संस्कृत में ‘इति’ का प्रयोग आम प्रचलन में है । इसका तुल्य शब्द हिंदी या अंग्रेजी में है भी इसमें मुझे शंका है । यह बहुधा किसी कथन को इंगित करने में quotes की तरह की भूमिका निभाता है, जैसे "सम्प्रति अनेकाः भारतीयजननेतारः कदाचारलिप्ताः सन्ति इति वार्ता सर्वत्र श्रूयते" में "सम्प्रति ... सन्ति" कही गयी बात है और इति उसे दर्शाता है । कुछ इसी प्रकार के भाव को एकल शब्दों, पदबंधों आदि के साथ प्रयुक्त होने पर व्यक्त करता है, "रामायणम् इति ग्रन्थः आदिकाव्यम्" । आदि शब्द के मुख्य अर्थ हैं ‘आरंभिक’, ‘पहला’, ‘प्रमुख’, जैसे आद्यन्त (= आदि+अन्त) आदिमानव, आदिम में । इसका दूसरा बहुप्रचलित अर्थ है ‘बगैरह’, ‘इसी प्रकार और भी’ । इत्यादि = इति+आदि के प्रयोग का अर्थ होगा कि आप कह रहे हैं "ये सब जो स्पष्टतः बताए गये हैं और उसके अतिरिक्त उसी प्रकार से अन्य" । जब केवल ‘आदि’ प्रयुक्त हो तो अर्थ निकलेगा "ये (सूचिबद्ध) और इसी प्रकार अन्य भी" । अंततः दोनों में एक ही अभिप्राय निहित है । संस्कृत में कई स्थलों पर इति के प्रयोग को छोड़्ने पर भी अर्थ वही रहता है । मेरी समझ में इसका प्रयोग बहुधा जोर डालने या स्पष्टता लाने के उद्देश्य से होता है । - योगेन्द्र जोशी