षरोपण' होना चाहिए।
 
इस समूह के विद्वान् कृपया अपना मत बतायें।
हरिराम

lalit sati

unread,
Aug 6, 2014, 3:57:32 AM8/6/14
to ha
वृक्षारोपण तो शायद सही है! वृक्ष:रोपण से वृक्षारोपण बना है।


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Vinod Sharma

unread,
Aug 6, 2014, 3:58:07 AM8/6/14
to hindian...@googlegroups.com
हरिरामजी,
मैं भी इस बात से सहमत हूँ कि यह शब्द वृक्ष और रोपण की संधि से बना है।
आरोपण का अर्थ mounting होता है, रोपण का planting, plantation होता है।
अतः यह सही प्रतीत होता है कि वर्तनी वृक्षरोपण होना चाहिए, किंतु कई मामलों 
में संधि से संयुक्त शब्द बनने पर अकार आकार में बदल जाता है।
जैसे पट+ क्षेप     पटाक्षेप



2014-08-06 12:52 GMT+05:30 Hariraam <hari...@gmail.com>:

Gagan Manotra

unread,
Aug 6, 2014, 3:58:42 AM8/6/14
to hindian...@googlegroups.com
मेरे ख्याल से वृक्षारोपण और वृक्षरोपण दोनों ही शब्द गलत है। सही शब्द
पौधारोपण है क्योंकि वृक्ष कभी रोपे नहीं जाते हमेशा पौधे ही रोपे जाते
हैं।

Vinod Sharma

unread,
Aug 6, 2014, 4:06:38 AM8/6/14
to hindian...@googlegroups.com
नहीं नहीं, संस्कृत में भी वृक्षारोपण शब्द बहुत पुराने समय से है।
रोपण का अर्थ पौध लगाना ही होता है। तकनीकी एवं वैज्ञानिक शब्दावली आयोग के शब्दकोश
में रोपण का अर्थ planting , plantation दिया गया है। अतः वृक्षारोपण पर कोई संदेह नहीं है।
नया प्रश्न संधि के पश्चात अकार के आकार में परिवर्तन को लेकर है।
एक और उदाहरण है गति+रोध  से गत्यारोध बनता है, यहाँ भी आकार का प्रवेश हुआ है।


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lalit sati

unread,
Aug 6, 2014, 4:09:04 AM8/6/14
to ha
विनोद जी, 

यहाँ वृक्ष:रोपण से वृक्षारोपण बनने में विसर्ग के विलोप होने का मामला है।

जनसत्ता में प्रकाशित श्री विवेकानंद के एक लेख के इस अंश पर ग़ौर करिए -  

"हिंदी के ऐसे अनेक शब्द हैं, जिन्हें बोलने और लिखने में हमसे आमतौर पर गलती हो जाती है। मसलन, ‘नरक’, ‘पूर्वग्रह’, ‘अनधिकार’, ‘शृंगार’, ‘न्यायालय’, ‘व्यावसायिक’, ‘महत्त्वाकांक्षी’, ‘मुरदा’, ‘अरथी’, ‘दवाइयां’, ‘आशिष’ आदि। इन्हें आमतौर पर ‘पूर्वाग्रह’, अनाधिकार, श्रृंगार, न्यायलय, व्यवसायिक, महत्त्वकांक्षी, नर्क, मुर्दा, अर्थी, दवाईयां, आशीष लिखने की भूल हमसे हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि हम हर शब्द पर ‘ठहरकर’ सोचना नहीं चाहते कि व्याकरण-सम्मत रूप (मानक रूप) क्या हो सकता है! या इनकी उत्पत्ति कहां से हुई है! हम नहीं जानते (या नहीं जानना चाहते) कि हिंदी में संस्कृत से सीधे आए ‘विसर्ग’ (:) का विलोपन किस-किस रूप में होता है! याद दिला दूं कि विसर्ग आधा ‘र्’ या रेफ़ में ही नहीं, बल्कि (संधि होने पर) अकारांत या ‘अकार’ में, ओकारांत या ‘ओकार’ में, एकारांत या ‘एकार’ में, आधा ‘श्’ और आधा ‘स्’ में बदल जाता है। मसलन, अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्देशीय, वृक्षारोपण, विश्वामित्र, मनोरोग, दुश्चिंता, निस्संदेह आदि शब्द मूलत: ‘अंत:राष्ट्रीय’, ‘अंत:देशीय’, ‘वृक्ष:रोपण’, ‘विश्व:मित्र’, ‘मन:रोग’, ‘दु:चिंता’, ‘नि:संदेह’ से बने हैं।"



