RE: {हिंदी अनुवादक} Disclaimer - जब वी मेट - मेट या मैट

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Arvind Kumar

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Jul 21, 2013, 2:11:12 AM7/21/13
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Disclaimer को ले कर बात मेट मैट तक जा पहुचेगी – इस की कल्पना मैं ने नहीँ की थी.

 

अपना मत स्पष्ट करने के लिए नीचे जोड़ रहा हूँ एक पुरानी टिप्पणी. लगता है कि सदस्य गण भूल गए हैं. नए सदस्यों से विनती है नीचे ज़रूर पढ़ें.--  

 

 

 

जब वी मेट या मैट?

 

तो नायक नायिका मिले? या साथ सोए?

 

अँगरेजी का यूसेज तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन सवाल यह है अँगरेजी शब्द देवनागरी मेँ लिखेँ कैसे

 

बदलती हिंदी मेँ अँगरेजी शब्दोँ का यूसेज या प्रचलन तेज़ी से बढ़ रहा है. उन्हेँ देवनागरी मेँ सही सही लिखने मेँ कई समस्याएँ आती हैँ.

 

हम हर ध्वनि को वैसा ही बोलना चाहते हैँ जैसा लिखते हैँ, और जैसा बोलते हैँ वैसा ही लिखना चाहते हैँ. लेकिन रोमन लिपि मेँ लिखना पढ़ना हमारी देवनागरी जैसा नहीँ है. उस मेँ ए से ज़ैड तक कुल 26 अक्षर हैँ---और उन के ज़रिए सभी उच्चारण लिखने होते हैँ. उदाहरण के लिए 'सी' (c) को '' बोलना है या '', यह दर्शाने के लिए 'सी' के बाद कई भिन्न स्वर या वर्ण लगाने की प्रथा बनाई गई है. मोटे तौर पर

 

'सी' के बाद 'आई' (i) है या '' (e) या 'सी' के पहले या 'ऐस' (s) है तो उच्चारण है '',

 

'सी' के बाद मेँ '' (a), 'यू' (u) है या '' (o) हो तो बोलते हैँ ''.

 

इसलिए अँगरेजोँ को भी अँगरेजी हिज्जे रटने पड़ते हैँ.

 

अँगरेजी मेँ स्वरोँ की संख्या तो कुल पाँच है, लेकिन हमारे 10 स्वर उच्चारणोँ की जगह (अँ अः को नहीँ गिना गया है, न ही ऋ ऋ़ लृ को) अँगरेजी मेँ कम से कम 14 हैँ. स्पष्ट है कि देवनागरी के पुराने स्वरोँ और मात्राओं के सहारे वे नहीँ लिखे जा सकते. उन के लिए हमेँ अपने नियम बदलने पड़ेंगे, या नए अक्षर गढ़ने पड़ेंगे, जैसे आ और औ के बीच मेँ ऑ. सवाल उठता है कि उन्हेँ कोश क्रम मेँ कहाँ रखा जाएगा? कोई भी यूज़र कैसे समझेगा कि उसे आ देखना है, , या फिर औ, या ऑ.

 

यूरोप की भाषाओं मेँ लिपि तो वही रोमन है, लेकिन अक्षरोँ का उच्चारण अलग है. दूसरे देशोँ के यूरोपियनोँ को या तो अँगरेजी उच्चारण सीखना होता है या हिज्जे. अनेक देवनागरी उच्चारण कई यूरोपीय देशोँ मेँ हैँ ही नहीँ. अँगरेज या फ़्राँसीसी 'खादी' को 'कादी' बोलते हैँ.

 

विदेशी नामोँ की बात तो दूर, रोमन मेँ लिखे अपने भारतीय शब्द भी हम अपनी भाषाओं मेँ सही नहीँ लिख पाते. मेरे जन्म स्थान 'मेरठ Meerut' को मराठी मेँ 'मीरुत' लिखा जाता है. बाँगला Saurav का सही उच्चारण है 'सौरभ' क्योंकि वहाँ '' का उच्चरण '' या '' है, लेकिन हिंदी मेँ उसे 'सौरव' लिखने की प्रवृत्ति है. आम तौर पर हृषिकेश या हृतिक को हिंदी वाले ऋषिकेश या ऋतिक लिखते हैँ. उड़िया 'शात्कड़ी Satkari' को हिंदी मेँ लोग 'सत्कारी' बोलते लिखते हैँ.

