Fwd: jaigurudev news-01.12.2010

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Dr. VIKRAM DEV SHARMA

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Dec 2, 2010, 12:11:48 PM12/2/10
to hcpuro...@rediffmail.com, smile_al...@rediffmail.com, brije...@yahoo.co.in, mamg...@gmail.com, skmish...@rediffmail.com, pnat...@yahoo.co.in, rno...@gmail.com, profpa...@gmail.com, postm...@cess.ac.in, sc...@yahoo.co.in, is...@ihdindia.org, divyayog...@gmail.com, pcpat...@gmail.com
II JAIGURUDEV II, II NAMO BUDHAYA II,  II OM VANDE MAATRAM II

Sincerely Yours:-
DR.V.D.SHARMA "Krantiveer"(Gandhian Thinker)
Associate Professor in MBA(Bus.Economics)
Faculty of Management Studies
VBS Purvanchal University Jaunpur (U.P.)
Mob.991983533,E-mail: e-mail:drv...@gmail.com

---------- Forwarded message ----------
From: Baba Jaigurudev <babajai...@gmail.com>
Date: 2010/11/30
Subject: jaigurudev news-01.12.2010
To: Jaigurudevworld-Mathura <jaigurudevw...@googlegroups.com>


जयगुरूदेव समाचार
मथुरा 1 दिसम्बर 2010
       जयगुरूदेव आश्रम जहां जीव कल्याण का रास्ता बाबा जयगुरूदेव जी महाराज
देकर जीवात्माओं का जन्म-मरण से मुक्त होने का मार्ग बताते हैं वहीं
आश्रम में सैंकड़ों की संख्या मंे पल रही गऊऐं ,सांड व उनके बछड़े सही
मायनों में गऊशाला की परिभाषा को सत्यापित करते हैं। यहां कई बिघा
क्षेत्र में फैले गऊशाला में दुधारू गाय व सांड तथा उनके बछड़े आजन्म पलते
हैं। यहां की विषेशता है कि किसी भी बूढ़े सांड को या गाय जिसने दूध देना
बन्द कर दिया हो बेचा नहीं जाता। उन्हें अपना जीवन पूरा जीने का अधिकार
दिया जाता है। समाज में प्रचलित चलन के एकदम विपरीत किसी भी पशु को बाहर
नहीं दिया जाता। क्योंकि एसे पशुओं को बेकार होने पर वधशालाओं में काट
दिया जाता है।
       बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने ही यह हमें बताया कि यदि इन जीवों को इनकी
आयु पूरी होने से पहले काट दिया जाएगा तो इनकी आत्मा प्रेत योनि में
भटकती रहेगी और जब तक वहां रहेगी तब तक तड़पती रहेगी। जयगुरूदेव आश्रम की
गऊशाला में सभी पशु सही तरीके और व्यवस्था से रखे गए हैं। समय पर चारा,
पानी और उचित देखभाल के लिए आश्रम के सेवादार बराबर रहते हैं।
       बाबा जयगुरूदेव जी महाराज आश्रम पर हैं। मन्दिर की सजावाट का काम प्रगति
पर है। टैन्ट इत्यादि लगाने का काम आरम्भ हो गया है। सफाई की सेवा भी
बराबर चल रही है। गुरू महाराज सभी सेवाओं को स्वयं देखते हैं।
वार्षिक पावन भण्डारा 13 से 17 दिसम्बर 2010 को होगा
सत्संग में मर्यादा
       सभी प्रांतों के सत्संगी नर-नारियों को सूचित किया जाता है कि समय के
अनुसार खुद बुरे रास्ते से बचने का विचार रखें और दूसरों को भी प्रेरणा
देते चलें। अपनी देवियों को साथ लेकर सत्संग में जावें और वापस ले आवें।
किसी सत्संगी को आदेश नहीं दिया जाता है कि वह स्त्रियों और उनकी
बच्चियों से मेल-जोल करें और घरों में घुसकर बातचीत करें। जिन जिन की
बच्चियाँ 12 वर्ष या  अधिक की हैं उनकी देखभाल करें। पुरूष पुरूष से
मिलें और स्त्री स्त्री से मिलें। मर्यादा में चलने से जीवन सुखी रहेगा
और साधन पथ से अभ्यासी गिरेगा नहीं।
       सेवा साधन करने से मंजूर होती है वह अच्छा रहेगा वरना हम किसी के घर के
जिम्मेदार नहीं हैं। समय ने आदमी की बु(ि हर ली है। किसी को यह नहीं कहा
जा सकता है कि कब किस की बु(ि नष्ट हो जावे। समय और हवा के चक्कर मंे
आदमी बह जाता है। गुरू स्मरण और दया से बचता है।
       गुरू कृपा को लेते रहो। हम सबके साथ हैं। गुरू सदा पास रहते है। अपने मन
को दुश्मन मत करो।

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