भारत को दी जाने वाली नाभिकीय प्रौद्योगिकी पर प्रतिबंध
नई दिल्ली 20 नवम्बर 09
राज्य सभा
विदेश राज्य मत्री श्रीमती प्रनीत कौर ने आज राज्य सभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि ला आकिला शिखर सम्मेलन में जी-8 देशों ने अप्रसार पर एक वक्तव्य स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि जी-8 ब्लॉक के साथ भारत का कोई असैनिक नाभिकीय करार नहीं है । भारत को एनएसजी सदस्यों के साथ असैनिक परमाणु सहयोग में शामिल किए जाने हेतु स्पष्ट छूट प्रदान करने से संबंधित 6 सितम्बर, 2008 के एनएसजी के निर्णय में परिकल्पित है, सरकार ने असैनिक परमाणु सहयोग से जुड़े सभी पहलुओं के संबंध में एनएसजी के साथ विचार-विमर्श किया है । उन्होंने बताया कि होक्कयदो तोयाको में और पूर्व के शिखर सम्मेलनों के समान ही हम स्वीकार करते हैं कि सामूहिक विनाश के हथियार और उनकी डिलीवरी के साधन अभी भी वैश्विक चुनौती और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़े खतरे बने हुए हैं । अप्रसार और नि:शस्त्रीकरण लक्ष्यों को बढावा देने के लिए वर्तमान अवसरों और नई गतिशीलता का उपयोग करने के लिए कृतसंकल्प हैं ।
भारत इस बात पर बल देता है कि एनपीटी अभी भी परमाणु अप्रसार व्यवस्था का प्रमुख तत्व है और परमाणु निशस्त्रीकरण के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अनिवार्य आधारशिला है और हम अप्रसार, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग तथा निशस्त्रीकरण जैसी तीन आधारशिलाओं के उद्देश्यों को दायित्वों के प्रति अपनी पूर्ण वचनबध्दता को दोहराते हैं । हम लोग मिलकर यह कार्य करेंगे, जिससे कि वर्ष 2010 में आयोजित होने वाला एनपीटी समीक्षा सम्मेलन इस संधि की व्यवस्थाओं को संवर्धित करे और संधि की सभी आधारशिलाओं के संदर्भ में व्यावहारिक और प्राप्त किए जाने योग्य लक्ष्य निर्धारित किए जा सकें । भारत संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति द्वारा दी गयी इस घोषणा का स्वागत करता है कि उन्होंने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) का अनुसमर्थन करने का प्रयास कराने का निर्णय लिया है और हम अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा रूपरेखा के एक प्रधान उपकरण और अप्रसार तथा नि:शस्त्रीकरण के एक महत्त्वपूर्ण उपाय के रूप में सीटीबीटी को शीघ्र लागू करने और इसे सार्वभौमिक स्वरूप प्रदान करने के लिए किए जाने वाले अपने प्रयासों में तेजी लाएंगे । भारत सभी संबंधित राष्ट्रों से परमाणु हथियार परीक्षण विस्फोटों तथा अन्य प्रकार के परमाणु विस्फोटों पर स्थगन लगाने का आहवान करता है । भारत एक सुरक्षित विश्व बनाने और परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व के लिए माहौल सृजित करने के प्रति प्रतिबध्द है ।
भारत अप्रसार संधि के सभी पक्षकार राष्ट्रों का, उनके सभी संधि दायित्वों के अनुरूप परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग करने के उनके अक्षुण्ण अधिकारों की पुष्टि करता है । भारत ने ईरान के परमाणु मुद्दे पर व्यापक, शांतिपूर्ण व राजनयिक समाधान के लिए कार्य करने की अपनी वचनबध्दता को दोहराया है और वार्ता के माध्यम से इसका समाधान करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भारत जोरदार समर्थन करता है । भारत ने 25 मई, 2009 को कोरिया लोकतांत्रिक जन गणराज्य (डीपीआरके) द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण की कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा है कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प का घोर उल्लंघन है । ऐसे परीक्षण से क्षेत्र में और इसके बाहर शांति और स्थिरता को धक्का पहुंचता है ।
आतंकवादियों द्वारा डब्ल्यू एम डी प्राप्त करने का खतरा हमारी गंभीर चिन्ता का कारण बनी हुई है । भारत ने एक साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया है ताकि आतंकवादियों को कभी भी वे हथियार और संबंधित सामग्री सुलभ न हो सकें । जी 8 ऐसे क्षेत्रों में सहयोग के नए क्षेत्रों को शामिल करने के लिए भी तैयार है जहां आतंकवाद और प्रसार के खतरे सर्वाधिक हैं । खास तौर पर वैज्ञानिकों के सहयोग के माध्यम से वैश्विक डब्ल्यूएमडी ज्ञान प्रसार को रोकने के लिए हम इस क्षेत्र में एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाये जाने हेतु सिफारिशों का स्वागत करते हैं ।
भारत ने नाभिकीय सुरक्षा के संबंध में चेरनोबिल स्थल पर चल रही परियोजनाओं में पिछली शिखर बैठक के बाद की प्रगति के बारे में बताया है कि उस बैठक के बाद से हुई प्रगति को स्वीकारते हैं और यह नोट करते हुए कि उन्हें सम्पन्न किए जाने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी, हम अपनी इस वचनबध्दता को दोहराते हैं कि हम उस स्थान को स्थायी और पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित स्थान में परिवर्तित करने के लिए उक्रेन के साथ मिलकर संयुक्त प्रयास करेंगे ।