 

सेंटर सैंटर... टेस्ट टैस्ट... वेस्ट वैस्ट...

 

आज हिंदी मेँ हर ओर विदेशी शब्दोँ और नामोँ की रेज़ है. अँगरेजी मेँ कहेँ तो rage रेज है. देवनागरी मेँ उन के हिज्जे कई बार भ्रामक हो जाते हैँ. मैँ कुछ वे शब्द ले रहा हूँ जिन मेँ ए या ऐ उच्चारणोँ का घपला है. जैसे पीएमओ (प्रधान मंत्री कार्यालय)... होना चाहिए पीऐमओ. इस के सैकड़ोँ उदाहरण पता नहीँ कब से हिंदी पत्रपत्रिकाओं मेँ मिलते रहे हैँ...

 

बात शुरू होती है रोमन लिपि के f, h, l, m, n, x अक्षरोँ के उच्चारणोँ की हमारी लिखावट से. हम लिखते हैँ-- एफ़, एच, एल, एम, एन, एक्स... जो सही है और जो होना चाहिए वह है ऐफ़, ऐच, ऐल, ऐम, ऐन, ऐक्स.

कई बार भयंकर परिणाम होता है, जैसे...

 

फ़िल्म जब वी मेट के नाम मेँ.

 

हिंदी मेँ नाम लिखने वाला कहना चाहता था जब नायक नायिका मिले - यानी जब वी मैट. लेकिन जो उस ने लिखा उस का मतलब होता है जब नायक और नायिका ने परस्पर शारीरिक संबंध स्थापित किया.

 

कुछ अन्य उदाहरण...

taste टेस्ट, test टेस्ट (होना चाहिए टैस्ट),

match (लिखते हैँ मेच होना चाहिए मैच). अगर यह लिखते रहना है तो यह वाक्य कैसे लगेँगे? फ़ूड के टेस्ट का असली टेस्ट तो खाने मेँ है. टेस्ट मेच को देखने का पूरा टेस्ट को स्टेडियम मेँ ही आता है.

rate रेट, rat रेट. यदि rat (चूहा) है तो भी लिखते हैँ रेट, (होना चाहिए रैट), rattle (झुनझुना) रेटल (चाहिए रैटल),

mate मेट, met मेट (होना चाहिए मैट) की बात तो ऊपर हो ही चुकी है.

metro को लिखते हैँ मेट्रो (होना चाहिए मैट्रो),

sale सेल, sell सेल (होना चाहिए सैल). 

 

इसी तर्ज़ पर हाल ही मैँ ने एक सुप्रसिद्ध हिंदी दैनिक मेँ पढ़ा-- बेस्ट सेलर. हँसी भी आई और दया भी-- बैस्ट सैलर (बहुत बिकने वाली पुस्तक) का कैसा विद्रूप!

 

 

 

 

From: hindian...@googlegroups.com [mailto:hindian...@googlegroups.com] On Behalf Of kartik Saini
Sent: Friday, July 19, 2013 4:22 PM
To: hindian...@googlegroups.com
Subject: Re: {
हिंदी अनुवादक} Disclaimer

 

   पूर्णतया  सहमत हैं. 

 

2013/7/10 Jagannathan Ramaswami <vrj.n...@gmail.com>

पुनश्च-  केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा निर्धारित कॆ, कॊ आदि चिह्न लिप्यंतरण आदि वैज्ञानिक प्रयोजनों के लिए हैं, हिंदी की वर्णमाला के अपने सदस्य नहीं हैं।

जगन्नाथन 

 

2013/7/10 Jagannathan Ramaswami <vrj.n...@gmail.com>

बात श्री अरविंद कुमार जी के disclaimer से शुरू हुई और लैक्सिकन तक पहुँच गई। यही है बात से बात निकलना। पहले disclaimer की बात कर लें। बड़ा रोचक शब्द है। संपादक कहना चाहता है कि लेखकों की राय उनकी अपनी है और इससे पत्रिका नीतिशः उन विचारों से अपने पृथक्करण की घोषणा करती है। सिगरेट पीनेवाले पात्रों के संदर्भ में फ़िल्म निर्माता पृथक्करण की घोषणा के रूप में भारत सरकार की चेतावनी (कैंसर संबंधी) दिखा देता है। 

 

