***राजीव तनेजा***
दिल तेरा दिवाना है सनम
कैसे कहूँ कितना पुराना है ये चमन
यूँ समझ लो कि गर 19 को हो तुम
तो तुमसे बरसों बरसों पुराना है अपन
देखता हूँ जब-जब मोहिनी सूरत तेरी
दिल मेरा बाग-बाग हो उठता है
कैसे कहूँ कि...
बत्तीसी तो हलक के अन्दर होती है
और जबड़ा मुँह के बाहर होता है
***राजीव तनेजा***
Rajiv Taneja
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