बगलिहार बांध परियोजना को तटस्थ विशेषज्ञ की हरी झंडी
भारत द्वारा चिनाब नदी पर बनाए जा रहे बगलिहार बांध के डिजाइन को तटस्थ विशेषज्ञ प्रो0 रेमंड लैफिते ने हरी झंडी दे दी है। बगलिहार परियोजना के बारे में पाकिस्तान की आपत्तियों पर विचार करने के लिए विश्व बैंक ने तटस्थ विशेषज्ञ के रूप में प्रो0 लैफिते की नियुक्ति की थी। प्रो0 लैफिते ने कल बर्न में भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों को अपने फैसले की प्रति सौंपी।
तटस्थ विशेषज्ञ ने सिंधु जल समझौते के तहत बनाई जाने वाली परियोजनाओं के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल पर जोर दिया है और इसके लिए सुरक्षा तथा पानी के सर्वोत्तम इस्तेमाल को कारण बताया है। उन्होंने कहा कि समझौते के सामान्य नियमों के अनुसार अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और विज्ञान के नियमों को अपनाने की अनुमति है। उन्होंने बगलिहार बांध तथा पन बिजली संयंत्र की अवधारणा तथा डिजाइन के मूल्यांकन के बारे में यह टिप्पणी की थी।
तटस्थ विशेषज्ञ के फैसले में समझौते के दायरे के अंतर्गत बिजली उत्पादन के लिए पश्चिमी नदियों के पानी के कुशल इस्तेमाल के भारत के अधिकार को स्वीकार किया गया है।
भारत और पाकिस्तान की सरकारों के साथ विचार-विमर्श के बाद विश्व बैंक ने प्रो0 रेमंड लैफिते को 10 मई, 2005 को तटस्थ विशेषज्ञ नियुक्त किया था। श्री लैफिते स्विट्जरलैंड के फैडरल इंस्टीटयूट ऑफ टैक्नोलॉजी ऑफ लौसाने में प्रोफेसर हैं।
नियुक्ति के बाद के 18 महीनों के दौरान तटस्थ विशेषज्ञ ने पेरिस, जिनेवा, लन्दन, पेरिस तथा वाशिंगटन में कुल पांच बैठकें की और बगलिहार साइट तथा रुडकी स्थित इसके हाइड्रॉलिक मॉडल का अवलोकन किया। दोनों पक्षों ने विशेषज्ञ के साथ विचार-विमर्श के दौरान लिखित तथा मौखिक सबूत पेश किए।
तटस्थ विशेषज्ञ ने अन्तर्राष्ट्रीय विशाल बांध आयोग (आईसीओएलडी) के विश्व बांध रजिस्टर से 13 हजार बांधों के बारे में डाटा बेस के विश्लेषण के बाद यह तय किया कि बगलिहार साइट की हालत को देखते हुए पानी की बर्बादी को रोकने के लिए एक द्वारयुक्त निकासी की जरूरत है और साथ ही यह भी तय किया कि बाढ के पानी के भारी प्रवाह तथा भारी मात्रा में गाद जमा होने को देखते हुए बगलिहार बांध पर भारत की द्वारयुक्त निकासी व्यवस्था, द्वारों की संख्या, आकार और स्थिति सिन्धु जल समझौते के परिशिष्ट- घ में निर्धारित डिजाइन मानकों के अनुरूप हैं।
तटस्थ विशेषज्ञ ने बाढ विश्लेषण की अनिश्चितताओं, जलवायु परिवर्तन की संभावनाओं आदि को ध्यान में रखते हुए प्रति सैकेन्ड 16,500 घन मीटर पानी के प्रवाह के भारत के अनुमान को स्वीकार किया है, जबकि पाकिस्तान ने प्रति सैकेन्ड 14,900 घन मीटर पानी के प्रवाह का अनुमान पेश किया था।
तटस्थ विशेषज्ञ का मानना है कि जल निकासी व्यवस्था में न केवल बाढ नियंत्रण को ध्यान में रखा जाना है, बल्कि गाद पर नियंत्रण को भी ध्यान में रखा जाना है। आईसीओएलडी का उल्लेख करते हुए तटस्थ विशेषज्ञ ने कहा है कि अत्याधुनिक व्यवस्था के अनुसार आज के समय में बाढ के पानी की निकासी, गाद की निकासी और जलाशयों के मुहानों में गाद को न जमने देने के लिए जल कुंडों के तल में निकासी की व्यवस्था की जा सकती है।
आईसीओएलडी के दिशानिर्देशों के अनुसार तटस्थ विशेषज्ञ का मानना है कि बांध के शीर्ष पर बनी दीवाल की ऊंचाई को 1.5 मीटर कम किया जा सकता है। इस संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि भारत अच्छे पड़ोसी की भावना से पाकिस्तान के साथ इस दीवाल की ऊंचाई कम करने की पेशकश तभी कर चुका था, जब तटस्थ विशेषज्ञ नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई थी।
बगलिहार परियोजना के डिजाइन में तीन छोटे-मोटे बदलाव करने होंगे। ये बदलाव हैं- फ्री बोर्ड (बांध के शीर्ष पर बनी दीवाल) और कुंडों की ऊंचाई में कमी इन्टेक (जलाशयों के मुहाने) को ऊंचा करना। ये सभी बदलाव गणना के अधार पर तय किए गए हैं, न की मूलभूत सिध्दान्तों के आधार पर।
तटस्थ विशेषज्ञ के अन्तिम फैसले से इस बात की पुष्टि हुई है कि भारत का बगलीहार बांध डिजाइन सिन्धु जल संधि के मूल सिध्दान्तों के अनुरूप है।
तटास्थ विशेषज्ञ ने यह भी कहा है कि हर वर्ष मानसून के दौरान अनुरक्षण के लिए जलाशय का जल स्तर 818 मी. एएसएल तक लाया जा सकता है। इससे गाद प्रबंधन में आसानी होगी और परियोजना की मजबूती सुनिश्चित होगी।