अब सवाल लैक्सिकन का है। किसी ने इंटरनैट पर ध्यान नहीं दिया है, चर्चा में उसे भी शामिल कर लें। अरविंद जी उच्चारण से वर्तनी को सही साबित करना चाहते हैं। इन दोनों में सह संबंध तो है, एकैक संबंध नहीं है। समस्या यह है कि अंग्रेज़ी में तीन उच्चारण हैं - ए जैसे गेट, ह्रस्व ए जैसे pen और ऐ से मिलता-जुलता उच्चारण जैसे pan. हिंदी में pen को पेन और pan को पैन लिखने की परंपरा है, जबकि दिल्ली के लोग कई जगह इस उच्चारण के लिए ऐ का प्रयोग करते हैं, जैसे चैक, बैंच, टैंट आदि। कुछ स्वनिक स्थितियों में ए की मात्रा दिखाई देती है, जैसे बेस्ट, हेलेन केलर, जेसीका आदि। यह भी उल्लेखनीय है कि अंग्रेज़ी शब्दों के ह्रस्व ओ उच्चारण को ओ से ही दिखाया जाता है, औ स् नहीं, जैसे मोबाइल, पोज़ीशन आदि।

प्रसंग से उल्लेख करना चाहूँगा कि ह्रस्व ए और ओ दक्षिण की चारों में भाषाओं की विशेषता है और उन्हें देवनागरी में ऐ और औ से लिखा जाए मूल शब्द पहचाने भी नहीं जा सकते। उदा. एरणाकुलम, रेड्डी, पेरुमाल, वोक्कलिगा आदि।

अरविंद जी को कोई स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता नहीं है, वे दिल्ली 'स्कूल' के हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम इस क्षेत्र में मानकीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ करें। 

जग्ननाथन

 

2013/6/24 narayan prasad <hin...@gmail.com>

<<यदि केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा सर्वसम्मति के आधार पर हृस्व ए के लिए 

कोई मात्रा निर्धारित कर दी जाए तो इस समस्या का समाधान हो सकता है।>>

विस्तारित देवनागरी में ह्रस्व ए एवं ह्रस्व ओ तथा उनकी मात्राओं का पहले से ही प्रावधान है - ऎ ए ऒ ओ ॆ ॊ ।
कॆ, के, कॊ, को
--- नारायण प्रसाद

 

2013/6/24 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>

अरविंदजी नमस्कार,

आपके द्वारा दिए गए लिंक पर उच्चारण सुना।

यह लैक्सिकन नहीं है, get, pet, bet, set में जो ए का उच्चरण है, वही इस में है।

मेल, फेल, जेल, रेल  तथा गेट, सेट पेट दोनों समूहों में भले ही उच्चारण 

भिन्न हैं लेकिन देवनागरी में इनके लिए अलग से मात्रा नहीं होने के कारण दोनों में

ही ए की मात्रा का प्रयोग किया जाता है। ऐनक का ऐ तो बिलकुल अलग उच्चारण है

जिसका प्रयोग कैलाश, बैठक, कैश, बैट, रैट के लिए किया जाता है। यदि ऐ की मात्रा 

का प्रयोग गेट, पेट पेन (कलम) के लिए करेंगे तो पाठक को पढ़ने में काफी कठिनाई 

होगी। हाँ, यदि केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा सर्वसम्मति के आधार पर हृस्व ए के लिए

कोई मात्रा निर्धारित कर दी जाए तो इस समस्या का समाधान हो सकता है।

सादर,

 

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Jai Pushp

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Jul 21, 2013, 5:47:52 AM7/21/13
to hindian...@googlegroups.com
अगर
Bat को बेट
और
Bet को बैट
कहा जाएगा तो जैसे ही कोई बल्‍लेबाज बेटिंग (Batting) करने जाएगा उसे पुलिस पकड़ ले जाएगी।

चाहे ए लिखा जाये या एै, कुछ शब्‍द तो ऐसे होंगे ही जिनके साथ भयंकर दुष्‍परिणामों का जोखिम रहेगा। बहरहाल अभी तो ज्‍यादातर लोग 'बैटिंग' ही करते हैं और जब 'बेटिंग' करते भी हैं तो उसे सार्वजनिक नहीं करते। लेकिन अभी भी मामला कुछ स्‍पष्‍ट नहीं हो रहा है और विद्वानों (जिनमें मैं निश्चित ही शामिल नहीं हूं) के बीच भी ए और एै की दुविधा बनी ही हुई है।

पीयूष ओझा

unread,
Jul 21, 2013, 6:02:14 AM7/21/13
to hindian...@googlegroups.com, hindi-...@googlegroups.com, HindiManak...@googlegroups.com
दो की बजाय इन तीन शब्दों के लिप्यंतरण पर विचार कीजिए: mate, met, mat.

