एक लुप्तप्राय अमेरिकी इंडियन आदिवासी भाषा को बचाने की कहानी

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Vinod Sharma

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Aug 5, 2012, 11:46:04 AM8/5/12
to hindian...@googlegroups.com
किसी समय पश्चिमी अमेरिका में प्रमुखता से बोली जाने वाली एक अमेरिकी इंडियन भाषा सिलेत्ज़-डे-नी लुप्तप्रायः थी। आज
उस भाषा को बोलने वाले मात्र 5 व्यक्ति हैं। एक आदिवासी बड लेन ने सात वर्ष तक लगातार एक बोलते शब्दकोश पर काम
किया और इस भाषा की 10,000 से अधिक उच्चारणयुक्त प्रविष्टियाँ करके अन्यथा विलुप्त होने जा रही भाषा को नया जीवन
प्रदान किया है। पूरा आलेख पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ। यह अनेक विलुप्तप्राय भारतीय आदिवासी भाषाओं को बचाने की मुहिम
में सहायक हो सकता है।
सादर,
विनोद शर्मा

Yogendra Joshi

unread,
Aug 5, 2012, 12:41:06 PM8/5/12
to hindian...@googlegroups.com
बहुत कम लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा को मजबूत भाषा के संपर्क में आने पर विलुप्त होना ही है देर-सवेर। व्यापक स्तर पर बोली जाने वाली भाषा (जैसे हिंदी) को भी अधिक प्रभावशाली भाषा (जैसे अंगरेजी) से खतरा रहता ही विकृत होने का और अपना मौलिक स्वरूप खोने का। जैसे सांस्कृतिक ’अतिक्रमण’ आम दुर्घटना है वैसे ही भाषायी प्रदूषण भी। आप पुरातात्विक अवशेषों को तो बचा सकते हैं लेकिन भाषाओं को नहीं। - योगेन्द्र जोशी

5 अगस्त 2012 9:16 pm को, Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com> ने लिखा:

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