सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना
मुरैना 5 जनवरी 2006
ग्रामीण अंचलों में सामुदायिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से टिकाऊ परिसम्पत्तियों का सृजन करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ खासतौर पर जरूरतमंद श्रमिकों को अतिरिक्त मजदूरी वाले रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना संचालित की जा रही है ।
सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना का क्रियान्वयन पंचायतराज संस्थाओं के द्वारा जिला, मध्य स्तर (जनपद) एवं ग्राम स्तर पर किया जाता है । जिले को इस कार्यक्रम के तहत जो संसाधन (आवंटन) प्राप्त होता है, उसको जिला, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायतों के बीच 20:30:50 के अनुपात में विभाजित किया जाता है । जिले के अन्दर, ग्राम पंचायतों के बीच निधियों को आवंटन करते समय, ग्राम पंचायत की अनुसूचित जाति व अनुसूचित जाति को 60 प्रतिशत तथा कुल आवादी को 40 प्रतिशत तरजीह दी जाती है । योजना के तहत रोजगार चाहने वाले प्रत्येक मजदूर को मजदूरी के भाग के रूप में प्रति दिवस कम से कम 5 किलोग्राम खाद्यान्न (या किसी अन्य रूप में ) देना होता है । मजदूरी के शेष भाग का भुगतान नकद किया जाता है । कम से कम 25 प्रतिशत मजदूरी का भुगतान नकद रूप से किया जाता है ।
पंचायत राज संस्थाएं क्षेत्र की आवश्यकतानुसार कार्यों को शुरू कर सकती हैं । ग्राम पंचायते ग्राम सभा के अनुमोदन से अपनी आवश्यकता और उपलब्ध निधियों के अनुसार काम हाथ में ले सकती हैं । ग्राम पंचायतों के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत निधियों का उपयोग अनुसूचित जाति व अनुसूचित जन जाति बहुल बस्तियों में बुनियादी ढांचों के विकास पर व्यय करना अनिवार्य हैं । साथ ही जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के हिस्से की साढ़े 22 प्रतिशत निधियों से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति वर्गों के ऐसे परिवारों को व्यक्तिगत रूप से लाभान्वित कराये जाने का प्रावधान है, जो गरीबी रेखा के नीचे बसर कर रहे हैं । योजना के तहत उक्त प्रकार के अनुसूचित जाति / अनुसूचित जन जाति के परिवारों की निजी भूमि पर उनके उत्थान के लिए विकास कार्य कराये जा सकते हैं । योजना के अन्तर्गत 30 प्रतिशत रोजगार के अवसर महिलाओं के लिए आरक्षित करके विशेष सुरक्षा सुनिश्चित की गई है ।
यद्यपि निर्माण कार्यों की लागत संबंधी कोई उच्चत्तम सीमा नहीं है, फिर भी उनका आकार, लागत और स्वरूप ऐसा होना चाहिए, कि वे एक वर्ष की अवधि में और अपवाद स्वरूप अधिकत्तम दो वर्षों की अवधि में पूरे किये जा सकें । ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यो का स्वरूप इस प्रकार का होना चाहिए कि उसमें उच्च स्तरीय तकनीकी साधन आदि शामिल न हों । शुरू किये गये कार्य संबंधित पंचायत की समूची वाषर्िाक कार्य योजना में रखे जाना चाहिए । कार्यों के निष्पादन में ऐसी मशीनों के उपयोग की अनुमति नहीं है जिनसे मजदूरी के अवसर कम होते हैं । साथ ही कार्य निष्पादन में विचौलियों/ मध्यवर्ती ऐसेन्सियों को नियुक्त नहीं किये जाने का भी प्रावधान है ।
सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में धार्मिक कार्यों के लिए भवन,स्मारक,स्मृति स्थल, प्रतिमा, मेहराब/स्वागत द्वार, पुल,स्कूल व कॉलेज भवन,सड़कों पर तारकोल बिछाने संबंधी कार्य करना प्रतिबंधित है ।
कार्यक्रम की निगरानी नियमित रूप से जाती है । इसके लिए विभागीय निगरानी के अलावा राज्य तथा जिला स्तारों पर निगरानी के लिए सतर्कता समितियां गठित की गई हैं । राज्य तथा केन्द्र सरकार के अधिकारियों द्वारा भी कुछ कार्यों का निरीक्षण किया जाता है ।
ग्राम पंचायत स्तरीय कार्यों के लिए सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना संबंधी कार्य योजना ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित होनी चाहिए । कार्यक्रम आयोजना, कार्यन्वयन, निगरानी एवं सर्वेक्षण संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए ग्राम सभा की बैठक एक नियत तारीख, समय व स्थान पर होना चाहिए । इस बैठक में ग्रामीण समुदाय का प्रत्येक सदस्य भाग ले सकता है । ग्राम सभा को इस योजना के कार्यों के कार्यान्वयन से संबंधी जानकारी देना अनिवार्य है ।