Fwd: jaigurudev news-29.11.2010

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Dr. VIKRAM DEV SHARMA

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Nov 29, 2010, 2:21:27 AM11/29/10
to profpa...@gmail.com, postm...@cess.ac.in, sc...@yahoo.co.in, is...@ihdindia.org, divyayog...@gmail.com, rajeeva...@rediffmail.com, pcpat...@gmail.com, virendra...@yahoo.com, hcpuro...@rediffmail.com, smile_al...@rediffmail.com, brije...@yahoo.co.in, mamg...@gmail.com, skmish...@rediffmail.com, pnat...@yahoo.co.in, rno...@gmail.com
II JAIGURUDEV II, II NAMO BUDHAYA II,  II OM VANDE MAATRAM II

Sincerely Yours:-
DR.V.D.SHARMA "Krantiveer"(Gandhian Thinker)
Associate Professor in MBA(Bus.Economics)
Faculty of Management Studies
VBS Purvanchal University Jaunpur (U.P.)
Mob.991983533,E-mail: e-mail:drv...@gmail.com

---------- Forwarded message ----------
From: Baba Jaigurudev <babajai...@gmail.com>
Date: 2010/11/28
Subject: jaigurudev news-29.11.2010
To: Jaigurudevworld-Mathura <jaigurudevw...@googlegroups.com>


जयगुरूदेव समाचार
मथुरा 29 नवम्बर 2010
   परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी महाराज आश्रम पर हैं। सेवाओं का काम
बराबर चल रहा है। मन्दिर में बहुत सुन्दर सजावट हो रही है। पहली बार
मन्दिर के सेवादार मन्दिर की संपूर्ण सजावट स्वयं कर रहे हैं। रात्रि के
समय सजावट को जगमगाकर देखा जाता है। दृश्य अतिसुन्दर सुहाना लगता है।
बाहर से आने वाले सेवादारों का सहयोग भी सभी सेवाओं में मिल रहा है।
आगामी पावन भण्डारा हेतु सभी सेवाओं का विस्तार हो रहा है। जलकल,
चिकित्सा, बिजली, भण्डारा, सुरक्षा, व्यवस्था, पूछताछ, खोयापाया इत्यादि
सभी सेवाऐं सुचारू रूप से व्यवस्थित चल सकें इसके लिए सभी तन-मन, धन से
लगे हैं।
सत्संग-परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी महाराज-1999 (भाग-18)
   तो यह देश जो सेवा आजकल हो रही है जो आप घूम घूमकर यह सेवा मुल्क की
करते देख रहे हैं यह सब स्वार्थ की है। किसी ने दो लाख कमाय किसी ने चार
लाख  कमाया किसी ने दस लाख कमाया। किसी ने एक करोड़ कमाया, किसी ने दो
करोड़ कमाया और अगर उनसे पूछा जाऐ कि तुम्हें आज से पाँच वर्ष पहले
रिक्शे, इक्के और तांगा के लिए किराया मिलता था तो कहेंगे कि नहीं मिलता
था। आजकल देख लीजिऐ आप पाँच करोड़ और दस करोड़ ? और इतना गहरा कूँआ हो गया
है समुद्र बन गया कि मुल्क का मुल्क उसके अन्दर उतर आया है तब भी आप कहते
हैं कि शान्ति नहीं।
   तो बताइये यह हालत है। तो सेवा कहाँ हो रही है ? सेवा तो कहीं है ही
नहीं। अब जो महात्मा जो वास्तव में सत्यता के रूप में और वास्तव में
शान्ति के रूप में प्रचार करना चाहते हैं तो यह लोग उसका दमन कर देते
हैं। नहीं! यह आपका उपदेश जो है वह बिलकुल गलत है। यह सत्यता का उपदेश
नहीं है। आप धर्म का उपदेश नहीं करते यह तो लोगों को पाप का पाठ पढ़ाया
करते हैं।
   यह क्या लोगों ने पहलू पकड़ लिया है। ऐसा पहलू पकड़ा है कि इसका फल जो
है आपके सामने बहुत थोड़े दिन आ जाएगा। मामला ज्यादा दिन तो चलता नहीं है।
ज्यादा तो नहीं चली भी नहीं। मैंने आपको मिसाल दी न। जब कौरवों का राज्य
था, अब कौरवों का राज्य नहीं रहा। कौरवों के राज्य के बाद हिन्दू आए उनका
भी राज्य नही रहा। मुसलमान बादशाहत आई वह भी नहीं रही। और भी बहुत से लोग
आए वही भी नहीं रहे। अरे भाई ! तुम क्या रह जाओगे इस सृष्टि के ऊपर में!
पता नहीं कितने आए और कितने गए मगर यह है कि तुम आए थे किस लिए। जिस लिए
तुम आए थे किस लिए जिए तुम आए थे वह काम नहीं किया।-(समाप्त)

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