Fwd: jaigurudev news-02.12.2010

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Dr. VIKRAM DEV SHARMA

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Dec 2, 2010, 12:09:48 PM12/2/10
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II JAIGURUDEV II, II NAMO BUDHAYA II,  II OM VANDE MAATRAM II

Sincerely Yours:-
DR.V.D.SHARMA "Krantiveer"(Gandhian Thinker)
Associate Professor in MBA(Bus.Economics)
Faculty of Management Studies
VBS Purvanchal University Jaunpur (U.P.)
Mob.991983533,E-mail: e-mail:drv...@gmail.com

---------- Forwarded message ----------
From: Baba Jaigurudev <babajai...@gmail.com>
Date: 2010/12/1
Subject: jaigurudev news-02.12.2010
To: Jaigurudevworld-Mathura <jaigurudevw...@googlegroups.com>


जयगुरूदेव समाचार
मथुरा 2 दिसम्बर 2010
   जयगुरूदेव आश्रम पर वर्ष में प्रमुख रूप से तीन सत्संग कार्यक्रम
होते हैं। पहला होली, दूसरा गुरूपूर्णिमा और तीसरा पावन भण्डारा। नाम योग
का रास्ता देकर जीवों को निजघर दर्शाने वाले परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी
महाराज इन अवसरों पर ऊंचा आध्यात्मिक सत्संग देते हैं। कार्यक्रम के अवसर
पर आने वाले लोगों का दृश्य देखने लायक होता है। करोडों की संख्या में
यहां लोग विभिन्न प्रांतों व जिलों से आते हैं। बहुत से सत्संगी प्रेमी
विदेशों में जो रह रहे हैं वे भी इन अवसरों पर आकर अमृत वचनों का लाभ
लेते हैं। नामयोग साधना मन्दिर के  इर्द-गिर्द व आश्रम के अन्दर इतनी
भारी भीड़ एकत्र हो जाती है कि पांव रखने को जगह नहीं होती। जिसे जहां जगह
मिलती है वह वहीं अपना पड़ाव डाल देता है। मन्दिर के चारों ओर भारी संख्या
में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। भारी संख्या में टैन्ट इत्यादि लगाने के
बाद भी लोग आस्था में तल्लीन हो खुले मैदान में भी पड़े रहते हैं।
   आगामी 13 से 17 दिसम्बर 2010 को लगने वाले पावन वार्षिक भण्डारे की
तैयारियां जोरों पर हो रही हैं। नामयोग साधना मन्दिर को सजाया जा रहा है।
टैन्ट लगाने का काम भी आरम्भ हो गया है। बिजली की व्यवस्था के लिए
सेवादार बराबर लगे हुऐ हैं। सफाई का काम भी बराबर हो रहा है। सेवा में
सहयोग के लिए सत्संगी सेवादार बराबर आ रहे हैं।
गुरू महाराज का आदेश
   परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने आगामी पावन वार्षिक भण्डारे
की घोषणा की है। यह आध्यात्मिक सत्संग कार्यक्रम 13 से 17 दिसम्बर 2010
तक होना है। गुरू महाराज का आदेश है कि ‘‘सभी सत्संगी प्रेमी मथुरा आकर
अमोलक वचनों को सुनें। जो बाद में सत्संगियों से सुनेगा वह बहुत
पछताऐगा।’’
एक निवेदन
   सभी सत्संगी भाई-बहन गुरू आदेश को शिरोधार्य करते हुए मथुरा आकर
सत्संग के अमोलक वचनों को सुनें। सभी जिलों के जिम्मेदार गुरूभाई आप सभी
आश्रम पर इस पावन कार्यक्रम में परमार्थ की कमाई व गुरू की दया प्राप्त
करने आ रहे हैं। अतः अपने जिले के सभी सत्संगी प्रेमीयों को अपने
साप्ताहिक कार्यक्रमों में या आयोजित कार्यक्रमों में विशेष तौर पर यह
समझाने का प्रयास करें कि मथुरा आश्रम पर आकर वे कुछ निम्नलिखित बातों का
ध्यान अवश्य रखेंः-
1.    आश्रम एक पवित्र स्थान है
2.    जब आप यहां आते हैं तो आप आने पर तुरन्त इस बात पर विशेष तौर पर
गौर करें कि आपको जो स्थान, परिसर या क्षेत्र दिया गया है वह कितना साफ-
सुथरा दिया गया है। क्या आपको यहां गन्दगी दी गई है ?
3.    क्या इस स्थान पर कहीं पर कूड़ा-कचड़ा, गन्दगी, जगह-जगह गन्दी थैली,
कागज, केले के छिलके, अन्य फलों के छिलके या सड़े हुऐ फल, पत्तल-दौने
इत्यादि पड़े मिले हैं ?
4.    जो अन्न, रोटी, पराँठे, पूरी, कचौड़ी, सब्जी या अन्य खाद्य पदार्थ
भूख से मरने वालों को दुर्लभ हैं वे आपको जगह-जगह पड़े दिख रहे हैं ?
5.    क्या आपको यहां आने पर जगह-जगह सड़ांध सूंघने को मिल रही है ?
6.    जिस स्थान पर आप आकर अपना कैम्प लगाते हैं क्या वहां जगह-जगह गड्ढे
देखने को मिल रहे हैं ?
7.    आपको शौचादि के लिए जो स्थान दिया गया है क्या उसमें किसी प्रकार
की गन्दगी मिली है ?
8.    परम पूज्य स्वामी जी महाराज ने पहले समय में आपको सेवाओं में ले
जाकर स्वयं करके सब सिखाया है कि किस काम को कैसे किया जाता है। क्या
आपको वह सब याद है ?
9.    क्या आपको मालूम है कि आप जिस स्थान पर रूकते हैं और सोते, खाते-
पीते हैं उसे किसने साफ-सुथरा आपको दिया है ?
10.    क्या आपको मालूम है कि यह सब व्यवस्था किसकी है ?
नहीं मालूम ? तो जानिऐ
   जिस स्थान पर आप आते हैं और ठहर जाते हैं उस स्थान को साफ-सुथरा और
कोई नहीं स्वयं स्वामी जी महाराज साफ-सुथरा कराते हैं। और आप जब यहां से
जाते हैं तो स्वयं पूरे मेला क्षेत्र में स्वामी जी घूम-घूमकर पुनः सफाई
कराते हैं, और जब जगह-जगह रोटी, पूरी, पराँठे पड़े देखते हैं तो बहुत दुख
होता है। यह वही अन्न है जिसके लिए पूज्य गुरू महाराज ने कहा था कि ‘‘ऐसा
समय आऐगा कि अन्न को नाक से सूंघना पड़ेगा, खाने को नहीं मिलेगा।
   जगह-जगह खोदे गऐ गड्ढे बन्द कराते हैं, कूड़े की सफाई करके जलवा देते
हैं, शोचादि के लिए नियत स्थानों को साफ कराते हैं।
   हमारे गुरू महाराज ने हमको सभी कुछ तो सिखाया है। अब आपको सोचना है
कि अब तक आपने क्या सीखा।-निवेदकः-संजय शर्मा-मथुरा

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