Vinod Sharma

unread,
Jul 21, 2013, 6:09:26 AM7/21/13
to hindian...@googlegroups.com
समाधान यही है

PEN= पॆन
PAIN= पेन
PAN=   पैन
POT =   पॉट
POST=  पोस्ट





2013/7/21 Jai Pushp <jai....@gmail.com>



--
bestregards.gif
विनोद शर्मा


पीयूष ओझा

unread,
Jul 21, 2013, 6:30:03 PM7/21/13
to hindian...@googlegroups.com
बढ़िया समाधान है गुणीजन बताएँ इसमें क्या कमी है।



समाधान यही है

Jagannathan Ramaswami

unread,
Aug 4, 2013, 12:31:32 PM8/4/13
to hindian...@googlegroups.com
मैं /बेस्ट सेलर/ पसंद करता हूँ और उसी को सही मानता हूँ, श्री अरविंद जी /बैस्ट सैलर/ चाहते हैं। मैंने उनका मन रखने के लिए यह भी कहा है कि वे अलग 'स्कूल' के हैं। कठिनाई का भी ज़िक्र किया कि अंग्रेज़ी तथा दक्षिण की भाषाओं के तीन उच्चारणों के लिए हिंदी में दो ही वर्ण हैं, इसी कारण विसंगति है। अरविंद जी न सिर्फ़ समस्या को सही परिप्रेक्ष्य में देखना चाहते, बल्कि अपने से भिन्न विचार वालों की खिल्ली उड़ाते हैं। (इसी तर्ज़ पर हाल ही मैँ ने एक सुप्रसिद्ध हिंदी दैनिक मेँ पढ़ा-- बेस्ट सेलर. हँसी भी आई और दया भी-- बैस्ट सैलर (बहुत बिकने वाली पुस्तक) का कैसा विद्रूप!) श्री अरविंद जी यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि वे निम्नलिखित शब्दों में लिपि के स्तर पर कैसे अंतर करना चाहेंगे-
bed  bad;      set  sat;     rent   rant;      vet   vat;       bend    band;      send   sand;      betting    batting;     blessed   blast;    blend   bland;    neck   knack
कृपया वे यह भी बताएँ कि वे लिम्लिखित शब्दों को हिंदी में कैसे लिखेंगे-
representation          mesmerism         entertainment             permanent           extra-terrestrial
जगन्नाथन


2013/7/22 पीयूष ओझा <piyus...@gmail.com>

Yogendra Joshi

unread,
Aug 4, 2013, 1:57:17 PM8/4/13
to hindian...@googlegroups.com
आपने कुछ शब्द-युग्मों के उदाहरण दिए हैं। आप इन पर गैर करें : (mat, mate, met), (rat, rate, ret), (pat, pate, pet), (pan, pane/pain, pen), (lash, lace, less), इत्यादि। इन सभी शब्द-त्रिकों में स्वर उच्चारण भिन्न हैं। कैसे व्यक्त करेंगे?

दरअसल हम इस बात को नजरांदाज कर देते हैं कि दुनियां की सभी भाषाओं के ध्वनिसमुच्चय एक ही नहीं होते हैं। मनुष्य एक-दूसरे से स्पष्टतः भिन्न अनेकों ध्वनियां मुख से निकाल सकता है, किंतु उसकी भाषा में वे सभी सम्मिलित नहीं होतीं। उदाहरणार्थ बर्मी (Burmese) भाषा में ’र’ की ध्वनि नहीं है, जैसा मुझे बताया गया है, वे ’र’ के स्थान पर ’य’ ही बोलते हैं। जर्मन भाषा के umlaut (ä, ö, ü) के उच्चरण न हिंदी में हैं और न ही अंगरेजी में। तामिल में संस्कृत वर्णमाला के पांचों वर्गों की महाप्राण ध्वनियां हैं ही नहीं। आदि-आदि। 

