ये और ए का प्रयोग ( लिये या लिए) (diference in using ye or e)

12,800 views
Skip to first unread message

p1j [पवन झा]

unread,
Jul 27, 2009, 7:39:47 AM7/27/09
to हिंदी (Hindi)
हिन्दी में कुछ शब्दों (जैसे लिये/लिए, गये/गए, दिये/दिए) में ये और ए
के प्रयोग के कुछ नियम हैं क्या?

मुझे इतना पता है कि जब दो एक जैसे शब्द एक के बाद एक आते हैं तो पहले
में ये और दूसरे मे ए का उपयोग होता है (जैसे, लिये गये को बजाय लिये
गए.. मगर जहां एक ही शब्द उपयोग मे आ रहा हो.. क्या दोनो मे से किसी भी
एक प्रकार का उपयोग उचित है?

जैसे क्या "मैने तेरे लिये" या "मैने तेरे लिए" दोनो सही हैं? और दोनो
मे से कोई भी उपयोग में लिया जा सकता है?

धन्यवाद!
पवन

Yogendra Joshi

unread,
Jul 27, 2009, 10:25:04 AM7/27/09
to hi...@googlegroups.com
"लिए/लिये, गए/गये, दिए/दिये आदि। सही क्या है?" मेरी टिप्पणी

जहां तक ‘उसके लिए’ (संप्रदान कारक हेतु) जैसे पदबंधों में ‘लिए’ का सवाल है, यह मुझे सही लगता है ‘लिये’ की तुलना में । यह अपरिवर्तनीय है और उसका ‘लेना’ क्रिया धातु से कोई संबंध नहीं है ।

किंतु ‘लेना’, ‘जाना’, ‘देना’ से बने क्रियापदों के लिए ‘लिये’ इत्यादि उचित तथा वैज्ञानिक लगते हैं । हिन्दी-समूह के पुराने पत्रों में मैं पढ़ चुका हूं कि आधिकारिक मानक हिंदी में ‘लिए’ आदि की संस्तुति है । मेरा तर्क दो विचारणीय बिंदुओं पर आधारित है । पहला तो यह है कि ‘जाना’ से जब आप ‘गया’ (या गआ?) तथा ‘गयो’ (स्थानीय बोली में प्रयुक्त । या गओ?) स्वीकारते हैं, तो नियमों की एकरूपता के लिए ‘गयी’, ‘गये’ क्यों ठीक नहीं समझते हैं ?

दूसरा बिंदु यह है कि व्यंजन ‘य, र, ल, व’ स्वर ‘इ, ऋ, ऌ, उ’ के क्रमशः समस्थानिक हैं । ऐसी स्थिति में ‘य्+ई’ के उच्चारण ‘यी’ तथा ‘ई’ में अंतर साफ-साफ मालूम नहीं पड़ता है । यही बात ‘वू’ एवं ‘उ’ के साथ भी है, वशतें कि आप ‘व’ का उच्चारण अंगरेजी के W (labial plosive) के समान करें न कि V (labiodental fricative) जैसा । ‘र्+ऋ’ के साथ भी यही है, जो कइयों को ‘रि’ सुनाई देता है (दरअसल बोला ही वैसे जाता है!) लौकिक संस्कृत तथा हिंदी में ‘ऌ’ तो लुप्तप्राय है । ‘ऋ’ भी केवल संस्कृत मूल के शब्दों तक सीमित है । परंतु इस प्रकार की समानता का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि ‘कायिक’ के स्थान पर ‘काइक’ और ‘भावुक’ के बदले ‘भाउक’ उचित मान लिया जाए (? मैं जाये लिखना चाहूंगा!)
- योगेन्द्र

२७ जुलाई २००९ ५:०९ PM को, p1j [पवन झा] <pava...@gmail.com> ने लिखा:

Vinay

unread,
Jul 27, 2009, 12:35:18 PM7/27/09
to हिंदी (Hindi)

On Jul 27, 7:39 am, p1j [पवन झा] <pavan...@gmail.com> wrote:
> हिन्दी में कुछ शब्दों (जैसे लिये/लिए, गये/गए, दिये/दिए)  में ये और ए
> के प्रयोग के कुछ नियम हैं क्या?
>

पवन, ये नियम से ज़्यादा 'स्टाइल-गाइड' का क्षेत्र है. यहाँ देखो:

http://www.giitaayan.com/hindispelling.asp

"8. Where the use of glidal य, व is optional, it may be avoided, i.e.,
in the words like गए-गये, नई-नयी, हुआ-हुवा, etc. using only the former
(vowel) forms. This rule is applicable in all cases viz., verbal,
adjectival and undeclinable forms."

"Rule 8 forbids the use of glidal य-व where it is optional. This
prohibition is applicable in respect of all types of words in all
cases e.g. दिखाए गए, राम के लिए, पुस्तक लिए हुए, नई दिल्ली."

