"चार महिलाए"

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Lalit Karma

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Sep 29, 2011, 9:04:20 AM9/29/11
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हिम्मत नही हो पा रही थी कि आप सब के बीच कोई रचना भेजू| आप सब को पढ़ कर कुछ यूँ चल दी कलम कि ऐसा लगा कुछ बना है सो हिम्मत कर आप सब को एक छोटा सा प्रयास प्रेषित है| कृपया बच्चा जानकर माफ़ करेंगे| धन्यवाद|




"चार महिलाए"

गीली मिट्टी खोदती है,
चार महिलाए,
बातें भी करती जाती,
ये चार सबलाए|१|
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उनमे से एक कहती,
पैसे मिले तो काम करो,
नही तो, नही बोल दो,
फ़ोकट में यूँ न मरो|२|
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गड्ढा करने का काम मिला,
मंदिर की नीवं का,
पहले इससे और काम था,
भरण-पोषण करती है ऐसे जीव का|३|
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हँसती-मुस्कुराती, करती काम,
दिखता न दिल का दुःख,
मगन काम-बात में,
शायद इसी में मिलता सुख|४|
---
कितने ही काम करती,
यह उदाहरण है बस एक
जीविका चलाने को,
ढुंढें-देखे तो मिलेंगे अनेक|५|
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ललित कर्मा
२५/०९/२०११ २:१० pm
Best Regards
Swasth, Vyast Aur Mast

Lalit Karma
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