वाट लगना का मतलब होता है नुक्सान हो जाना या काम बिगड़ जाना _अजित वडनेरकर के सौजन्य से

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Vijay K. Malhotra

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Jun 1, 2010, 2:11:54 AM6/1/10
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators), अजित वडनेरकर, Hindi Vimarsh
हि्न्दी में पिछले कुछ वर्षों से एक मुहावरा तेजी से लोकप्रिय होता जा
रहा है-वाट लगना जिसका मतलब होता है नुकसान हो जाना या काम बिगड़ जाना।
वाट लगना मुहावरे में वाट शब्द ही प्रमुख है। यह हिन्दी का शब्द नहीं है।
आमतौर पर यह गुजराती और मराठी में ज्यादा प्रयुक्त होता है। नुकसान होने
या नुकसान करने जैसे अर्थों में वाट लगना, वाट लगाना जैसे प्रयोग पहले
मराठी से मुंबइया हिन्दी में आए फिर फिल्मों के जरिये अब हिन्दी
क्षेत्रों में भी खूब इस्तेमाल हो रहे हैं। मराठी वाट बना है संस्कृत के
वर्तिः (वर्तिः > वत्ती > बत्ती > बाती > वाट ) शब्द से जिसका अर्थ
होता है दीपशिखा, अग्निशिखा। इसके लिए वर्तिका शब्द भी है जो संस्कृत का
है मगर साहित्यिक हिन्दी में इस्तेमाल किया जाता है जिसका मतलब भी दीये
की लौ होता है। वर्तिः शब्द बना है वृत् धातु से जिसमें गोल, घेरा,
घूमने, हिलने का भाव है। दीये की लौ पर गौर करें तो पाएंगे कि इसमें एक
सातत्य, गति का भाव है। जलती हुई शिखा अपने चारों और एक आभा-वलय का
निर्माण करती है।
हिन्दी में वर्तिः से बत्ती या बाती जैसे शब्दों का निर्माण होता है जो
खूब इस्तेमाल होते हैं। मराठी में इसका रूप वाती/वात भी होता है।
दीयाबाती का मतलब होता है शाम के समय उजाले का प्रबंध करना। आज भले ही
बिजली के बल्बों से रोशनी होती है, मगर तब भी बत्ती जलाओ, बत्ती बुझाओ ही
कहा जाता है। मोमबत्ती, अगरबत्ती, ऊदबत्ती जैसे शब्द भी इससे ही बने हैं।
हालांकि वर्तिः शब्द के मूल में दीये की लौ न होकर जलनेवाले कपास-सूत्र
प्रमुख है। गौर करें कि दीपक की बत्ती कपास से ही बनाई जाती है। कपास के
फाहे को हथेलियों के बीच रख कर गोल-गोल लपेटने की क्रिया से ही बत्ती का
निर्माण होता है। इसी चक्रगति क्रिया के लिए हिन्दी शब्द है बटना जो
वर्तनीयं से ही बना है। जिसे बट कर बनाया जाए वही है वर्तिका या बत्ती।
बत्ती में जलने का नहीं बल्कि गोलाई और घुमाव वाला भाव प्रमुख है। खड़िया
की चाक को भी बत्ती कहा जाता है जिससे श्यामपट्ट पर लिखा जाता है। वर्तिः
या वर्तिका से जहां हिन्दी में बत्ती, बाती शब्द का निर्माण हुआ वहीं
मराठी में इससे वाट शब्द बना। बत्ती और वाट दोनों में ही जलने और नष्ट हो
जाने का भाव प्रमुख है। अनादिकाल से मनुष्य को अग्नि के भीषण रूप का
ज्ञान रहा है।
हिन्दी में नुकसान के अर्थ में बत्ती देना का वही अर्थ है जो हिन्दी में
नुकसान के अर्थ में बत्ती देना का वही अर्थ है जो मराठी में वाट लगना का
है।
इसी अर्थ में उर्दू मुहावरा पलीता लगाना भी होता है। मद्दाह के उर्दू
शब्दकोश के मुताबिक हिन्दी का पलीता शब्द उर्दू के फलीतः से आया है जिसका
मतलब होता है चिराग की लौ। मद्दाह साहब के मुताबिक उर्दू का फलीतः दरअसल
भ्रष्ट प्रयोग है और बरास्ता तुर्की इसने फारसी और अरबी में घुसपैठ की
है। अपने मूल स्वरूप में यह अरबी का फतीलः शब्द है जिसका वर्णविपर्यय की
क्रिया के चलते रूप परिवर्तन हुआ और यह फलीतः बन गया। मगर जॉन प्लैट्स के
हिन्दी-उर्दू-अंग्रेजी कोश के मुताबिक हिन्दी का पलीता शब्द संस्कृत के
प्रदीप्त से बना है जिसका अर्थ होता है जलाया हुआ, सुलगाया हुआ। प्रदीप्त
से पलित्त और फिर पलीता बना। मुझे लगता है उर्दू, फारसी और तुर्की में जो
फलीता या पलीता है उसकी रिश्तेदारी अरबी के फतीलः से नहीं है। निश्चित ही
प्रदीप्त के देशज रूप पलित्त के ही ये प्रतिरूप हैं।
नुकसान के ही अर्थ में फूंकना, घर फूंकना जैसे मुहावरे भी हिन्दी में
बोले जाते हैं। हिन्दी का फूंक शब्द संस्कृत की फुत् या फूत् धातु से
निकला है। यह ध्वनि अनुकरण के आधार पर बनी धातु है। मुंह से तेजी से
श्वास छोड़ने पर यही ध्वनि होती है। इसका प्रयोग ‘कृ’ अर्थात करने के साथ
होता है। इस तरह बनता है फुतकृ जिससे हिन्दी में फुत्कार शब्द बनता है।
फूंक की रिश्तेदारी इससे ही है। ऑक्सीजन की मौजूदगी में ही आग जलती है।
अधिक तेज आंच के लिए चिंगारी को फूंक मारी जाती है जिससे आग जोर पकड़ती
है। भड़काने या उकसाने के लिए भी फूंक देना मुहावरे का प्रयोग किया जाता
है।


---------- Forwarded message ----------
From: अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
Date: Tue, 1 Jun 2010 11:11:12 +0530
Subject: Re: {हिंदी अनुवादक} क्या 'वॉट लगाना' हिंदी में एक नई अभिव्यक्ति है?
To: malho...@gmail.com

आदरणीय विजय जी,

वाट लगाना मुहावरा मूलतः मुंबइया ज़बान से हिन्दी में आया है।
इस पर सफर में लिखा जा चुका है। कृपया देखें यहां-
*वाट लगा दी, बत्ती बुझा
दी…<http://shabdavali.blogspot.com/2009/04/blog-post_12.html>
*
सादर
अजित

2010/6/1 Vijay K. Malhotra <malho...@gmail.com>

> प्रिय अजित,
> क्या आप बता सकते हैं कि 'वाट लगाना' मुहावरा कैसे बना...
> विजय
> ---------- Forwarded message ----------
> From: Lingual Bridge <lingua...@gmail.com>
> Date: Mon, 31 May 2010 01:04:25 -0700 (PDT)
> Subject: {हिंदी अनुवादक} क्या 'वॉट लगाना' हिंदी में एक नई अभिव्यक्ति है?
> To: "हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)" <hindian...@googlegroups.com>
>
> मित्रो,
>
> पिछले कुछ अरसे से 'वॉट लगाना' का हिंदी में प्रयोग सुन रहा हूँ, जैसे
> उसने वॉट लगा दी, वॉट मत लगा यार आदि। मैंने पहले कभी यह वाक्यांश नहीं
> सुना। इसका वास्तविक अर्थ क्या है और इसकी व्युत्पत्ति कैसे हुई है?
>
> शुभकामनाओं सहित,
>
> चोपड़ा
>
>
>
> --
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> विजय कुमार मल्होत्रा
> पूर्व निदेशक (राजभाषा),
> रेल मंत्रालय,भारत सरकार
> Vijay K Malhotra
> Former Director (Hindi),
> Ministry of Railways,
> Govt. of India
> आवास का पता / Residential Address:
> Vijay K Malhotra
> WW/67/SF,
> MALIBU TOWNE,
> SOHNA ROAD,
> GURGAON- 122018
> Mobile:91-9910029919
> 91-9311170555
> फोन: 0124-4104583
>
> URL<www.vijaykmalhotra.mywebdunia.com>
>