2014-08-06 13:28 GMT+05:30 Gagan Manotra <kaiserk...@gmail.com>:
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Suyash Suprabh (सुयश सुप्रभ)

unread,
Aug 6, 2014, 4:26:07 AM8/6/14
to hindian...@googlegroups.com
ललित जी,

विवेकानंद जी ने संस्कृत व्याकरण के आधार पर जिन शब्दों को अशुद्ध बताया है उनमें से कुछ शब्द न केवल हिंदी व्याकरण की किताबों बल्कि शब्दकोशों में भी शुद्ध माने जाते हैं। हिंदी में 'पूर्वाग्रह' और 'आशीष' दोनों प्रचलित हैं। जनसत्ता में 'पूर्वग्रह' का प्रयोग होता है, लेकिन अधिकांश पत्र-पत्रिकाओं में 'पूर्वाग्रह' ही लिखा जाता है। मुझे लगता है कि शुद्धता केवल व्याकरण के आधार पर तय नहीं की जा सकती है। किसी शब्द के प्रचलित रूप को सही मान लेने में कोई बुराई नहीं है। मैंने हिंदी में किसी को अपना नाम 'आशिष' लिखते नहीं देखा है। हो सकता है कि कुछ लोग ऐसा करते हों, लेकिन मैं अभी तक ऐसे लोगों के संपर्क में नहीं आया हूँ।

हिंदी में 'वृक्षारोपण' को भी सही शब्द माना जाना चाहिए।

सादर,

सुयश    


6 अगस्त 2014 को 1:39 pm को, lalit sati <lalit...@gmail.com> ने लिखा:

lalit sati

unread,
Aug 6, 2014, 4:29:36 AM8/6/14
to ha
सुयश जी आपकी बात से सहमत हूँ। लेकिन मुझे वृक्ष+आरोपण के बजाय वृक्ष:रोपण से वृक्षारोपण बनने का तर्क सही लगता है। उसी संदर्भ में इस अंश को यहाँ उद्धृत किया है।

Vijay K. Malhotra

unread,
Aug 6, 2014, 5:59:03 AM8/6/14
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)
कदाचित् मुखसुख की दृष्टि से यह प्रयोग चल पड़ा है.
विजय


2014-08-06 12:52 GMT+05:30 Hariraam <hari...@gmail.com>:
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विजय कुमार मल्होत्रा
पूर्व निदेशक (राजभाषा),
रेल मंत्रालय,भारत सरकार

Vijay K Malhotra
Former Director (OL),
Ministry of Railways,
Govt. of India
Mobile:91-9910029919
     


URL<www.vijaykmalhotra.mywebdunia.com>

lalit sati

unread,
Aug 6, 2014, 6:03:51 AM8/6/14
to ha
विजय जी, क्या व्याकरण की दृष्टि से "वृक्षारोपण" शब्द सही नहीं है?

Vijay K. Malhotra

unread,
Aug 6, 2014, 6:24:49 AM8/6/14
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)
संस्कृत में रोपण और आरोपण दोनों ही शब्द सही हैं, लेकिन इस संदर्भ में  जब वृक्ष के साथ इसका सार्थक समास बनाने की ज़रूरत हुई होगी  तो रोपण ही ज़्यादा सार्थक लगा होगा.
विजय 

vijay singh

unread,
Aug 6, 2014, 7:25:58 AM8/6/14
to N A

वृक्षरोपड़ ही है

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lalit sati

unread,
Aug 6, 2014, 7:31:40 AM8/6/14
to ha
विजय सिंह जी, क्या आप यह कहना चाह रहे हैं "रोपड़" सही है, "रोपण" ग़लत है?

narayan prasad

unread,
Aug 6, 2014, 8:51:22 AM8/6/14
to hindian...@googlegroups.com
आरोपण का एक अर्थ पौधा लगाना (planting) भी होता है ।

--- नारायण प्रसाद


2014-08-06 12:52 GMT+05:30 Hariraam <hari...@gmail.com>:

narayan prasad

unread,
Aug 6, 2014, 8:56:12 AM8/6/14
to hindian...@googlegroups.com
<<वृक्ष:रोपण से वृक्षारोपण बना है।>>

जी नहीं । प्रातिपदिक वृक्षस् नहीं, बल्कि वृक्ष है । अतः वृक्षःरोपण लिखना अशुद्ध है ।
वृक्षः प्रथमा विभक्ति एकवचन का रूप है, प्रातिपदिक नहीं ।

--- नारायण प्रसाद


lalit sati

unread,
Aug 6, 2014, 9:22:27 AM8/6/14
to ha
<<आरोपण का एक अर्थ पौधा लगाना (planting) भी होता है ।>>

