मानक हिंदी के अप्रासंगिक नियम

20 views
Skip to first unread message

Suyash Suprabh

unread,
Aug 1, 2009, 4:19:58 AM8/1/09
to हिंदी (Hindi)
केंद्रीय हिंदी निदेशालय ने वर्ष 2003 में देवनागरी लिपि तथा हिंदी
वर्तनी के मानकीकरण के लिए अखिल भारतीय संगोष्ठी का आयोजन किया था। इनमें
से कुछ नियम हिंदी से संबंधित तकनीक में आए परिवर्तन व अन्य कारणों से
अप्रासंगिक हो गए हैं।

मैं सबसे पहले निम्नलिखित नियम का उल्लेख करना चाहता हूँ :

"2.1.2.5 हल् चिह्‍न युक्‍त वर्ण से बनने वाले संयुक्‍ताक्षर के
द्‍‌वितीय व्यंजन के साथ इ की मात्रा का प्रयोग संबंधित व्यंजन के तत्काल
पूर्व ही किया जाएगा, न कि पूरे युग्म से पूर्व। यथा:– कुट्‌टिम,
चिट्‌ठियाँ, द्‌वितीय, बुद्‌धिमान, चिह्‌नित आदि (कुट्टिम, चिट्ठियाँ,
द्‍‌वितीय, बुद्‍धिमान, चिह्‍नित नहीं)।

टिप्पणी : संस्कृत भाषा के मूल श्‍लोकों को उद्‍धृत करते समय
संयुक्‍ताक्षर पुरानी शैली से भी लिखे जा सकेंगे। जैसे:– संयुक्त, चिह्न,
विद्या, विद्वान, वृद्ध, द्वितीय, बुद्धि आदि। किंतु यदि इन्हें भी
उपर्युक्‍त नियमों के अनुसार ही लिखा जाए तो कोई आपत्‍ति नहीं होगी।"

मुझे उपर्युक्‍त नियम तर्कसंगत नहीं लगता है। ऐसा नियम पूर्णतया निरर्थक
होता है जिसका पालन करना संभव ही न हो। हिंदी में कुट्टिम, चिट्ठियाँ आदि
शब्द प्रचलित हैं। इन्हें अनावश्यक रूप से कुट्‌टिम और चिट्‌ठियाँ लिखना
उचित नहीं है।

मैं इस नियम के संदर्भ में अन्य सदस्यों की राय जानना चाहता हूँ।

मानक हिंदी वर्तनी के नियम निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध हैं :

http://sites.google.com/site/hinditranslationservice/manaka-hindi-vartani-standard-hindi-spelling-

सादर,

सुयश
09868315859
http://anuvaadkiduniya.blogspot.com

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages