हिंदी समूह सदस्यों के प्रति,
संयुक्ताक्षर ‘ज्ञ’ = ज्+ञ के बारे में इतना कहना है कि ‘ज’ की भांति ‘ञ’ भी स्पृष्ट-तालव्य, घोष, अल्पप्राण व्यंजन है । अंतर केवल यह है कि ‘ज’ अनुनासिक नहीं है जब कि ‘ञ’ अनुनासिक है । अतः दोनों को उच्चारित करने में समान प्रयत्न करना पड़ता है, इस अंतर के साथ कि ‘ञ’ के मामले में नासा गुहा (nasal cavity) में भी कंपन होते हैं । इस तथ्य के अनुरूप ही ‘ञ’ का उच्चारण किया जाना चाहिए और उसी के अनुसार उसे ‘रोमन’ में लिखा जाना चाहिए । तदनुसार विशेषक चिह्न (diacritical mark) को प्रयोग में लेते हुए
‘ज्ञ’ = jña ।
इस विषय पर किंचित् विस्तार से मैंने
अन्यत्र (क्लिक करें) लिखा है । - योगेन्द्र जोशी