जी हाँ। नारायण जी, आपकी बात सही है।


Amarnath Jha

unread,
Aug 6, 2014, 10:21:51 AM8/6/14
to hindian...@googlegroups.com
sachmuch, vriksharopan kahi se galat nhi hai
 

narayan prasad

unread,
Aug 7, 2014, 1:07:27 AM8/7/14
to hindian...@googlegroups.com
<<एक और उदाहरण है गति+रोध  से गत्यारोध बनता है, यहाँ भी आकार का प्रवेश हुआ है।>>

गति+रोध  से गत्यारोध नहीं बन सकता, इकार का यकार (यण्-संधि) केवल स्वर आगे रहने पर हो सकता है । गति+रोध  से केवल गतिरोध शब्द बनेगा ।


--- नारायण प्रसाद

narayan prasad

unread,
Aug 7, 2014, 1:14:27 AM8/7/14
to hindian...@googlegroups.com
<<मसलन, अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्देशीय, वृक्षारोपण, विश्वामित्र, मनोरोग, दुश्चिंता, निस्संदेह आदि शब्द मूलत: ‘अंत:राष्ट्रीय’, ‘अंत:देशीय’, ‘वृक्ष:रोपण’, ‘विश्व:मित्र’, ‘मन:रोग’, ‘दु:चिंता’, ‘नि:संदेह’ से बने हैं।>>

'विश्वामित्र'  शब्द ‘विश्व:मित्र’ से नहीं बना है, बल्कि 'विश्व + मित्र' से । देखें - वामन शिवराम आप्टे का संस्कृत-हिन्दी कोश ।


--- नारायण प्रसाद

Navneet Kumar

unread,
Aug 7, 2014, 9:00:30 AM8/7/14
to hindian...@googlegroups.com
मसलन, अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्देशीय, वृक्षारोपण, विश्वामित्र, मनोरोग,
> दुश्चिंता, निस्संदेह आदि शब्द मूलत: ‘अंत:राष्ट्रीय’, ‘अंत:देशीय’,
> ‘वृक्ष:रोपण’, ‘विश्व:मित्र’, ‘मन:रोग’, ‘दु:चिंता’, ‘नि:संदेह’ से बने हैं।"

अन्तः+राष्ट्रिय=अन्ताराष्ट्रिय शुद्ध शब्द है।
राष्ट्रिय शब्द की सिद्धि- पाणिनि सूत्र राष्ट्रावारपराद् घखौ 4.2.94
सूत्र से राष्ट्र शब्द से घ प्रत्यय होता है पश्चात् घ के स्थान पर
आयनेयीनियियः फढखछघां प्रत्ययादीनाम् 7.1.2 सूत्र से इय होता है।

अन्तर् अव्यय है। अन्तर्+राष्ट्रिय इस स्थिति में -
रो रि 8.3.14 से प्रथम र् (अन्तर् का) को लोप
ढ्रलोपे पूर्वस्य दीर्घोऽणः6.3.111 से अन्त के त को दीर्घ हो गया तो
बना=अन्ताराष्ट्रिय

अन्तर्देशीय शुद्ध है क्योंकि अन्तर् रेफान्त अव्यय है।

वृक्षःरोपण शुद्ध हो ही नहीं सकता (जैसा कि नारायण जी कहा है) क्योंकि
वृक्षारोपण का समास विग्रह वृक्षस्य आरोपणम् वृक्षारोपण् (षष्ठी
तत्पुरुष) सुपो धातुप्रातिपदिकयोः 2.4.71 से षष्ठी (स्य) का लोप होकर
वृक्ष बचेगा वृक्षः नहीं। पश्चात् वृक्ष+आरोपण=वृक्षारोपण अकः सवर्णे
दीर्घः 6.1.101 से दीर्घ एकादेश होकर वृक्षारोपण ही शुद्ध बनेगा।
जिन्हें रोपड़/रोपण में संदेह है-
रुह् धातु है । रुह्+ल्युट्(अऩ) - रुह् धातु को रूहः पोऽन्यतरस्याम्
7.3.43 से ह् को प् विकल्प से होता है। रुप्+अन पुगन्तलघूपधस्य च 7.3.86
से उपधा को गुण रोप्+अन रषाभ्यां नो णः समानपदे 8.1.1 से न को ण होकर
आ+रोपण शुद्ध शब्द बनेगा जहाँ आ उपसर्ग है।

