Fwd: jaigurudev news-23.11.2010

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Dr. VIKRAM DEV SHARMA

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Nov 26, 2010, 10:45:14 AM11/26/10
to hcpuro...@rediffmail.com, smile_al...@rediffmail.com, brije...@yahoo.co.in, mamg...@gmail.com, skmish...@rediffmail.com, pnat...@yahoo.co.in, rno...@gmail.com, profpa...@gmail.com, postm...@cess.ac.in, sc...@yahoo.co.in, is...@ihdindia.org, divyayog...@gmail.com, rajeeva...@rediffmail.com, pcpat...@gmail.com
II JAIGURUDEV II, II NAMO BUDHAYA II,  II OM VANDE MAATRAM II

Sincerely Yours:-
DR.V.D.SHARMA "Krantiveer"(Gandhian Thinker)
Associate Professor in MBA(Bus.Economics)
Faculty of Management Studies
VBS Purvanchal University Jaunpur (U.P.)
Mob.991983533,E-mail: e-mail:drv...@gmail.com

---------- Forwarded message ----------
From: Baba Jaigurudev <babajai...@gmail.com>
Date: 2010/11/22
Subject: jaigurudev news-23.11.2010
To: Jaigurudevworld-Mathura <jaigurudevw...@googlegroups.com>


जयगुरूदेव समाचार
मथुरा 23 नवम्बर 2010
   वार्षिक पावन भण्डारा कार्यक्रम 13 से 17 दिसम्बर 2010 को होगा। इस
अद्    भुत सत्संग कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से आरम्भ हो गई हैं।
परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी महाराज मथुरा आश्रम पर हैं। कार्यक्रम में
विभिन्न प्रान्तों व देशों से बहुत से श्रद्धालुओं के आने की सूचनाऐं मिल
रही हैं। बृहद पैमाने पर तैयारियां का आरम्भ हो चुका है। पूज्य स्वामी जी
महाराज ने मथुरा आकर सत्संग सुनने का आदेश सत्संगी प्रेमियों को दिया है।
   सभी जिलों व प्रान्तों से सत्संगी प्रेमी अपने-अपने कैम्प के लिए
डेरों-रावटियों की सूचना आश्रम पर भिजवाऐं।
सत्संग-परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी महाराज-1999 (भाग-12)
   इसलिए सबको यह चाहिए कि हम परमार्थ के रास्ते पर चलें और सच्चा,
मजबूत और अपने जीवन को इतना पवित्र बनाने की कौशिश करें कि जिस दिन से
आपने परमार्थ पर कदम रखा जिस दिन से आप परमार्थ की सीढ़ी पर आए जिस दिन से
महात्माओं से संबंध हुआ उस दिन से लेकर कोई भी व्यक्ति यह आपको या मुझे न
जान सके कि भाई इस रास्ते पर कदम रखने के बाद भी यह अनाचार या यह दुषित
कर्म या यह दूषित भावनाआंे में बरता। यह आपका ध्यान हमेशा संगत में आकर
रहना चाहिए।
   तो क्या कह सकते हो कि मेरी आत्मा का कल्याण कर दीजिए, मैं तो यही
कहूँगा कि शरीर कल्याण के लिए व इच्छा पूर्ति के लिए इस संगत में आकर लोग
शरीक हुए और जब वह इच्छा पूर्ति नहीं हुई या और भी ऐसी बहुत सी भावनाऐं
जो संसार में अपने अन्दर में दबी रहती हैं उनकी उनकी जब पूर्ति नहीं हुई
तो आप छोड़कर फिर वही दूषित काम करने लगे। तो इससे क्या होता है? यह तो
कोई लाभ महात्मा की संगत में आने का न हुआ। इसलिए सब भाई एक रास्ते से
उतर कर चलो। जो रास्ता आता है उसमें आकर ऐसे खड़े रहे तब तो यह तुम्हारी
सिफत होगी वरना बहुत मुश्किल होगा।-(क्रमशः)

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