आप दूसरी भाषाओं की कुछ ध्वनियों को व्यक्त करने के लिए अपने वर्णमाला का विस्तार कर सकते है, अथवा शब्दों के मूल उच्चारण को भुलाकर उन्हें अपनी निकटतम ध्वनियों से व्यक्त करने से ही संतुष्ट हो सकते। मेरा अनुमान हैं शायद ही किसी भाषा में पहला विकल्प चुना गया है। दूसरा विकल्प ही सामान्यतः अपनाया जाता है, जब तक कि विशेष आवश्यकता न हो। कई मौकों पर diacritic के प्रयोग की प्रथा अपनाई गयी है, जैसे प्राचीन संस्कृत ग्रंथों को लैटिन लिपि में लिखने के लिए।

विदेशी शब्दों के सही-सही उच्चरण की बात हर मौके पर करना मेरी दृष्टि में उचित नहीं है। हां किसी निकटतम उच्चारण पर सहमत होना वांछित अवश्य होगा।



4 अगस्त 2013 10:01 pm को, Jagannathan Ramaswami <vrj.n...@gmail.com> ने लिखा:

Vijay K. Malhotra

unread,
Aug 5, 2013, 1:07:15 AM8/5/13
to hindian...@googlegroups.com, ajai, capt raghuvanshi, Hindi Vimarsh, Hindishikshakbandu googlegroup, Shrish Jaswal, dar...@cdac.in, WORLD HINDI SECRETARIAT, mkv1@york.ac.uk Verma, Bansal, Manju, kailash budhwar, ajit gupta, Akshey Kumar, ANAND KUMAR, A Kumaran, con...@fullcirclebooks.in, ln baijal, Beena Sharma, vashini Sharma, Ashok Chakradhar, Divik Ramesh, Dr ved partap Vaidik, Dr. Rajesh Kumar, Girish Nath Jha, Harsha Wadatkar, Herman van Olphen, Surendra Gambhir, Hideaki Ishida, American Institute of Indian Studies, Lalit Kumar, Shankar, Jishnu, Anil joshi, jyotsna raghuvanshi, Priyanka Jain, Omkar N. Koul, LOCHAN MAKHIJA, lenali CDAC, milind ranade, Aditi Mukherjee, Om Thanvi, Pavanaja U B, Pravasi Today, Anjani Ray, Sandhya Bhagat, sunita pahuja, Sanskriti UK, SUDHA USA, Umesh Agnihotri, DrKavita Vachaknavee
मैं भी इस बारे में अरविंद जी के स्कूल का ही हूँ.
मैं बेस्ट सेलर के बजाय  बैस्ट सैलर पसंद करता हूँ.
मेरी दृष्टि में निम्नलिखित अंग्रेज़ी शब्दों को इस तरह से हिंदी में लिप्यंतरित किया जाना चाहिए.  
representation     रिप्रेज़ैंटेशन      mesmerism     मैस्मरिज़्म     entertainment   ऐंटरटेनमैंट           permanent      परमानैंट    extra-terrestrial ऐक्स्ट्रा-टेरैस्ट्रियल
 
विजय

2013/8/4 Jagannathan Ramaswami <vrj.n...@gmail.com>



--
विजय कुमार मल्होत्रा
पूर्व निदेशक (राजभाषा),
रेल मंत्रालय,भारत सरकार
Vijay K Malhotra
Former Director (Hindi),
Ministry of Railways,
Govt. of India
आवास का पता / Residential Address:
Vijay K Malhotra
WW/67/SF,
MALIBU TOWNE,
SOHNA ROAD,
GURGAON- 122018
Mobile:91-9910029919
          91-9311170555


URL<www.vijaykmalhotra.mywebdunia.com>

Suyash Suprabh (सुयश सुप्रभ)

unread,
Aug 5, 2013, 1:19:49 AM8/5/13
to hindian...@googlegroups.com
चाहे 'बैस्ट सैलर' हो या 'इंटरनैट', इन वर्तनियों को सही मानने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। 'इंटरनैट' जैसी वर्तनी को भाषाविज्ञान की दृष्टि से भी सौ प्रतिशत शुद्ध वर्तनी नहीं कहा जा सकता है। पत्र-पत्रिकाओं और सरकारी प्रकाशन में 'इंटरनेट' का ही प्रयोग होता है। कुछ अपवाद ज़रूर होंगे। भाषा में संख्याबल को कभी कम करके नहीं आँकना चाहिए। 

सादर,

सुयश 


5 अगस्त 2013 10:37 am को, Vijay K. Malhotra <malho...@gmail.com> ने लिखा:
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