विश्व+मित्र मित्रे चर्षौ 6.3.130 से ऋषि संज्ञा विषय में मित्र शब्द बाद
में होने पर पूर्व शब्द को दीर्घ आदेश होता है। यहाँ कोई संधि नहीं है।
केवल दीर्घ आदेश से आ दीख रहा है।

मनस्+रोग ससजुषो रुः से स् को रु (र्) हुआ=मनर्+रोग
हशि च 6.1.114 से पूर्व रेफ को उ हो गया=मन+ उ रोग
आद् गुणः 6.1.87 से गुण एकादेश ओ होकर=मनोरोग शुद्ध शब्द है।

दुस्+चिन्ता -स्तोः श्चुना श्चुः8.4.40 से स् को श् व्यंजन संधि होकर
दुश्चिन्ता बनेगा।

निस्+संदेह यहाँ निःसंदेह व निस्संदेह दोनों ही सही हैं क्योंकि वा शरि
8.3.36 से विकल्प से विसर्ग होता है।

उपर्युक्त शब्दों का साधुत्व पाणिनीय सूत्रों के आधार पर बताया गया है।
हिंदी में क्या प्रचलित है किसे मानक व शूद्ध माना जाए यह भिन्न विषय है।

»नवनीत कुमार

narayan prasad

unread,
Aug 7, 2014, 9:39:18 AM8/7/14
to hindian...@googlegroups.com
<<अन्तः+राष्ट्रिय=अन्ताराष्ट्रिय शुद्ध शब्द है।>>

शुद्ध है या अशुद्ध, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे किस अर्थ में प्रयोग करते हैं ।

अन्तर्राष्ट्रिय / अन्तर्राष्ट्रीय / अन्ताराष्ट्रीय = inside the nation
अन्तर्देशीय = inland

अन्तरराष्ट्रीय = international
अन्तरराज्यीय = inter-state

--- नारायण प्रासाद


Dr. Paritosh Malviya

unread,
Aug 7, 2014, 12:49:00 PM8/7/14
to hindian...@googlegroups.com
मेरा तो मानना यह है कि‍ प्रचलन का सम्‍मान करना चाहि‍ए। वृक्षारोपण को वृक्षरोपण कर देने से कुछ अधि‍क हासि‍ल नहीं हाे जायेगा। शुद्धतावादी रवैया सही है परंतु प्रचलन के आगे वह भी अंतत: नतमस्‍तक हो जाता है। 


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Dr. Paritosh Malviya
Gwalior

ePandit | ई-पण्डित

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Aug 7, 2014, 11:15:37 PM8/7/14
to hindian...@googlegroups.com
प्रचलन का सम्मान करने के हिसाब से तो अन्तर्राष्ट्रीय का international के लिये बहुत प्रयोग होता है।


7 अगस्त 2014 को 7:09 pm को, narayan prasad <hin...@gmail.com> ने लिखा:
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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
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(Dr.) Kavita Vachaknavee

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Aug 8, 2014, 8:27:33 AM8/8/14
to ha
 ऐसा नहीं है।
सार्वभौमिक के अर्थ में अन्तरराष्ट्रीय अनेकानेक वर्षों से प्रचलित भी है और शुद्ध भी। महात्मा गांधी अन्तर राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय का नाम ही यदि कोई ठीक से पढ़ ले तो वह यह गलती न करेगा। 
उसी प्रकार अन्तर्देशीय (Inland) पत्र से कम से कम 50 वर्ष पूर्व से सब परिचित हैं।
 अब यदि कोई भूल वश अन्तर्देशीय/अन्तर्राष्ट्रीय (Inland) के संदर्भ में अन्तरराष्ट्रीय का प्रयोग करता है तो वह उसकी गलती है, उसकी अज्ञानता है। किशोरी दास वाजपेयी जी ने अपनी पुस्तक में इस अज्ञानता के बारे में स्पष्ट लिखा है।  कुछ लोगों की अज्ञानता के आधार पर अन्तरराष्ट्रीय के लिए अन्तर्राष्ट्रीय के प्रयोग को प्रचलित मानना अनुचित होगा। और फिर इस अनुचित तर्क के सहारे वृक्षारोपण जैसे सही व शुद्ध शब्द को (जो शुद्ध रूप में ही प्रचलित भी है) बदल कर एक अप्रचलित व अशुद्ध शब्द को स्थानापन्न करने की बात करना उचित नहीं।   



bestregards.gif 
 सादर शुभेच्छु
- (डॉ.) कविता वाचक्नवी

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Vijay Prabhakar Nagarkar

unread,
Aug 8, 2014, 8:46:49 AM8/8/14
to hindian...@googlegroups.com

मराठी भाषा में वृक्षरोपण ही लिखा और बोला जाता है।

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