--
शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/

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विजय कुमार मल्होत्रा
पूर्व निदेशक (राजभाषा),
रेल मंत्रालय,भारत सरकार
Vijay K Malhotra
Former Director (Hindi),
Ministry of Railways,
Govt. of India
आवास का पता / Residential Address:
Vijay K Malhotra
WW/67/SF,
MALIBU TOWNE,
SOHNA ROAD,
GURGAON- 122018
Mobile:91-9910029919
91-9311170555
फोन: 0124-4104583

URL<www.vijaykmalhotra.mywebdunia.com>

Jitendra Wagh

unread,
Jun 1, 2010, 2:41:39 AM6/1/10
to hindian...@googlegroups.com, अजित वडनेरकर, Hindi Vimarsh
जब विजय जी के पास पहले ही इतना ज्ञान है वाट लगाने के बारे में, तो इसके पहले
उन्होंने अजित जी से इसका अर्थ या इसके उद्भव के बारे में क्यों पूछा? यहां हम
ज्ञान बांटने आए हैं या ज्ञान बघारने और दूसरों को नीचा दिखाने ? माफ़ कीजिए
सुयश जी लेकिन इस समूह में मुझे अनुवाद को बेहतर बनाने का कोई मकसद नज़र नहीं
आता। आज अगर बाज़ार में, चाहे वह लोकलाइज़ेशन हो या बच्चों की पुस्तकें हों, या
फिर कोई और, अनुवाद की गुणवत्ता दयनीय है, तो वह इसलिए कि अनुवादक को न हिंदी
का ज्ञान होता है, और न ही अंग्रेज़ी का। अधिकतर अनुवादक शाब्दिक अनुवाद करके
सौंप देते हैं और उनके अनभिज्ञ ग्राहक उनका काम ख़रीद लेते हैं। ऐसे में अनुवाद
से जुड़े समूह का सरोकार अनुवाद की बारीकियों से कुछ ज़्यादा होना चाहिए।


-----------------------------------------------------
जितेन्द्र

Tele:+91-22-28966472
Fax: +91-22-28966472
Skype ID:- "sigmaserve1"
MSN/WINDOWS LIVE: sigma...@hotmail.com
Mobile: +91-09821130026

V S Rawat

unread,
Jun 1, 2010, 2:54:34 AM6/1/10
to hindian...@googlegroups.com
विजय जी जो ज्ञान बधारा है :-) वह क्वोट किया गया ज्ञान है, अर्थात विजय जी ने
अजीत जी की भेजी ब्लॉगपोस्ट की लिंक से पूरी सामग्री उठा कर क्वोट कर दी है अपनी मेल में।

अर्थात जब विजय जी ने पूछा था तब उनको ज्ञात नहीं था, और अजीत सिंह के उत्तर में दी
गई लिंक को पढ़ कर उनको ज्ञान प्राप्त हुआ।

यही तो इस सूची का प्रयोजन है कि हम आपम में जानकारी बाँटे। इसलिए आपका क्रोध कुछ
अधिक हो गया वाघ साहेब। इतनी बुरी तरह नहीं डाँटना चाहिए किसी सार्वजनिक समूह में।

चलिए इससे विजय जी ने ये भी सीखा की जब वो किसी वेबपेज से जानकारी को साझा करें
तो उसका स्रोत अवश्य विशेष रूप से दे कर लिखें कि उन्होंने यहाँ से ये जानकारी ली है।
--
रावत

Jitendra Wagh

unread,
Jun 1, 2010, 3:01:21 AM6/1/10
to hindian...@googlegroups.com
रावत जी यह क्रोध नहीं है, लेकिन मुझे तो यह नहीं पता था कि वह सामग्री अजित जी
के ब्लॉग से ली गई है, ऐसे में किसी को भी यही लगेगा कि अनावश्यक रूप से प्रश्न
पूछ कर फिर जानकारी दी गई है। न मुझे क्रोध आया, और न ही मेरे मन में कोई मैल
है किसी के लिए, बल्कि किसी को बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहता हूं। :-(

prashant dhyani

unread,
Jun 1, 2010, 1:39:28 PM6/1/10
to hindian...@googlegroups.com
हाँ, पह आपने 'वाट' तो लगा ही दी जितेन्द्र जी, 

2010/6/1 Jitendra Wagh <sigma...@gmail.com>
रावत जी यह क्रोध नहीं है, लेकिन मुझे तो यह नहीं पता था कि वह सामग्री अजित जी के ब्लॉग से ली गई है, ऐसे में किसी को भी यही लगेगा कि अनावश्यक रूप से प्रश्न पूछ कर फिर जानकारी दी गई है। न मुझे क्रोध आया, और न ही मेरे मन में कोई मैल है किसी के लिए, बल्कि किसी को बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहता हूं। :-(




-----------------------------------------------------
जितेन्द्र


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----- Original Message ----- From: "V S Rawat" <vsr...@gmail.com>
To: <hindian...@googlegroups.com>
Sent: Tuesday, June 01, 2010 12:24 PM
Subject: Re: {हिंदी अनुवादक} वाट लगना का मतलब होता है नुक्सान हो जाना या काम बिगड़ जाना _अजित वडनेरकर के सौजन्य से
विजय जी जो ज्ञान बधारा है :-) वह क्वोट किया गया ज्ञान है, अर्थात विजय जी ने अजीत जी की भेजी ब्लॉगपोस्ट की लिंक से पूरी सामग्री उठा कर क्वोट कर दी है अपनी मेल में।

अर्थात जब विजय जी ने पूछा था तब उनको ज्ञात नहीं था, और अजीत सिंह के उत्तर में दी गई लिंक को पढ़ कर उनको ज्ञान प्राप्त हुआ।

सुयश सुप्रभ

unread,
Jun 2, 2010, 1:01:37 AM6/2/10
to हिंदी अनुवादक (Hindi Translators)
जितेन्द्र जी,

विजय जी के संदेश का शीर्षक है : "वाट लगना का मतलब होता है नुक्सान हो
जाना या काम बिगड़ जाना _अजित वडनेरकर के सौजन्य से"।

क्या इस शीर्षक से यह स्पष्ट नहीं होता है कि इस संदेश में अजित जी के
विचार उद्धृत किए गए हैं?

सादर,

सुयश
9811711884

ब्लॉग : http://anuvaadkiduniya.blogspot.com

On Jun 1, 11:41 am, "Jitendra Wagh" <sigmase...@gmail.com> wrote:
> जब विजय जी के पास पहले ही इतना ज्ञान है वाट लगाने के बारे में, तो इसके पहले
> उन्होंने अजित जी से इसका अर्थ या इसके उद्भव के बारे में क्यों पूछा? यहां हम
> ज्ञान बांटने आए हैं या ज्ञान बघारने और दूसरों को नीचा दिखाने ? माफ़ कीजिए
> सुयश जी लेकिन इस समूह में मुझे अनुवाद को बेहतर बनाने का कोई मकसद नज़र नहीं
> आता। आज अगर बाज़ार में, चाहे वह लोकलाइज़ेशन हो या बच्चों की पुस्तकें हों, या
> फिर कोई और, अनुवाद की गुणवत्ता दयनीय है, तो वह इसलिए कि अनुवादक को न हिंदी
> का ज्ञान होता है, और न ही अंग्रेज़ी का। अधिकतर अनुवादक शाब्दिक अनुवाद करके
> सौंप देते हैं और उनके अनभिज्ञ ग्राहक उनका काम ख़रीद लेते हैं। ऐसे में अनुवाद
> से जुड़े समूह का सरोकार अनुवाद की बारीकियों से कुछ ज़्यादा होना चाहिए।
>
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