उम्मीद है इससे कुछ स्पष्ट हुआ होगा कि कम से कम एक स्टाइल गाइड क्या
कहती है. यानी जहाँ भी दोनों रुपों के ठीक होने की बात आए और एक चुनना
हो, वहाँ य-व की बजाय स्वरों का प्रयोग किया जाना चाहिए.

नागरी में, लिपि की ध्वन्यात्मकता की वजह से, अधिकतर बातों का जवाब
प्रचलित उच्चारण में ढूँढ़ा जा सकता है. इस नियम के पीछे भी यही बात काम
कर रही है.


> मुझे इतना पता है कि जब दो एक जैसे शब्द एक के बाद एक आते हैं तो पहले
> में ये और दूसरे मे ए का उपयोग होता है (जैसे, लिये गये को बजाय  लिये

मेरी जानकारी के हिसाब से ऐसा कुछ नहीं है.

> गए.. मगर जहां एक ही शब्द उपयोग मे आ रहा हो.. क्या दोनो मे से किसी भी
> एक प्रकार का उपयोग उचित है?
>
> जैसे क्या "मैने तेरे लिये" या "मैने तेरे लिए" दोनो सही हैं?  और दोनो
> मे से कोई भी उपयोग में लिया जा सकता है?
>

ठीक तो दोनों हैं. कोई इन्हें ग़लत नहीं कह सकता, यानी मास्टर जी किसी एक
के लिए नंबर नहीं काट सकते. पर आधुनिक उच्चारण के हिसाब से इनके 'ए'
वाले संस्करण बेहतर (उच्चारण के ज़्यादा पास) माने जाते हैं. इसलिए
आधुनिक उपयोग में "मैंने तेरे लिए" अनुशंसित (recommended) है.

विनय

> धन्यवाद!
> पवन

Suyash Suprabh

unread,
Aug 1, 2009, 3:12:39 AM8/1/09
to हिंदी (Hindi)
केंद्रीय हिंदी निदेशालय ने वर्ष 2003 में देवनागरी लिपि तथा हिंदी
वर्तनी के मानकीकरण के लिए अखिल भारतीय संगोष्ठी का आयोजन किया था। इस
संगोष्ठी में 'ये' और 'ए' के प्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित नियम
निर्धारित किए गए थे :

"2.13 श्रुतिमूलक 'य', 'व'

2.13.1 जहाँ श्रुतिमूलक य, व का प्रयोग विकल्प से होता है वहाँ न किया
जाए, अर्थात् किए : किये, नई : नयी, हुआ : हुवा आदि में से पहले
(स्वरात्मक) रूपों का प्रयोग किया जाए। यह नियम क्रिया, विशेषण, अव्यय
आदि सभी रूपों और स्थितियों में लागू माना जाए। जैसे :– दिखाए गए, राम के
लिए, पुस्तक लिए हुए, नई दिल्ली आदि।

2.13.2 जहाँ 'य' श्रुतिमूलक व्याकरणिक परिवर्तन न होकर शब्द का ही मूल
तत्व हो वहाँ वैकल्पिक श्रुतिमूलक स्वरात्मक परिवर्तन करने की आवश्‍यकता
नहीं है। जैसे :– स्थायी, अव्ययीभाव, दायित्व आदि (अर्थात् यहाँ स्थाई,
अव्यईभाव, दाइत्व नहीं लिखा जाएगा)।"

अन्य नियम देखने के लिए निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करें :

http://sites.google.com/site/hinditranslationservice/manaka-hindi-vartani-standard-hindi-spelling-

इनमें से कुछ नियम हिंदी से संबंधित तकनीक में आए परिवर्तनों के कारण
अप्रासंगिक हो गए हैं।

सादर,

सुयश
09868315859
http://anuvaadkiduniya.blogspot.com

UVR

unread,
Aug 4, 2009, 12:42:51 AM8/4/09
to हिंदी (Hindi)
On Jul 27, 9:35 am, Vinay <vinaypj...@gmail.com> wrote:
> On Jul 27, 7:39 am, p1j [पवन झा] <pavan...@gmail.com> wrote:
>
> > हिन्दी में कुछ शब्दों (जैसे लिये/लिए, गये/गए, दिये/दिए)  में ये और ए
> > के प्रयोग के कुछ नियम हैं क्या?
>
> पवन, ये नियम से ज़्यादा 'स्टाइल-गाइड' का क्षेत्र है. यहाँ देखो:
>
> http://www.giitaayan.com/hindispelling.asp
>
> "8. Where the use of glidal य, व is optional, it may be avoided, i.e.,
> in the words like गए-गये, नई-नयी, हुआ-हुवा, etc. using only the former
> (vowel) forms. This rule is applicable in all cases viz., verbal,
> adjectival and undeclinable forms."
>
> "Rule 8 forbids the use of glidal य-व where it is optional. This
> prohibition is applicable in respect of all types of words in all
> cases e.g. दिखाए गए, राम के लिए, पुस्तक लिए हुए, नई दिल्ली."
>

इस संदर्भ में एक प्रश्न पूछना चाहूँगा, विनय. "May be avoided" से
"forbid" और "prohibition" का अर्थ निकालना कहाँ तक जायज़ है?

आपके प्रश्न ने एक याद ताज़ा कर दी. यह क़िस्सा उस ज़माने का है जब ग़ालिब
जवान thaa :) देवनागरी 'orthography' पर लिखी गई किसी पुरानी किताब
('पुरानी' पर ध्यान दें) में यह लिखा हुआ पढ़ा था कि "स्वर" चिह्न
(vowels) शब्द के प्रारंभ के अतिरिक्त और किसी भी स्थान में लिखे न जायें
-- शब्द के बीचों-बीच तो हरगिज़ नहीं. इस नियम के चलते न केवल हिंदी के
शब्द 'जाये / गये' वाले रूप में लिखे जाते थे, बल्कि उर्दू से लिये गये
लफ़्ज़ों के देवनागरी रूप भी इसी के तहत तय किये गये: मसलन शायरी, दायरा,
ज़ायक़ा, पायदान, ...

ख़ैर, समय के साथ-साथ हिंदी के शब्दों के लिखने का तरीक़ा तो बदल गया,
परन्तु उर्दू के लफ़्ज़ ज्यों के त्यों रहे. मिसाल के तौर पर, दायरा दायरा
ही रहा, दाएरा नहीं बना, शाइरी, पाएदान इत्यादि आज केवल उन्हीं किताबों
में लिखे मिलते हैं जिनमें उनके मूल उर्दू उच्चारण को दर्शाने का प्रयास
हो.

-UVR.

Vinay

unread,
Aug 4, 2009, 10:28:04 AM8/4/09
to हिंदी (Hindi)

On Aug 4, 12:42 am, UVR <u...@hotmail.com> wrote:
> On Jul 27, 9:35 am, Vinay <vinaypj...@gmail.com> wrote:
>
>
>
>
>
> > On Jul 27, 7:39 am, p1j [पवन झा] <pavan...@gmail.com> wrote:
>
> > > हिन्दी में कुछ शब्दों (जैसे लिये/लिए, गये/गए, दिये/दिए)  में ये और ए
> > > के प्रयोग के कुछ नियम हैं क्या?
>
> > पवन, ये नियम से ज़्यादा 'स्टाइल-गाइड' का क्षेत्र है. यहाँ देखो:
>
> >http://www.giitaayan.com/hindispelling.asp
>
> > "8. Where the use of glidal य, व is optional, it may be avoided, i.e.,
> > in the words like गए-गये, नई-नयी, हुआ-हुवा, etc. using only the former
> > (vowel) forms. This rule is applicable in all cases viz., verbal,
> > adjectival and undeclinable forms."
>
> > "Rule 8 forbids the use of glidal य-व where it is optional. This
> > prohibition is applicable in respect of all types of words in all
> > cases e.g. दिखाए गए, राम के लिए, पुस्तक लिए हुए, नई दिल्ली."
>
> इस संदर्भ में एक प्रश्न पूछना चाहूँगा, विनय.  "May be avoided" से
> "forbid" और "prohibition" का अर्थ निकालना कहाँ तक जायज़ है?
>

मुझे नहीं लगता कि यह जायज़ है पर यह अर्थ मैंने नहीं निकाला है :).
मैंने यह "explanation" उसी पन्ने से उद्धृत किया है. यह मूल मानक
दस्तावेज़ का ही हिस्सा है. मेरे ख़याल से नियम की भाषा ज़्यादा ठीक है.
क्योंकि यह नियम ऐसा नहीं जिसके लिए डंडा लेकर पीछे पड़ा जाए.

विनय

> आपके प्रश्न ने एक याद ताज़ा कर दी.  यह क़िस्सा उस ज़माने का है जब ग़ालिब


> जवान thaa :) देवनागरी 'orthography' पर लिखी गई किसी पुरानी किताब

> ('पुरानी' पर ध्यान दें) में यह लिखा हुआ पढ़ा था कि "स्वर" चिह्न


> (vowels) शब्द के प्रारंभ के अतिरिक्त और किसी भी स्थान में लिखे न जायें
> -- शब्द के बीचों-बीच तो हरगिज़ नहीं.  इस नियम के चलते न केवल हिंदी के
> शब्द 'जाये / गये' वाले रूप में लिखे जाते थे, बल्कि उर्दू से लिये गये

> लफ़्ज़ों के देवनागरी रूप भी इसी के तहत तय किये गये: मसलन शायरी, दायरा,
> ज़ायक़ा, पायदान, ...
>
> ख़ैर, समय के साथ-साथ हिंदी के शब्दों के लिखने का तरीक़ा तो बदल गया,
> परन्तु उर्दू के लफ़्ज़ ज्यों के त्यों रहे.  मिसाल के तौर पर, दायरा दायरा

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages